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मोदी सरकार का बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर दांव: ₹13,041 करोड़ की रेल-हाईवे परियोजनाओं को कैबिनेट की मंजूरी

चार रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं पर ₹9,450 करोड़ और बिहार के 83 किलोमीटर फोरलेन हाईवे कॉरिडोर पर ₹3,591 करोड़ खर्च होंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में रेल और सड़क कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए कुल ₹13,041 करोड़ की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इसमें पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में करीब 410 किलोमीटर लंबी चार रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएं और बिहार में 83 किलोमीटर लंबे फोरलेन हाईवे कॉरिडोर का विकास शामिल है.

इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य व्यस्त रेल मार्गों पर क्षमता की बाधाओं को दूर करना, माल ढुलाई को गति देना और बंदरगाहों, औद्योगिक केंद्रों, खनन क्षेत्रों तथा स्टील उत्पादन वाले इलाकों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करना है.

रेलवे परियोजनाओं पर ₹9,450 करोड़ का निवेश

चारों रेलवे परियोजनाओं पर कुल ₹9,450 करोड़ खर्च किए जाएंगे. इनमें से ज्यादातर परियोजनाएं हावड़ा-चेन्नई हाई डेंसिटी नेटवर्क (HDN) और कटक-पारादीप कॉरिडोर से जुड़ी हैं.

खड़गपुर-रानीताल के बीच बनेगी चौथी रेल लाइन

सबसे बड़ी परियोजना के तहत पश्चिम बंगाल के खड़गपुर से ओडिशा के रानीताल के बीच 173 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन बनाई जाएगी. इस पर करीब ₹3,352 करोड़ खर्च होंगे. यह रेलखंड पश्चिम मेदिनीपुर, बालेश्वर और भद्रक से होकर गुजरता है और हावड़ा-चेन्नई हाई डेंसिटी नेटवर्क का हिस्सा है. इस मार्ग पर यात्री और मालगाड़ी दोनों का भारी दबाव रहता है.

परियोजना में दो बड़े पुल समेत 41 प्रमुख और 169 छोटे पुल बनाए जाएंगे. इनमें सुवर्णरेखा नदी पर 564 मीटर लंबा पुल भी शामिल है. नई लाइन से जखापुरा, टाटानगर और दुर्गापुर जैसे स्टील उत्पादक केंद्रों की पारादीप और धामरा बंदरगाहों से कनेक्टिविटी मजबूत होगी.

भद्रक-हरिदासपुर में चौथी लाइन

ओडिशा में भद्रक और हरिदासपुर के बीच 75 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन के निर्माण को भी मंजूरी मिली है. इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹1,583 करोड़ है. भद्रक और जाजपुर जिलों से गुजरने वाला यह रेलखंड फिलहाल करीब 91 प्रतिशत क्षमता पर चल रहा है. अतिरिक्त लाइन से स्टील उत्पादक केंद्रों और पूर्वी तट के बंदरगाहों के बीच माल ढुलाई को बढ़ावा मिलेगा.

सरकार का अनुमान है कि इससे हर साल करीब 2.9 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता पैदा होगी और लॉजिस्टिक्स लागत में लगभग ₹433 करोड़ सालाना की बचत हो सकती है.

गुम्मिडीपुंडी-गुडूर में तीसरी और चौथी लाइन

तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के बीच 90 किलोमीटर लंबे गुम्मिडीपुंडी-गुडूर रेलखंड पर तीसरी और चौथी लाइन बनाई जाएगी. इस परियोजना पर करीब ₹2,229 करोड़ खर्च होंगे. यह मार्ग दिल्ली-चेन्नई और हावड़ा-चेन्नई दोनों हाई डेंसिटी नेटवर्क का हिस्सा है. यह विशाखापत्तनम-चेन्नई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और प्रस्तावित ईस्ट कोस्ट इकोनॉमिक कॉरिडोर से भी जुड़ा है.

मौजूदा क्षमता के 131 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है. नई लाइनों से चेन्नई, कामराजार (एन्नोर) और कृष्णापट्टनम बंदरगाहों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और सालाना करीब 2.1 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी.

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, इस परियोजना से करीब 61 लाख मानव-दिवस का रोजगार पैदा होने की उम्मीद है. अतिरिक्त माल ढुलाई से हर साल करीब 17 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आ सकती है.

कटक-पारादीप रेलखंड का भी होगा विस्तार

ओडिशा में 72 किलोमीटर लंबे कटक-पारादीप रेलखंड के लिए ₹2,286 करोड़ की परियोजना को मंजूरी दी गई है. इसके तहत तीसरी और चौथी रेल लाइन बनाई जाएगी. इससे पारादीप बंदरगाह को कटक के पास हावड़ा-चेन्नई हाई डेंसिटी नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकेगा. साथ ही कलिंगानगर स्टील क्लस्टर, क्योंझर की लौह अयस्क खदानों और तालचेर के कोयला क्षेत्रों तक कनेक्टिविटी मजबूत होगी.

मौजूदा रेलखंड करीब 101 प्रतिशत क्षमता पर चल रहा है और औद्योगिक व बंदरगाह गतिविधियों के बढ़ने के साथ इसके 177 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है. परियोजना से सालाना 1.2 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता जुड़ने और लॉजिस्टिक्स लागत में करीब ₹173 करोड़ की सालाना बचत होने की उम्मीद है.

बढ़ती परिवहन मांग के बीच रेल क्षमता पर जोर

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत में परिवहन की मांग हर साल करीब 10 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है. ऐसे में रेलवे, सड़क, हवाई और जल परिवहन सभी क्षेत्रों में क्षमता बढ़ाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि अतिरिक्त रेल क्षमता का उद्देश्य सिर्फ अधिक ट्रेनों को चलाना नहीं है, बल्कि ट्रेनों की औसत गति और सुरक्षा में भी सुधार करना है. पिछले एक दशक में करीब 81 प्रतिशत रेलवे ट्रैक को अपग्रेड किया गया है, जबकि रेलवे नेटवर्क का 99.6 प्रतिशत विद्युतीकरण हो चुका है.

सड़क के मुकाबले रेल से माल ढुलाई सस्ती

वैष्णव ने परिवहन के अलग-अलग माध्यमों की लागत का भी उल्लेख किया. उनके अनुसार, समुद्री मार्ग से माल ढुलाई की संकेतात्मक लागत करीब 55 पैसे प्रति टन-किलोमीटर है, जबकि रेल से यह करीब ₹1.60 और सड़क से करीब ₹3.60 प्रति टन-किलोमीटर है.

लागत में इस अंतर से औद्योगिक और बंदरगाह आधारित कॉरिडोर में माल ढुलाई को सड़क से रेल की ओर स्थानांतरित करने में मदद मिल सकती है. रेल परिवहन पर्यावरण की दृष्टि से भी सड़क परिवहन की तुलना में बेहतर है.

बिहार में ₹3,591 करोड़ का फोरलेन हाईवे

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बिहार में मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और सोनबरसा के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-22 पर 83 किलोमीटर लंबे फोरलेन ब्राउनफील्ड कॉरिडोर के विकास को भी मंजूरी दी है. इस परियोजना पर ₹3,591 करोड़ खर्च किए जाएंगे.

परियोजना को हाइब्रिड एन्युइटी मोड (HAM) के तहत लागू किया जाएगा और इसके निर्माण में करीब 30 महीने लगने की उम्मीद है. इसमें सात बड़े पुल, तीन रोड ओवरब्रिज और छह व्हीकल अंडरपास बनाए जाएंगे. बागमती नदी पर 340 मीटर लंबा पुल भी परियोजना का हिस्सा होगा.

मुजफ्फरपुर-सोनबरसा सफर का समय आधा होने की उम्मीद

फोरलेन कॉरिडोर तैयार होने के बाद मुजफ्फरपुर से सोनबरसा के बीच यात्रा का समय करीब दो घंटे से घटकर एक घंटे रह सकता है. इससे जाम कम करने और वाहनों की परिचालन लागत घटाने में भी मदद मिलेगी. यह कॉरिडोर पांच पीएम गति शक्ति आर्थिक नोड, चार सामाजिक नोड और दो लॉजिस्टिक्स नोड को जोड़ेगा.

चार साल में पूरी होंगी रेलवे परियोजनाएं

₹13,041 करोड़ के कुल निवेश में रेलवे की चार परियोजनाओं पर ₹9,450 करोड़ और बिहार हाईवे परियोजना पर ₹3,591 करोड़ खर्च होंगे. रेलवे परियोजनाओं को चार साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि बिहार हाईवे कॉरिडोर का निर्माण 30 महीने में पूरा होने की उम्मीद है. इन परियोजनाओं से प्रमुख रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाने के साथ बंदरगाहों, खदानों, औद्योगिक क्लस्टरों और अन्य माल उत्पादक केंद्रों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है.
 


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