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सलमान रुश्दी से क्यों नफरत करते हैं मुस्लिम देश, क्यों हुआ उन पर हमला; जानें सबकुछ
75 वर्षीय सलमान रुश्दी बुकर पुरस्कार से सम्मानित हैं. उन्होंने अंग्रेजी भाषा में कई किताबें लिखीं, जिनमें से कुछ बेहद विवादस्पद रहीं. उन पर हुए हमले को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
भारतीय मूल के लेखक सलमान रुश्दी (Salman Rushdie) अमेरिका में हुए हमले में बुरी तरह घायल हो गए हैं. आशंका जताई जा रही है कि इस हमले में वह अपनी एक आंख खो सकते हैं. हमलावर ने पहले उन पर घूंसे बरसाए फिर चाकू से वार किया. हालांकि, मौके पर मौजूद लोगों ने हमलावर को पकड़ लिया, लेकिन तब तक वह रुश्दी को बुरी तरह घायल कर चुका था. अपनी लेखनी से मुस्लिम देशों में भूचाल लाने वाले सलमान रुश्दी पर हमला भले ही अभी हुआ है, मगर उन्हें जान से मारने की धमकी सालों से मिल रही है.
बुकर पुरस्कार से सम्मानित
75 वर्षीय सलमान रुश्दी बुकर पुरस्कार से सम्मानित हैं. उनका जन्म 19 जून 1947 को मुंबई में हुआ था. उन्होंने अंग्रेजी भाषा में कई किताबें लिखीं, जिनमें से कुछ बेहद विवादस्पद रहीं. उनपर हुए हमले को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है. रुश्दी पर पश्चिमी न्यूयॉर्क के चौटाउक्वा संस्थान में शुक्रवार को एक कार्यक्रम के दौरान अटैक हुआ. वह अपना व्याख्यान शुरू करने वाले थे, तभी एक व्यक्ति मंच पर चढ़ा और हमला बोल दिया. मीडिया रिपोर्ट्स में सलमान रुश्दी के एजेंट एंड्र्यू वायली के हवाले से बताया गया है कि रुश्दी की हालात ठीक नहीं है. वह वेंटिलेटर पर है और फिलहाल बोल नहीं सकते हैं.
इस किताब पर भड़के कट्टरपंथी
रुश्दी खुद को नास्तिक बताते हैं और बेवाकी से अपने विचार रखने के लिए प्रसिद्ध हैं. उन्हें साल 1981 में लिखे उपन्यास 'मिडनाइट्स चिल्ड्रन' के लिए 'बुकर प्राइज' से सम्मानित किया गया था. इतना ही नहीं, इस उपन्यास को पहले 1993 और फिर 2008 में दो बार दुनिया के सर्वश्रेष्ठ नॉवल पुरस्कार मिला था. उनकी इस किताब की काफी चर्चा हुई और वह पूरी दुनिया में छा गए. हालांकि, इसके बाद 1988 में आई उनकी एक और किताब ने इस्लामिक कट्टरपंथी देशों में भूचाल ला दिया. 'द सैटेनिक वर्सेज' (The Satanic Verses) नाम की इस किताब से मुस्लिम कट्टरपंथी भड़क उठे.
जारी हुआ था मौत का फतवा
मुस्लिम कट्टरपंथियों का आरोप है कि 'द सैटेनिक वर्सेज' में पैगंबर मुहम्मद के बारे में अपमानजनक बातें लिखी गईं हैं. देखते ही देखते इस किताब का विवाद देशों की सीमाओं को तोड़कर कई मुस्लिम मुल्कों में फैल गया. ईरान सहित कई देशों ने किताब पर प्रतिबंध लगा दिया, भारत भी इसमें शामिल है. इसके बाद उन्हें लगातार जान से मारने की धमकी मिलती रहीं. ईरान के तत्कालीन नेता अयातुल्लाह रोहल्ला खुमैनी ने रुश्दी की मौत का फतवा जारी किया. उनकी हत्या करने वाले को 30 लाख डॉलर से अधिक का इनाम देने की घोषणा की गई गई. पहले रुश्दी की हत्या के लिए 28 लाख डॉलर का इनाम रखा गया, जिसे बाद में बढ़ाकर 33 लाल डॉलर किया गया.
बहुत लोग बने निशाना
बात केवल धमकियों पर ही नहीं रुकी. 'द सैटेनिक वर्सेज' के जापानी अनुवादक हितोशी इगाराशी की हत्या कर दी गई. इसी तरह, उपन्यास के इटैलियन अनुवादक पर भी जानलेवा हमले हुए. कट्टरपंथियों ने किताब के पब्लिशर को भी निशाना बनाया. अपनी किताब के चलते सलमान रुश्दी को कई सालों तक सबकी नज़रों से दूर रहना पड़ा. पिछले कुछ समय से ही उन्होंने कार्यक्रमों में जाना शुरू किया है. रुश्दी की संपत्ति की बात करें तो एक रिपोर्ट के अनुसार, उनकी मौजूदा नेटवर्थ 15 मिलियन डॉलर के आसपास है.
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