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डॉलर के मुकाबले इतना क्यों गिर रहा रुपया? मोदी सरकार ने बताए इसके 5 कारण
केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री ने बताया कि बाजार के आधार पर ही भारतीय रुपये की विनिमय दर तय होती है. डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट के पीछे और भी कई वैश्विक कारण हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: डॉलर के मुकाबले रुपया इतना क्यों गिर रहा है? इसका कारण अब तक एक्सपर्ट बता रहे थे, लेकिन अब मोदी सरकार की तरफ से डॉलर के मुकाबले रुपये गिरने का मेन कारण बताया गया है.
राज्यसभा में पूछे गए इससे संबंधित सवाल का लिखित जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने मुख्य रुप से 5 कारण बताएं:
1. अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर
2. कोविड-19 संबंधी व्यवधान
3. यूएस फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी
4. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
5. रूस-यूक्रेन युद्ध
केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री ने बताया कि बाजार के आधार पर ही भारतीय रुपये की विनिमय दर तय होती है. डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट के पीछे और भी कई वैश्विक कारण हैं. बता दें कि 26 जुलाई को भी रुपये में कमजोरी देखने को मिली और यह डॉलर के मुकाबले 79.77 के लेवल पर बंद हुआ.
इसके अलावा वित्त मंत्रालय की तरफ से पिछले 5 साल में डॉलर के मुकाबले रुपये का क्या भाव रहा, ये भी बताया गया.
कौन तय करता है रुपये की कीमत
रुपये की कीमत आखिर तय कौन करता है. आपको बता दें कि रुपये की कीमत के पीछे सारा खेल डिमांड सप्लाई का है. इसे ऐसे समझिए कि लोग करेंसी देकर करेंसी खरीदते हैं. जैसे आप अगर रूस घूमने जाएंगे तो वहां खर्च करने के लिए आपको रूबल्स चाहिए, तो पहले आप रुपये देकर रूबल्स खरीदेंगे और फिर होटल, कैब, खाने का बिल चुकाएंगे. इसके लिए जगह जगह करेंसी एक्सचेंज खुले होते हैं. इस सीन में आप रुपये देकर रूबल्स खरीद रहे हैं, इसमें रूबल्स मजबूत होगा.
ऐसे ही मान लीजिए कोई अमेरिकी कंपनी भारत में अपना प्लांट या फैक्ट्री लगाना चाहती है तो उसे रुपयों की जरूरत पड़ेगी, वो भारत में पहले अपने डॉलर्स को रुपये में कन्वर्ट करेगी और फिर बिजनेस सेटअप पर खर्च करेगी. तो यहां पर अमेरिकी कंपनी ने डॉलर देकर रुपये खरीदे हैं.
इसे अब ऐसे समझिए कि अगर 1 डॉलर की कीमत अभी 79 रुपये है तो आपको आईफोन के लिए 1 लाख रुपये चुकाने होते हैं. अगर एक डॉलर की कीमत बढ़कर 85 या 90 रुपये हो गई तो आपको आईफोन के लिए 1 लाख से ज्यादा देने होंगे. क्योंकि आईफोन का भारत में इंपोर्ट होता है. जिसका पेमेंट डॉलर में करना होता है. तो मोटा मोटा ये कॉन्सेप्ट आपको समझ आया होगा कि लोग करेंसी खरीदते हैं और यही डिमांड सप्लाई की चेन रुपये की कीमत तय करती है.
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