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Personal Loan लेते समय इन बातों का रखें ख्याल, तो कम होगी EMI

पर्सनल लोन जिसे कंज्यूमर लोन भी कहा जाता है. इसके लिए अप्लाई करने से पहले आपको अपनी जरूरतों का आकलन करना चाहिए.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

पर्सनल लोन लेने की तैयारी कर रहे हैं तो एक सही प्लानिंग ही आगे की राह को आसान कर सकती है. पर्सनल लोन लेने के बाद जो चीज आपको सबसे ज्यादा परेशान करती है वो है बढ़ती EMI. क्योंकि पर्सलन लोन का इंट्रेस्ट रेट दूसरे लोन से बहुत ज्यादा होता है. पर्सनल लोन लेने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखा जाना जरूरी है. लोन और लोन की राशि से जुड़े कुछ सवालों का जवाब पहले ही खोज लिया जाए तो कर्ज के बोझ से जल्द से जल्द छुटकारा पाया जा सकता है. किसी बैंक की पर्सनल लोन की ब्याज दरों को जानने से पहले आपको पता होना चाहिए कि पर्सनल लोन आपको तत्काल भुगतान करने में कैसे मदद कर सकता है. आपको ये 6 जरूरी पॉइंट्स अगले पर्सनल लोन पर सर्वोत्तम ब्याज दर खोजने में मदद कर सकते हैं.

क्रेडिट स्कोर होना चाहिए बेहतर

किसी भी भारतीय बैंक से किसी भी पर्सनल लोन के लिए आवेदन करने से पहले आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपके पास एक अच्छी क्रेडिट रिपोर्ट हो. जब आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा होगा, तो आपको बैंकों से व्यक्तिगत कर्ज मिलने की संभावना बढ़ जाएगी, और आपके पास कई अच्छे विकल्प उपलब्ध होंगे. जब आप कर्ज के लिए बैंक से बातचीत करते हैं तो आपको फायदा भी मिल सकता है.

आपको ऑफर्स का उठाना होगा फायदा

बैंकों को विशिष्ट समय पर मौसमी ऑफर चलाने के लिए जाना जाता है, और इस प्रकार के ऑफ़र आपको व्यक्तिगत ऋण ब्याज दर प्रदान कर सकते हैं जो सामान्य रूप से दी जाने वाली ब्याज दरों से कम होती हैं. लेकिन आपको ये ऑफर सीमित समय के लिए ही मिल सकते हैं, इसलिए आपको इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि बैंक कब ये ऑफर देते हैं.

पर्सनल लोन इंटरेस्ट रेट

पर्सनल लोन के लिए अप्लाई करने से पहले आपको ये चेक कर लेना चाहिए कि कौन सा बैंक कितनी ब्याज दर पर लोन ऑफर कर रहा है. आपके लोन अमाउंट के हिसाब से लोन पर अलग-अलग ब्याज दरें हो सकती है. इंटरेस्ट रेट बड़ा फैक्टर है क्योंकि इसी से यह कैलकुलेट होता है कि आपको प्रिंसिपल लोन अमाउंट पर आपको कितना ब्याज चुकाना होगा.

EMI पर क्या है राहत?

पर्सनल लोन दो तरह के होते हैं. प्रिंसिपल अमाउंट यानी मूलधन और इस मूलधन पर इंटरेस्ट यानी ब्याज दर. आपको इन्हें किस्तों या EMI (Equated Monthly Instalments) में चुकाना होता है. आप लोन ले रहे हैं तो इसका कैलकुलेशन कर लें कि आपको हर महीने कितनी EMI भरनी होगी. कुछ बैंक या NBFCs आपको स्टैंडर्ड EMI अमाउंट के साथ-साथ फ्लेक्सिबल EMI का ऑप्शन भी देते हैं. स्टैंडर्ड EMI के तहत आप हर महीने एक बंधी-बंधाई किस्त चुकाते हैं. वहीं फ्लेक्सिबल EMI में आप कम किस्त से शुरू करके धीरे-धीरे इसे बढ़ाते हैं.

लोन चुकाने की शर्तें क्या हैं?

Personal Loan चुकाने के पहले आपको लोन अमाउंट टेन्योर पूरा होने से पहले चुकाने यानी लोन प्रीपेमेंट की शर्तें भी चेक कर लेनी चाहिए. कई बैंक या NBFCs लोन के प्रीपेमेंट पर पेनाल्टी लगाते हैं. यानी आपको लोन की अवधि पूरी होने से पहले ही लोन का पैसा चुका देने पर जुर्माना देना पड़ता है, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बैंक को आपको लोन देकर हर महीने ब्याज मिल रहा है, आप जल्दी लोन चुका देते हैं, तो उसके पास ये पैसा आना बंद हो जाता है. आप लोन जारी करवाने से पहले ये पता कर सकते हैं कि अगर आप वक्त से पहले लोन चुकता करना चाहें तो क्या आपको जुर्माना भरना पड़ेगा.

बैंक का ट्रैक रिकॉर्ड

बैंकों का ट्रैक रिकॉर्ड भी चेक करना जरूरी है. आपको पहले लेंडर का ट्रैक रिकॉर्ड चेक कर लेना चाहिए कि वो बाजार में कितने वक्त से है, कितना मजबूत है, ग्राहकों का अनुभव कैसा रहा है. पर्सनल लोन आपकी कई जरूरतों को पूरा कर सकता है और अब ये अलग-अलग प्लान्ड और अनप्लान्ड जरूरतों के लिए अवेलेबल भी हैं, ऐसे में आपको इसके लिए अप्लाई करने से पहले ऊपर बताई गई बातों पर अच्छे से सोच-समझ लेना चाहिए.
 


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