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अब दिल्ली नहीं, NCR है दिलवालों की पहली पसंद!

रियल एस्टेट का क्षेत्र बढ़ तो रहा है लेकिन दिल्ली से पलायन करने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

देश की राजधानी दिल्ली में रहना बहुत से लोगों का सपना होता है. दिल्ली अपनी खूबसूरती, मौसम और बेहतर सुविधाओं की वजह से भी बहुत से लोगों के लिए रहने की पहली पसंद हुआ करती थी. जी हां आपने बिलकुल सही पढ़ा, रहने के लिए दिल्ली लोगों की पहली पसंद हुआ करती थी पर अब ऐसा नहीं है. पिछले कुछ समय के दौरान देखने को मिला है कि दिलवालों की दिल्ली से लोग बहुत बड़ी संख्या में पलायन कर रहे हैं. रियल एस्टेट का क्षेत्र बढ़ तो रहा है लेकिन दिल्ली से पलायन करने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है. आइए जानते हैं, कि आखिर लोग दिल्ली से दूर क्यों भाग रहे हैं?

कम हो रही है हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की संख्या
दिल्ली एक ऐसा शहर है जिसमें लाख खामियां भी हों तो भी लोगों को यहां रहने के लिए कोई न कोई कारण मिल ही जाता है. लेकिन लोगों को रहने के लिए घर भी तो चाहिए. पिछले एक दशक के दौरान दिल्ली के प्रमुख हिस्सों में अच्छे हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की संख्या कम होती जा रही है जबकि दिल्ली के बाहरी क्षेत्रों और NCR (नेशनल कैपिटल रीजन) यानी नोएडा और गुरुग्राम जैसे क्षेत्रों में आए दिन किसी न किसी नए हाऊसिंग प्रोजेक्ट या लग्जरी हाउसिंग प्रोजेक्ट की घोषणा होती रहती है. यूं तो दिल्ली में गोदरेज, DLF, M3M, County, Max और TARC जैसे बहुत से प्रमुख रियल एस्टेट डेवलपर्स ने अपने प्रोजेक्ट शुरू किए हैं, लेकिन इन प्रोजेक्ट्स के साथ भी कुछ समस्याएं हैं. 

दिल्ली में नहीं है जगह?
सबसे पहली समस्या तो जगह की ही है. जैसा कि हम सब जानते हैं दिल्ली में जगह की कमी है. सिर्फ घर बनाने के लिए ही नहीं, गाड़ियों की पार्किंग के लिए भी जगह इतनी कम है कि यह समस्या अक्सर ही सुर्खियों का हिस्सा बनी रहती हैं. जब जगह इतनी कम हो तो हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की संख्या अपने आप कम हो जाती है. जनसंख्या के मामले में भारत के प्रमुख जिलों में से टॉप 3 नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली, सेंट्रल दिल्ली और ईस्ट दिल्ली हैं. दिल्ली के प्रमुख रिहायशी इलाकों में आपको 100 गज या फिर 200 गज का मकान मिल सकता है, लेकिन उसके लिए आपको अच्छी खासी कीमत अदा करनी पड़ती है और साथ ही घर ढूंढने के लिए काफी मशक्कत भी. पटेल नगर, करोल बाग, न्यू राजेंद्र नगर, मोती नगर जैसे दिल्ली के कुछ प्रमुख इलाकों में अगर आप 2 से 4 करोड़ रुपए भी खर्च करते हैं, तो आपको पहले एक पुराना बना मकान या फ्लैट ही मिलता है जिस पर अतिरिक्त खर्च करके आपको उसे नया बनाना पड़ता है और यहीं से दिल्ली के घरों और हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की दूसरी समस्या का जन्म होता है.

दिल्ली में किस्मत से मिलता है 'वैल्यू फॉर मनी' 
दूसरी वजह है वैल्यू फॉर मनी की. डिजिटल रियल एस्टेट प्लेटफॉर्म मैजिक-ब्रिक्स (Magicbricks) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिल्ली में सबसे ज्यादा, लगभग 64% मांग 3BHK (बेडरूम, हॉल, किचन) वाले फ्लैट्स की है. दिल्ली में एक 3BHK फ्लैट लेने के लिए आपको लगभग 18 लाख रुपयों से लेकर 25 करोड़ तक का खर्चा करना पड़ सकता है. अगर स्पेशियस और थोड़ी अच्छी लोकेलिटी वाले फ्लैट्स की बात करें तो ऐसे फ्लैट्स की शुरुआत ही लगभग 2 करोड़ रुपये से होती है. दूसरी तरफ दिल्ली के बाहरी इलाकों और खासकर NCR की बात करें तो यहां 70 लाख रुपयों से लेकर 2 करोड़ के बीच आपको एक अच्छी लोकैलिटी वाला स्पेशियस घर मिल सकता है. इतना ही नहीं दिल्ली से सटे कुछ इलाकों जैसे कुंडली या फिर सोनीपत में इतने पैसों में आप अपना विला भी खरीद सकते हैं. 

क्या है रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स की राय?
इस बारे में पिरामिड इंफ्राटेक के अश्वनी कुमार कहते हैं - दिल्ली के बाहरी इलाकों में आपको किफायती कीमत पर घर और फ्लैट्स मिल जाते हैं जो ज्यादा स्पेशियस होते हैं, इनके आस-पास ज्यादा हरियाली होती है और इनके साथ ही आपको पार्किंग जैसी अन्य प्रकार की सुविधाऐं भी मिल जाती हैं. इन्हीं सब कारणों के चलते ज्यादातर रियल एस्टेट इन्वेस्टर्स अब दिल्ली के बाहरी इलाकों की तरफ बढ़ रहे हैं. इस बारे में CREDAI (कॉन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रेजिडेंट अमित मोदी कहते हैं - दिल्ली के केंद्रीय इलाकों के मुकाबले बाहरी इलाकों और NCR में बने घर और फ्लैट्स ज्यादा नए और सुविधाजनक हैं और साथ ही ज्यादा किफायती भी. दिल्ली के केंद्रीय इलाकों के घरों की कीमत धीरे-धीरे मिडल क्लास की पहुंच से दूर होती जा रही है जिसकी वजह से HNI (अच्छी कमाई वाले व्यक्ति) क्लास के साथ-साथ मिडल क्लास भी राजधानी के बाहरी इलाकों की तरफ खींचा चला जा रहा है.

दिल्ली में खराब हो रहा है जीवन का स्तर?
वैसे तो दिल्ली बड़े-बड़े नेताओं, आला अधिकारियों और कई जानी मानी हस्तियों का घर है और इस शहर में रहने वालों के जीवन का अपना ही एक अलग स्तर है लेकिन पिछले कुछ सालों से दिल्ली में जीवन का स्तर यानी क्वालिटी ऑफ लाइफ लगातार नीचे ही गिरती जा रही है. दिल्लीवालों के जीवन स्तर में लगातार होती इस गिरावट के पीछे प्रमुख कारण कुछ इस प्रकार से हैं:

1. दिल्ली की गर्मी: दिल्ली की गर्मी लगातार बढ़ती ही जा रही है और अब तो यह इंसानी हदों को भी पार करने लगी है. दिल्ली में पेड़-पौधों और हरियाली की काफी कमी है जिसकी वजह से गर्मियों में यहां तापमान लगभग 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. ऐसे में ऊंची-ऊंची इमारतों में रहने वाले लोगों को इस समस्या का सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है. कई बार हमें यह भी देखने को मिलता है कि इतनी गर्मी में ऊंची इमारतों में AC भी काम करना बंद कर देता है. अपनी चिलचिलाती हुई गर्मी और हरे भरे वातावरण की कमी के चलते ही दिल्ली, लोगों के लिए अब कम पसंदीदा जगह होती जा रही है.

2. जहरीली हवा: WHO की मानें तो दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में दिल्ली चौथे स्थान पर है. वैसे तो यह समस्या बहुत हद तक इंसानों द्वारा किए जा रहे विकास का ही नतीजा है लेकिन ऐसा भी नहीं है, कि यह कारण पूरी तरह से सिर्फ मानव निर्मित हो. यहां प्रकृति भी अपनी भूमिका निभाती है. भौगोलिक स्थिति के नजरिए से दिल्ली एक ऐसे जोन में है जहां हर तरफ से आकर हवा इकट्ठी तो हो जाती है लेकिन यहां से रिलीज होने में हवा को वक्त लगता है और इसी वजह से दिल्ली एक "गैस चैंबर" बनकर रह जाती है. गाड़ियों से निकलने वाला धुआं, कंस्ट्रक्शन से उड़ने वाली धूल, इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन और आस पास के राज्यों में खेती में होने वाले बदलावों के चलते दिल्ली के निवासियों को जहरीली हवा का सामना करना पड़ता है. 
3. खराब होती लॉ एंड ऑर्डर व्यवस्था: यूं तो दिल्ली देश की राजधानी है लेकिन पिछले कुछ समय में यहां लॉ एंड ऑर्डर की व्यवस्था बहुत ही खराब स्थिति में जा पहुंची है. हालात इतने खराब हैं कि हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के उप-राज्यपाल वीके सक्सेना के बीच इस मुद्दे को लेकर काफी गहमा गहमी हो गई थी. अगर पिछले साल भर की बात करें तो दिल्ली के बहुत से प्रमुख इलाकों में ही क्राइम रेट बहुत ऊपर जा पहुंचा है. दिल्ली में आए दिन कभी मर्डर, कभी लूटपाट, कभी स्नैचिंग तो कभी चोरी की खबरें सामने आ रही हैं जिसकी वजह से यहां रहने वाले लोगों को सुरक्षा का अभाव महसूस होने लगा है और जैसा कि हम सब जानते हैं, कोई भी व्यक्ति सुरक्षा के अभाव में नहीं रहना चाहता. 2022 में दिल्ली में मर्डर के 277 मामले दर्ज किये गए थे. अगर इन मामलों की तुलना साल 2021 से करें तो इनमें 18% की वृद्धि देखि जा सकती है. इतना ही नहीं, देश की राजधानी में चोरी के मामलों की संख्या में 2022 में सालाना आधार पर 553% की वृद्धि देखने को मिली थी. इन आंकड़ों से पता चलता है कि दिल्ली में क्राइम बहुत तेजी से अपने पैर पसार रहा है. 
4. रोजगार के बेहतर अवसर: दिल्ली से सटे इलाके रोजगार उपलब्ध करवाने के मामले में काफी आगे हैं. अगर बात NCR की करें तो NCR के गुरुग्राम और नोएडा जैसे इलाके कई MNC (अंतरराष्ट्रीय कंपनियों) की पहली पसंद बन गए हैं. फोन बनाने वाली कंपनियां हों या मीडिया क्षेत्र की नामी कंपनियां, नोएडा सभी को बहुत पसंद है और उत्तर सरकार से मिल रहे समर्थन के चलते नोएडा में कंपनियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. सिर्फ नोएडा ही नहीं गुरुग्राम में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं. काफी बड़ी और मशहूर कंपनियां इन इलाकों में अपनी पहुंच बढ़ा रही हैं और इसीलिए रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं. रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ इन इलाकों में लोगों की आवाजाही बढ़ रही है और आवाजाही के साथ ही लोगों का बसाव भी बढ़ रहा है.

NCR की तरफ लोगों का रुख
दिल्ली में रहने वालों को ऊपर बताए गए सभी कारणों की वजह से धीरे-धीरे दिल्ली के बाहरी इलाकों, खासकर NCR की तरफ पलायन करना पड़ रहा है. दिल्ली के बाहरी इलाकों में आपको किफायती कीमत पर बड़े घर, आस-पास हरा भरा वातावरण, बेहतर सुविधाएं, और सोसाइटी में रहने पर बहुत अच्छी सुरक्षा भी मिलती है. इन्हीं सब कारणों की वजह से लोगों का रुख दिल्ली के बाहरी इलाकों खासकर NCR की तरफ बढ़ा है. इस बारे में रहेजा डेवलपर्स के नयन रहेजा कहते हैं - "NCR के क्षेत्र में आपको ज्यादा किफायती और स्पेशियस घरों के साथ-साथ हरा भरा वातावरण, मॉडर्न इन्फ्रास्ट्रक्चर और सभी प्रकार के साधनों से बेहतर कनेक्टिविटी मिलती है जिसके चलते ज्यादातर लोग अब दिल्ली को छोड़कर NCR की तरफ बढ़ रहे हैं."
 

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