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कभी गुमनाम रही ED एकदम से कैसे हो गई एक्टिव? पढ़ें इसके पीछे की कहानी
मीडिया में ED की कार्रवाई से जुड़ी कोई न कोई खबर रोज आ रही है. ED की स्थापना 1956 में हुई थी, लेकिन लोगों ने इसके बारे में सही से 2014 के बाद से ही जानना शुरू किया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
सरकारी जांच एजेंसियों में प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) आजकल सबसे ज्यादा सुर्ख़ियों में हैं. मीडिया में ED की कार्रवाई से जुड़ी कोई न कोई खबर रोज आ रही है. ED की स्थापना 1956 में हुई थी, लेकिन लोगों ने इसके बारे में सही से 2014 के बाद से ही जानना शुरू किया. ऐसे में यह सवाल लाजमी है कि आखिर एकदम से ED इतनी एक्टिव कैसे हो गई?
आंकड़े दे रहे गवाही
विपक्ष प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बता रहा है. पहले, यही बात सीबीआई के लिए कही जाती थी. वैसे इसमें कोई नई या चौंकाने वाली बात नहीं है, विपक्ष में बैठी पार्टी का ऐसा आरोप लगाना परंपरा बन गई है. लिहाजा, हम अपने मूल सवाल पर वापस लौटते हैं, आखिर ED एकदम से इतनी एक्टिव कैसे हुई? इसका जवाब है काम करने की आजादी और हस्तक्षेप में कमी. आंकड़े भी यही बात कह रहे हैं. 2014 यानी कि केंद्र में सत्ता परिवर्तन के बाद से ED ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई में तेजी लाते हुए ज्यादा केस दर्ज किए हैं.
मनमोहन-मोदी सरकार का अंतर
एक रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2014 से मार्च 2022 तक प्रवर्तन निदेशालय ने 3,555 केस दर्ज किए और लगभग एक लाख करोड़ की संपत्ति जब्त की. अब इसकी तुलना यूपीए सरकार के कार्यकाल से करें, तो यूपीए के 9 साल के दौरान 1867 मामले दर्ज किए गए और 4156 करोड़ की संपत्ति जब्त हुई. इसके साथ ही, UPA के कार्यकाल में ईडी ने 112 छापे मारे थे, जबकि एनडीए सरकार के 8 साल के दौरान यह संख्या 2974 पहुंच गई है.
बड़े-बड़े नाम शिकंजे में
ED हाल के दिनों में कुछ बड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, जिसकी वजह से उसे लेकर चर्चा का दौर शुरू हो गया है. दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन, जम्मू-कश्मीर के पूर्व CM फारुख अब्दुल्ला, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी, महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाब मलिक, नेशनल हेराल्ड मामले में राहुल और सोनिया गांधी ED के रडार पर हैं.
साल-दर-साल बढ़ रहा ग्राफ
ED की एक रिपोर्ट बताती है कि किस तरह से साल दर साल उसकी कार्रवाई का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. Prevention of Money Laundering Act यानी कि PMLA के तहत 2016-17 में एजेंसी ने 4567 समन भेजे और 226 छापे मारे. इसी तरह, 2019-20 में 10688 लोगों को समन भेजा गया और छापे की 335 कार्रवाई हुईं. 2020-21 में 12173 लोगों को समन भेजा गया और 596 छापे मारे गए. शिकायतों पर एक्शन की बात करें, तो UPA के कार्यकाल में 104 शिकायतों पर कार्रवाई हुई थी, जबकि मोदी सरकार (2014 से 2022) में यह आंकड़ा 839 है.
करप्शन पर सख्त नीति
दरअसल, मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जो कड़ी नीति अपनाई है, उससे ED जैसी संस्थाओं को काम करने की आजादी मिली है. इस वजह से ज्यादा शिकायतों पर कर्रवाई हो रही है, ज्यादा केस दर्ज हो रहे हैं. यही वजह है कि 2005 से 2014 तक गुमनाम रही ED 2014 के बाद से एकदम सुर्खियों में आ गई है.
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