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बुजुर्गों के साथ-साथ Youth को भी जकड़ रहा कमर दर्द, जानें कैसे पाएं इससे छुटकारा

वैसे तो कमर दर्द की समस्या के कई कारण हैं, लेकिन सबसे प्रमुख हैं खराब लाइफस्टाइल और खानपान.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

कमर दर्द आजकल एक आम समस्या हो गई है. बुजुर्गों के साथ-साथ युवा भी अब इसकी चपेट में आने लगे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है खराब लाइफस्टाइल और खानपान. कुछ रिसर्च में यह सामने आया है कि युवा तेजी से कमर दर्द का शिकार बन रहे हैं. हर तीन में से एक युवा इस परेशानी से जूझ रहा है. 35 से 50 साल की आयु के लोग इससे ज्यादातर प्रभावित रहते हैं. आखिर ऐसा क्यों हो रहा है और इससे कैसे बचा जा सकता है, ‘स्टार इमेजिंग एवं पैथ लैब’ के निदेशक डॉ समीर भाटी बता रहे हैं. 

क्या होते हैं कारण?
कमर दर्द के कारण की बात करें, तो सामान्यतः इस दर्द के कारणों में अचानक से झुकने, भारी वजन उठाने या फिर गलत तरीके से उठने बैठने की वजह से आया मांसपेशियों में खिंचाव शामिल है. यहां तक कि मानसिक तनाव से भी मांसपेशियों में अकड़न आती है जो कि कमर दर्द का कारण बनती है. इसके अलावा भी किसी प्रकार का इन्फेक्शन या स्लिप डिस्क की बीमारी के चलते कमर दर्द हो सकता है पर इसे हम स्पेसिफिक कमर दर्द की श्रेणी में डालते हैं .

कैसे करें अपना बचाव?
किसी भी स्थिति मे आने से बेहतर है कि हम कमर को स्वस्थ और मजबूत रखने की दिशा में काम करें. बहुत सारे योगासन और शारीरिक गतिविधियों के अभ्यास के द्वारा कमर दर्द से बचाव किया जा सकता है. बस हमें अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव करने होंगे. जैसे कि शारीरिक गतिविधियों के दौरान हमे यह ध्यान रखने की जरूरत है कि हमें कम प्रभावी एरोबिक एक्सरसाइज करनी चाहिए, यह आपकी कमर में खिंचाव या झटके नहीं लगने देगी. साथ ही इससे कमर मे भी मजबूती आएगी और यह मांसपेशियों को अच्छी तरह से काम करने में सक्षम बनाएगी. वॉकिंग और स्वीमिंग इसके सबसे अच्छे विकल्प हैं.

वजन नियंत्रित करना जरूरी
अगर हम अपने वजन को नियंत्रित रखें, तो भी बहुत हद तक हम कमर दर्द से बचाव कर सकते हैं. पेट और पीठ की मांसपेशियों के व्यायाम भी उनकी स्थिति में सुधार करता है. ये मिलकर कमर के लिए एक प्राकृतिक कोर्सेट का काम करते हैं जो कि कूल्हों और पैरों के ऊपरी हिस्सों में लचीलापन, पेल्विक की हड्डियों की मजबूती बढ़ाती है. इसके साथ ही हमें किसी भी ऐसी गतिविधि से बचना है, जिसके कारण कमर पर दबाव पड़े या किसी तरह का ट्विस्ट आए.

सीधे खड़े होने की आदत
इसके साथ ही आपको सीधे खड़े होने की आदत डालनी है, किसी भी स्थिति में एक दम से न झुकें. Working Hours के दौरान भी कमर के निचले हिस्से और हाथों को सहारा देने वाली कुर्सी का चुनाव करें. रीढ़ की हड्डी के कर्व को सामान्य रखने के लिए कमर के पिछले हिस्से में कुशन या तौलिया मोड़कर रख सकते हैं, साथ ही हमें अपने बैठने की मुद्रा को हर 15-20 मिनट में बदलते रहना है.

इस तरह करें बदलाव 
हमने देखा है कि ड्राइवरों में कमर दर्द की समस्या बेहद आम है. तो इसके लिए, खासकर गाड़ी चलाते समय भी हमें ध्यान रखना है कि स्टीयरिंग के करीब रहें ताकि जब आप अपने घुटनों से क्लच या ब्रेक दबाएं तो आपकी पीठ को तनाव न बढ़े. यदि आप लंबे समय तक पढ़ते-लिखते रहते हैं तो 30-डिग्री डेस्कटॉप स्लांट का इस्तेमाल करें. अगर ऑफिस वर्क के दौरान आप ज्यादा लम्बे समय लैपटॉप का उपयोग करते हैं, तो स्लेंटेड स्टैंड का उपयोग करें, यानी कि आपके लैपटॉप का उपरी भाग आपके सिर के समांतर होना चाहिए।

खानपान पर दें खास ध्यान 
इन सबके साथ-साथ हमें अपनी खानपान की जीवन शैली में भी सुधार करना होगा. ध्यान रहे कि खाने में पौष्टिक आहार प्रचुर मात्रा में हों, जिसके लिए हरी सब्जियां, फल, ड्राई फ्रूट दूध व दही का सेवन कर सकते हैं, साथ ही साथ कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें. बाहरी खाना, जंक फूड ओर चीनी के सेवन से बचें और अपनी रीड की हड्डी को स्वस्थ रखने के लिए खूब पानी पिएं. कमर की हल्के हल्के हाथों से मालिश करें और हर सप्ताह कम से कम एक घंटा पैदल चलने की आदत डालें.
अगर हम इस प्रकार से अपनी जीवन शैली में बदलाव लाते हैं, तो निश्चित तौर पर हम कमर दर्द से निजात पा सकते हैं और इसकी पुनरावृति को रोक सकते हैं.
 


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