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वन नेशन,वन फूड इंवेस्टिगेशन की कवायद जल्‍द हो सकती है शुरू, FSSAI की बढ़ेगी ताकत

दरअसल अभी देश के अंदर इस्‍तेमाल किए जाने वाले खाने पीने के सामाान और देश के बाहर भेजे जाने वाले जाने वाले प्रोडक्‍ट की जांच अलग-अलग संस्‍थाएं करती हैं. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

वन नेशन वन राशन कार्ड की तर्ज पर अब सरकार वन नेशन वन फूड इंवेस्टिगेशन एजेंसी बनाने पर विचार कर रही है. दरअसल हालिया समय में जिस तरह मसालों की शुद्धता को लेकर मामला सामने आया उसके बाद  कुछ देशों ने भारत के मसालों पर पाबंदी लगा दी थी. इसी कड़ी में अब ये खबर सामने आई है कि सरकार फूड इंवेस्टिगेशन के लिए FSSAI को और ताकतवर बनाने की तैयारी कर रही है, जिससे इन मामलों को सेंट्रलाइज किया जा सके. 

अभी क्‍या है आखिर पूरी व्यवस्‍था ? 
मौजूदा समय में देश के अंदर खाने पीने के सामान की जांच का काम FSSAI (Food Safety and Standard Authority of india) करती है. FSSAI देश के अंदर खाने के सैंपल लेकर उनकी जांच करने का काम करती है. जबकि APEDA देश से बाहर जा रहे फूड प्रोडक्‍ट की जांच से लेकर उनकी क्‍वॉलिटी की जांच करने का काम करती है. दरअसल बाहर से आने वाले खाने के सामान की जांच और उसकी क्‍वॉलिटी चेक करने का काम सभी देशों में होता है. अलग-अलग देशों में सैंपल चेक करने से लेकर उनमें कमी पाए जाने पर सैंपल को वापस कर दिया जाता है. 

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अब क्‍या हो सकती है आखिर नई व्‍यवस्‍था? 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार इस नई व्‍यवस्‍था में देश और विदेश को भेजे जाने वाले खाने पीने के सामान की जांच का काम FSSAI को दे सकती है. सरकार इस प्रस्‍ताव के साथ FSSAI को और मजबूत बना सकती है. सरकार खाने पीने के मामलों में उल्‍लंघन करने पर सजा का प्रावधान भी बढ़ा सकती है. अभी ऐसा करने वालों के लिए काफी कम सजा है. 

मसालों में पेस्टिसाइड की मिलावट का आया था मामला 
हाल ही में एवरेस्‍ट और एमडीएच के मसालों में सिंगापुर और हांगकांग में पेस्टिसाइड की मिलावट का मामला सामने आया था. सिंगापुर और हांगकांग में उनमें जरूरत से ज्‍यादा एथिलीन ऑक्‍साइड की मात्रा जरूरत से ज्‍यादा पाई गई थी, जिसके बाद वहां की सरकार ने इन कंपनियों के प्रोडक्‍ट को लेकर सख्‍त कार्रवाई की थी. हालांकि इसी मामले को लेकर अमेरिका भी जांच की गई थी लेकिन वहां की सरकार ने इस तत्‍व के इस्‍तेमाल को अपने देश में वाजिब बताया था.  
 


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