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1 साल में 40 प्रतिशत रिटर्न, फायदेमंद है म्यूचुअल फंड की ये स्कीस

बाजार में नए आए पैसिव ELSS फंडों ने पिछले 1 साल में तकरीबन 25 प्रतिशत तक का रिटर्न दिया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

अगर आप वित्त वर्ष 2024-25 के लिए म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश कर 80C के तहत डिडक्शन का फायदा लेना चाहते हैं. साथ ही चाहते हैं कि अपने निवेश पर इक्विटी की तरह लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में छूट मिले तो आपको वित्त वर्ष की शुरुआत में ईएलएसएस (Equity Linked Savings Scheme यानी ELSS) में निवेश कर देना चाहिए. नियमों के अनुसार अगर आप इक्विटी (Equity) स्कीम में निवेश करते हैं, तो आपको सालाना 1 लाख रुपये तक के कैपिटल गेन पर कोई टैक्स नहीं चुकाना पड़ता है. ऐसे में ELSS में निवेश करना एक बेहतर विकल्प है, तो चलिए जानते हैं क्या ELSS स्कीम और इसके फायदे?

500 रुपये से शुरू कर सकते हैं निवेश
ELSS (एक्टिव ELSS) एक डाइवर्सिफाइड (diversified)/मल्टीकैप इक्विटी MF स्कीम है जिसमें आपकी रकम को अलग अलग साइज की कंपनियों के शेयरों में निवेश किया जाता है. किसी भी अन्य MF की तरह आप 500 रुपये से इसमें निवेश प्रारंभ कर सकते हैं, जबकि अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है. अन्य MF स्कीम की तरह इसे जब चाहें रिडीम यानी बंद नहीं कर सकते हैं. ELSS का अनिवार्य लॉक-इन पीरियड 3 वर्ष है. मतलब आप तीन वर्ष से पहले इस स्कीम से नहीं निकल सकते हैं. 

लांग-टर्म इन्वेस्टमेंट का बेहतर विकल्प
ELSS में वही जोखिम है, जो इक्विटी MF में निवेश के हैं. इसमें फिक्स्ड रिटर्न जैसी कोई चीज नहीं है. लेकिन अगर आप लांग टर्म में यानी कम से कम 7 से 10 वर्ष के लिए निवेश करेंगे तो आपको फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स (fixed income instruments) की तुलना में बेहतर रिटर्न मिलेगा, इसलिए बेहतर होगा कि 3 वर्ष के अनिवार्य lock-in period के बाद भी ELSS में निवेश को बरकरार रखें. कुल मिलाकर ये टैक्स में छूट पाने से कहीं ज्यादा लांग-टर्म इन्वेस्टमेंट का बेहतर विकल्प है.

SIP के जरिए निवेश बेहतर
इसमें एकमुश्त (lump sum) के बजाए सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी या SIP) यानि एक निश्चित मासिक, तिमाही, छमाही, या सालाना अंतराल पर एक निश्चित रकम के जरिए निवेश करना बेहतर माना जाता है, क्योंकि इसमें मार्केट को टाइम करने का जोखिम नहीं है. साथ ही मार्केट से संबंधित उतार-चढाव का एवरेजिंग (averaging) भी हो जाता है, लेकिन अगर आप SIP के माध्यम से निवेश करेंगे तो हर किस्त का lock-in period अलग अलग होगा.

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निवेशकों को मिल रहा अच्छा रिटर्न 
पारंपरिक टैक्स सेविंग इंस्ट्रूमेंट्स के मुकाबले म्यूचुअल फंड की इस स्कीम में बेहतर रिटर्न मिलने की भी संभावना है. इस कैटेगरी के फंडों ने बीते एक साल में औसतन 40 फीसदी का एनुअल रिटर्न दिया है. जबकि पिछले तीन साल और पांच साल में इस कैटेगरी के फंडों से निवेशकों ने औसतन 20 प्रतिशत और 19 प्रतिशत सालाना कमाए हैं. यहां तक कि बाजार में नए आए पैसिव ELSS फंडों ने भी पिछले एक साल में तकरीबन 25 प्रतिशत तक का रिटर्न दिया है.

क्या ELSS पर मिलेगा डिडक्शन का फायदा?
इस स्कीम में आप निवेश करते हैं तो एक वित्त वर्ष में 80C के तहत deduction का फायदा अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक के निवेश (अन्य विकल्पों में निवेश की राशि को मिलाकर) पर ही मिलेगा. लेकिन डिडक्शन का यह फायदा आप पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत ही उठा सकते हैं. नई टैक्स व्यवस्था में ELSS पर इस तरह की कोई छूट नहीं है.

क्या ELSS से कमाई पर चुकाना पड़ेगा टैक्स?
ELSS एक इक्विटी MF स्कीम है, क्योंकि इस स्कीम में मिनिमम 80 प्रतिशत निवेश इक्विटी और इक्विटी-रिलेटेड इंस्ट्रूमेंट में होता है. नियमों के अनुसार अगर इक्विटी स्कीम (ग्रोथ प्लान) को आप 1 साल के बाद रिडीम करते हैं, तो नई और पुरानी दोनों टैक्स व्यवस्थाओं में  आपको 1 लाख रुपये तक के एनुअल कैपिटल गेन पर कोई टैक्स नहीं देना होगा, जबकि सालाना 1 लाख रुपये से ज्यादा के कैपिटल गेन पर 10 प्रतिशत लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG/एलटीसीजी) टैक्स का प्रावधान है. वहीं, आप dividend प्लान लेते हैं तो निवेश की अवधि के दौरान (lock-in period से पहले और बाद दोनों), जो रिटर्न dividend के रूप में मिलता है, वह आपकी सालाना इनकम में जुड़ जाएगा और आपको अपने टैक्स स्लैब के हिसाब से उस रकम पर टैक्स देना होगा.

अब पैसिव ELSS फंडों में भी कर सकते हैं निवेश
जब से एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (asset management companies यानी AMC) को सेबी (SEBI) की तरफ से पैसिव स्कीम (passive scheme) लॉन्च करने की अनुमति मिली है, निवेशकों के पास एक्टिव के साथ-साथ पैसिव ELSS स्कीम में भी निवेश का विकल्प खुल गया है, इसलिए वैसे निवेशक जो कम जोखिम लेना चाहते हैं, पैसिव ELSS के साथ जा सकते हैं. पैसिव ELSS में फंड मैनेजर की सक्रिय भूमिका नहीं होती है, इसलिए टोटल एक्सपेंस रेश्यो (total expense ratio) भी एक्टिव स्कीम के मुकाबले इसमें कम है. निवेश की रणनीति में निरंतरता (continuity) और पारदर्शिता (transparency) की वजह से भी निवेशक इस नए विकल्प को पसंद कर सकते हैं. अभी मार्केट में 3 पैसिव फंड ही लॉन्च हुए हैं, जिसमें 360 ONE ELSS निफ्टी 50 टैक्स सेवर इंडेक्स फंड, Navi ELSS टैक्स सेवर निफ्टी 50 इंडेक्स फंड और Zerodha ELSS Tax Saver Nifty Large Midcap 250 Index Fund। बाकी जो भी फंड उपलब्ध हैं.
 


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