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क्‍या आपको भी लेना है रिफंड, जान लीजिए ये 5 प्रावधान?

आईटीआर)दाखिल करने की तय तारीख 31 जुलाई 2023 है. यदि आपके द्वारा दिया गया टैक्‍स आपकी देनदारी से अधिक है तो आप ज्‍यादा दिए गए  टैक्‍स के रिफंड के हकदार हैं. उसके लिए आपको आईटीआर दाखिल करना होगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की तय तारीख 31 जुलाई 2023 है. इस तारीख तक आपको अपना इनकम टैक्‍स जमा कर देना है. लेकिन कई बार ये सवाल पैदा होता है कि आखिर रिफंड का अधिकारी कौन है. इसे लेकर आईटीआर और टैक्‍स के नियम क्या हैं? आप अपने रिफंड का दावा कैसे कर सकते हैं? इस स्‍टोरी में आपको यही जानने को मिलेगा. 

आप आखिर कब पा सकते हैं रिफंड 
कोई भी करदाता रिफंड पाने का अधिकारी तब होता है जब वो अपने नियत टैक्‍स से ज्‍यादा टैक्‍स जमा करता है. अब सवाल ये है कि आखिर कोई भी व्‍यक्ति ज्‍यादा टैक्‍स कैसे जमा करता है. इसके कुछ कारण हैं,  इनमें स्रोतों पर कर कटौती (टीडीएस), शामिल है, स्रोत पर एकत्रित कर (टीसीएस) के साथ-साथ करदाता द्वारा स्वयं भुगतान किए गए कर जैसे अग्रिम कर और सेल्‍फ-असेसमेंट कर शामिल हैं. लेकिन एक बात याद रखने वाली ये है कि ये अपने आप नहीं आता है. इसके लिए आपको एक प्रोसेस फॉलो करना पड़ता है. इसका दावा करने के लिए आपको अपना आईटीआर दाखिल करना होगा. रिफंड का दावा करने के लिए अपना आईटीआर दाखिल करते समय, इस बात को सत्यापित करना होगा कि टैक्स क्रेडिट फॉर्म संख्या में दिखाई दे रहा है. अपने द्वारा जमा किए गए सभी टैक्‍स को सत्यापित भी करना होगा. साथ ही ध्‍यान रहे कि आपको एकाउंट नंबर बैंक में अपडेट हो। 

इनकम टैक्‍स रिफंड का दावा आपको कैसे करना है? 
इनकम टैक्‍स के लिए रिफंड का दावा करते समय, आपको अपनी हर तरह की आय, आपको मिली छूट और सभी कटौतियों का दावा करना होगा. इसके बाद अगर आपके द्वारा जमा किया गया कर आपके बने कर से ज्‍यादा होता है तो बचा हुआ पैसा आपको रिफंड कर दिया जाएगा. इस बात को भी ध्‍यान में रखना चाहिए कि रिफंड तुरंत नहीं आता है, बल्कि पहले से भुगतान किए गए टैक्‍स की डिटेल आयकर विभाग द्वारा उसके पास उपलब्ध जानकारी से वेरिफाई किए जाने के बाद ही आपको जारी किया जाएगा. 

अगर आप रिफंड दाखिल नहीं कर पाए तो 
आईटीआर दाखिल करने की आखिरी तारीख वैसे तो 31 जुलाई है लेकिन आप 31 दिसंबर तक भी अपना टैक्‍स फाइल कर सकते हैं. लेकिन उसके लिए आपको लेट पेमेंट देना होगा. लेकिन अगर आप 31 दिसंबर तक भी अपना आईटीआर दाखिल नहीं कर पाते हैं तो इनकम टैक्‍स विभाग के 9/2015 के सर्कुलर के अनुसार छह मूल्यांकन वर्षों के लिए, कुछ शर्तों के साथ इसे फाइल कर सकते हैं. इस सर्कुलर के तहत रिफंड का दावा करने के लिए, आपको पहले लेट प्रोसेस के लिए एक आवेदन दाखिल करना होगा और एक बार उसके लिए माफी मिलने के बाद आप माफी देने वाले आदेश का हवाला देते हुए पिछले छह वर्षों के लिए आईटीआर ऑनलाइन दाखिल कर सकते हैं.

आयकर रिफंड की करदेयता
रिफंड का दावा प्रोसेस होने के बाद आपको मिले पैसे पर टैक्‍स को लेकर संशय होता है. जहां तक प्राप्त राशि पर कर का सवाल है तो भुगतान की गई अतिरिक्त कर की शुद्ध राशि बिल्कुल भी कर योग्य नहीं है. आयकर अधिनियम ये कहता है कि अगर आपने देनदारी से अधिक कर दिया है तो आप उस पर ब्‍याज पाने के अधिकारी हैं. जिस वर्ष के लिए आईटीआर दाखिल किया गया है उसके अगले वित्तीय वर्ष के 1 अप्रैल से ब्याज दिया जाता है. यदि अधिकांश मामलों में आईटीआर नियत तारीख यानी 31 जुलाई तक दाखिल किया जाता है तो करदाता पूरा ब्याज पाने का हकदार है. यदि करदाता के कारण रिफंड का दावा दायर करने में देरी होती है, तो करदाता ऐसी देरी के लिए ब्याज का हकदार नहीं है.

 आपका रिफंड कब रोका जा सकता है और दावा कैसे करें
आयकर कानूनों में ऐसे प्रावधान हैं जो आयकर विभाग को पिछले वर्षों के किसी भी बकाये के लिए उस पैसे को जमा करने का अधिकार देते हैं. कानून में यह भी प्रावधान है कि इस तरह का एडजस्‍टमेंट करने से पहले आयकर विभाग को एक सूचना देनी होगी. सभी मामलों में इस प्रावधान का पालन नहीं किया जाता है. यदि आपका रिफंड गलत तरीके से समायोजित किया गया है, तो आप अपने खाते में लॉग इन करने के बाद आयकर वेबसाइट पर शिकायत दर्ज करके इसका दावा कर सकते हैं. यद्यपि आयकर विभाग के पास पहले के वर्षों की किसी भी बकाया मांग के विरुद्ध देय रिफंड को समायोजित करने की शक्तियां हैं, लेकिन करदाता आने वाले वर्षों के लिए पिछले वर्ष के रिफंड को एडजस्‍ट नहीं कर सकता है, उसे ऐसा अधिकार नहीं है.

इनका Income Tax सुन रह जाएंगे भौचक्के!

 


 


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