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बदलते मौसम से RBI के माथे पर क्यों आ गया पसीना, क्या होने वाला है कुछ बुरा?

मौसम विभाग ने इस साल अत्यधिक गर्मी पड़ने की भविष्यवाणी की है, इससे RBI की टेंशन बढ़ गई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

मौसम के बदलते मिजाज ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं. RBI को आशंका है कि कहीं उसकी कोशिशों पर क्लाइमेट चेंज यानी जलवायु परिवर्तन पानी न फेर दे. दरअसल, मौसम विभाग ने इस साल ज्यादा गर्मी पड़ने की भविष्यवाणी जताई है. ज्यादा गर्मी से फसलें प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है. गेहूं की अधिकांश फसल की कटाई हो चुकी है. ऐसे में फल-सब्जियों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है. रिजर्व बैंक को डर है कि अगर सब्जियों का उत्पादन प्रभावित होता है, तो उसकी मुश्किलें बढ़ जाएंगी.

सब्जियों पर रहेगी नजर 
RBI के गवर्नर शक्तिकान्त दास ने हाल ही में कहा था कि हमें यह देखना होगा कि उच्च तापमान विशेष रूप से खाद्य फसलों पर क्या असर पड़ता है. गेहूं को लेकर ऐसी कोई चिंता नहीं है, क्योंकि उसकी कटाई लगभग पूरी हो चुकी है. लेकिन हमें सब्जियों की कीमतों पर नजर रखनी होगी और लू के कई अन्य प्रभाव हो सकते हैं. बता दें कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के कई हिस्सों में इस साल जून तक लू चलने का पूर्वानुमान लगाया है. इसी तरह, RBI के डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा ने कहा था कि खाद्य मुद्रास्फीति हाल के दिनों में अस्थिर रही है. इसे बढ़ाने वाले कारक लगातार बदलते रहते हैं. हम यह सुनिश्चित करने पर ध्यान दे रहे हैं कि इसका असर उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति (CPI) पर व्यापक प्रभाव न पड़े. हाल के दिनों में अनाज, सब्जियों के कारण भी खाद्य मुद्रास्फीति में इजाफा हुआ है. 

राहत छिनने का सता रहा डर
यदि सब्जियों का उत्पादन प्रभावित होता है, तो मांग और आपूर्ति के बीच की खाई चौड़ी हो जाएगी. ऐसे में सब्जियों की कीमतों में इजाफा होगा और महंगाई का चक्का तेजी से घूमने लगेगा. रिजर्व बैंक महंगाई के मोर्चे पर अब तक मनमाफिक परिणाम हासिल नहीं कर पाया है. इसी वजह से उसे इतिहास में पहली बार सरकार को स्पष्टीकरण भी देना पड़ा है. हालांकि, महंगाई दर में आई कुछ नरमी उसके लिए राहत जरूर है. अब यदि सब्जियों की महंगाई बढ़ती है, जो थोड़ी-बहुत राहत मिली है, वो भी छिन जाएगी. 

कारगर नहीं रहा प्रमुख अस्त्र
आरबीआई को केंद्र की तरफ से खुदरा महंगाई दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर बनाए रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है. रिजर्व बैंक अधिनियम के तहत यदि महंगाई के लिए तय लक्ष्य को लगातार तीन तिमाहियों तक हासिल नहीं किया जाता, तो RBI को केंद्र सरकार के समक्ष स्पष्टीकरण देना होता है. कुछ वक्त पहले रिजर्व बैंक को बाकायदा ऐसा करना पड़ा था. मौद्रिक नीति रूपरेखा के 2016 में प्रभाव में आने के बाद यह पहली बार था कि RBI को महंगाई नियंत्रित न कर पाने को लेकर केंद्र को सफाई देनी पड़ी. रिजर्व बैंक कई तरीकों से महंगाई नियंत्रित करने की कोशिश करता है. इसमें सबसे प्रमुख है रेपो रेट में वृद्धि. हालांकि, RBI का ये अस्त्र भी ज्यादा कारगर नहीं रहा है. लिहाजा, RBI यही चाहेगा कि न गर्मी ज्यादा पड़े और न ही सब्जियों का उत्पादन प्रभावित हो. 


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