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अब तक क्यों नहीं हुई Tesla की भारत में एंट्री, कहां अटका है पेंच; जानें सबकुछ
Elon Musk के PM मोदी को ट्विटर पर फॉलो करने के बाद से सवाल पूछा जा रहा है कि क्या Tesla भारत आने वाली है?
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
अरबपति कारोबारी और दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी टेस्ला (Tesla) के मालिक Elon Musk क्या भारत में एंट्री पर फिर से विचार कर रहे हैं? क्या अगले कुछ महीनों में Tesla की कारें भारतीय सड़कों पर नजर आ सकती हैं? ये सवाल खड़ा हुआ है, Musk द्वारा PM मोदी को ट्विटर पर फॉलो करने से. Musk पूरी दुनिया में केवल 194 लोगों को फॉलो करते हैं, जिसमें पीएम मोदी भी अब शामिल हैं. नेताओं में PM मोदी के अलावा टेस्ला के मालिक UK के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को फॉलो करते हैं.
इस वजह से अटका है मामला
सोशल मीडिया पर भी यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या टेस्ला भारत आने वाली है? टेस्ला दुनिया की सबसे बड़ी EV निर्माता कंपनी है. कंपनी की कारें अपने फीचर्स और डिजाइन के लिए पहचानी जाती हैं. टेस्ला के इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल्स फिलहाल तीन देशों में तैयार किए जाते हैं, इनमें अमेरिका के अलावा, चीन और जर्मनी शामिल है. हालांकि, उसकी कारें कई देशों में बेचीं जाती हैं. टेस्ला के भारत आने की बातें काफी समय से हो रही हैं, लेकिन बात ज्यादा आगे नहीं बढ़ सकी. दरअसल, Elon Musk जिस कंडीशन पर भारत में एंट्री चाहते हैं, मोदी सरकार उसके लिए तैयार नहीं है. वहीं, मोदी सरकार ने Musk के सामने जो शर्तें रखी हैं, उसे Musk नहीं मानना चाहते. इस वजह से मामला अटका हुआ है.
ये है सरकार की चाहत
कुछ वक्त पहले, एक कार्यक्रम के दौरान, केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि Elon Musk का भारत में स्वागत है, लेकिन यह तब तक संभव नहीं है, जब तक जब तक वो चीन में कार का निर्माण कर भारत में मार्केटिंग के लिए छूट चाहते हैं. गडकरी के कहना का मतलब है कि टेस्ला की कारें जब भारत में तैयार की जाएंगी, तब सरकार मस्क को सभी जरूरी लाभ और सुविधाएं देने के लिए तैयार होगी. केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा था कि अगर मस्क भारत में भी टेस्ला की गाड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाते हैं, तो हम उनका स्वागत करने के लिए तैयार हैं. उन्हें सभी तरह की छूट और बेनिफिट्स भी दिए जाएंगे, लेकिन इसके बिना यह संभव नहीं.
Musk ने बताई अपनी चाहत
वहीं, Elon Musk कहते आए हैं कि Tesla किसी भी ऐसी जगह मैन्युफैक्चरिंग प्लांट नहीं लगाएगी, जहां उसे पहले सेल एंड सर्विस की मंजूरी नहीं मिलती. यानी Musk चाहते हैं कि पहले मोदी सरकार उन्हें सभी लाभ और सुविधाओं के साथ भारत में टेस्ला की कारें बेचने दे, फिर बाद में बाजार की संभावनाओं को देखने के बाद वह प्लांट लगाने पर विचार करेंगे. इसके अलावा, टेस्ला और मोदी सरकार के बीच इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने को लेकर लंबे समय से बातचीत अटकी हुई है. Musk चाहते हैं कि भारत में टेस्ला की फैक्ट्री लगाने से पहले सरकार उन्हें पहले से तैयार इलेक्ट्रिक कारों को भारत लाने पर इम्पोर्ट टैक्स में छूट दे.
टैक्स का है बड़ा खेल
2022 की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में 40,000 डॉलर (करीब 30 लाख रुपए) तक कीमत वाली विदेशी इलेक्ट्रिक कारों पर 60% तक टैक्स लगता है. कीमत ज्यादा होने पर टैक्स की दर भी बढ़ जाती है. Tesla की कारों के मॉडल की प्राइज रेंज 39,990 डॉलर (करीब 30 लाख रुपए) से शुरू होकर 1,29,990 डॉलर (करीब 97.1 लाख रुपए) तक है. इसमें कंपनी के मॉडल 3, मॉडल Y, मॉडल X और मॉडल S हैं. मॉडल 3 की कीमत सबसे कम है. यदि इम्पोर्ट ड्यूटी के हिसाब से देखें, तो टेस्ला के सबसे सस्ते मॉडल 3 के सिर्फ बेस मॉडल पर ही 60% टैक्स लगेगा. इस तरह लगभग 30 लाख रुपए की ये कार भारत में टैक्स जोड़कर 48 लाख रुपए की हो जाएगी. Musk इतना ज्यादा टैक्स देने के लिए तैयार नहीं हैं.
प्रोडक्शन और रिवेन्यु बढ़ा
Tesla टेक्नोलॉजी में बदलाव पर जोर देने वाली कंपनी है और लगातार प्रयोग करती रहती है. यही वजह है कि उसकी कारों को काफी ज्यादा पसंद किया जाता है. पिछले साल टेस्ला का Model Y दुनियाभर में सबसे अधिक बिकने वाला मॉडल रहा था. इस मॉडल की कार फुल चार्ज में 525 किमी तक दौड़ सकती है. कंपनी के रिवेन्यु की बात करें, तो 2021 में Tesla का रिवेन्यु 53.8 बिलियन डॉलर था, जो 30 जून 2022 तक बढ़कर 67.166 बिलियन डॉलर पहुंच गया था. कंपनी का प्रोडक्शन भी लगातार बढ़ता जा रहा है. 2013 में कंपनी ने कुल 22,442 यूनिट्स बनाई थीं और 2022 में यह आंकड़ा बढ़कर 1,313,851 हो गया. इससे अंदाजा लगता जा सकता है कि कंपनी की कारों की डिमांड किस कदर बढ़ रही है.
यूरोप में भी बढ़ रहा क्रेज
अमेरिका के बाद Tesla का सबसे बड़ा बाजार चीन है. हालांकि, कंपनी यूरोप में भी लोकप्रियता हासिल कर रही है. 2021 में कंपनी ने यूरोप में 169,507 यूनिट्स बेचीं थीं. Tesla मॉडल 3 को यूरोप के पसंदीदा इलेक्ट्रिक कार का खिताब भी मिल चुका है. टेस्ला अपने चार्जिंग स्टेशन का जाल भी तेजी से फैला रही है. पिछले साल की शुरुआत तक कंपनी के दुनियाभर में 3,724 सुपरचार्जर स्टेशन थे और दिसंबर आते-आते ये संख्या 4678 पहुंच गई. इन स्टेशनों पर महज 15 मिनट में ही कार को चार्ज करने की सुविधा है. टेस्ला ने मार्केट पर पकड़ बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं, इसमें डिलीवरी टाइम को कम करना भी शामिल है. 2017 में टेस्ला ग्राहक को कार डिलीवर करने में 28 दिन का समय लेती थी, जो अब 12 से 15 दिन हो गया है.
भारत में मिलेगी चुनौती
अब यदि टेस्ला की वास्तव में भारत में एंट्री होती है, तो उसे कई बड़े प्लेयर्स का सामना करना होगा. भारत में इलेक्ट्रिक कारों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है. पिछले साल मार्च में 3,718 इलेक्ट्रिक कारें बिकी थीं. इस बार यह आंकड़ा बढ़कर 8,566 पहुंच गया है. फिलहाल, टाटा मोटर्स का बाजार में दबदबा है, लेकिन कई दूसरी कंपनियां भी तेजी से अपने EV पोर्टफोलियो में विस्तार कर रही हैं. जापानी कंपनी टोयोटा (Toyota) ने इसके लिए एक बड़ा प्लान तैयार किया है. कंपनी भारतीय बाजार में 10 नए इलेक्ट्रिक मॉडल उतारने जा रही है. इसके अलावा, चीनी BYD भी भारत में एंट्री कर चुकी है.
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