होम / एक्सप्लेनर / डॉलर के मुकाबले इतना क्यों गिर रहा रुपया? मोदी सरकार ने बताए इसके 5 कारण

डॉलर के मुकाबले इतना क्यों गिर रहा रुपया? मोदी सरकार ने बताए इसके 5 कारण

केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री ने बताया कि बाजार के आधार पर ही भारतीय रुपये की विनिमय दर तय होती है. डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट के पीछे और भी कई वैश्विक कारण हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

नई दिल्ली: डॉलर के मुकाबले रुपया इतना क्यों गिर रहा है? इसका कारण अब तक एक्सपर्ट बता रहे थे, लेकिन अब मोदी सरकार की तरफ से डॉलर के मुकाबले रुपये गिरने का मेन कारण बताया गया है.

राज्यसभा में पूछे गए इससे संबंधित सवाल का लिखित जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने मुख्य रुप से 5 कारण बताएं:

1. अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर
2. कोविड-19 संबंधी व्यवधान
3. यूएस फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी
4. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
5. रूस-यूक्रेन युद्ध

केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री ने बताया कि बाजार के आधार पर ही भारतीय रुपये की विनिमय दर तय होती है. डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट के पीछे और भी कई वैश्विक कारण हैं. बता दें कि 26 जुलाई को भी रुपये में कमजोरी देखने को मिली और यह डॉलर के मुकाबले 79.77 के लेवल पर बंद हुआ.

इसके अलावा वित्त मंत्रालय की तरफ से पिछले 5 साल में डॉलर के मुकाबले रुपये का क्या भाव रहा, ये भी बताया गया.

तारीख डॉलर के मुकाबले रुपये का भाव 29.06.2018 68.5753 28.06.2019 68.918 30.06.2020 75.527 30.06.2021 74.3456 30.06.2022 78.9421

कौन तय करता है रुपये की कीमत
रुपये की कीमत आखिर तय कौन करता है. आपको बता दें कि रुपये की कीमत के पीछे सारा खेल डिमांड सप्लाई का है. इसे ऐसे समझिए कि लोग करेंसी देकर करेंसी खरीदते हैं. जैसे आप अगर रूस घूमने जाएंगे तो वहां खर्च करने के लिए आपको रूबल्स चाहिए, तो पहले आप रुपये देकर रूबल्स खरीदेंगे और फिर होटल, कैब, खाने का बिल चुकाएंगे. इसके लिए जगह जगह करेंसी एक्सचेंज खुले होते हैं. इस सीन में आप रुपये देकर रूबल्स खरीद रहे हैं, इसमें रूबल्स मजबूत होगा.

ऐसे ही मान लीजिए कोई अमेरिकी कंपनी भारत में अपना प्लांट या फैक्ट्री लगाना चाहती है तो उसे रुपयों की जरूरत पड़ेगी, वो भारत में पहले अपने डॉलर्स को रुपये में कन्वर्ट करेगी और फिर बिजनेस सेटअप पर खर्च करेगी. तो यहां पर अमेरिकी कंपनी ने डॉलर देकर रुपये खरीदे हैं.

इसे अब ऐसे समझिए कि अगर 1 डॉलर की कीमत अभी 79 रुपये है तो आपको आईफोन के लिए 1 लाख रुपये चुकाने होते हैं. अगर एक डॉलर की कीमत बढ़कर 85 या 90 रुपये हो गई तो आपको आईफोन के लिए 1 लाख से ज्यादा देने होंगे. क्योंकि आईफोन का भारत में इंपोर्ट होता है. जिसका पेमेंट डॉलर में करना होता है. तो मोटा मोटा ये कॉन्सेप्ट आपको समझ आया होगा कि लोग करेंसी खरीदते हैं और यही डिमांड सप्लाई की चेन रुपये की कीमत तय करती है.

VIDEO: आर्थिक मंदी को लेकर आप भी डरे हुए हैं? जानिए इसकी भारत में कितनी आशंका


टैग्स
सम्बंधित खबरें

समझिए: भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम कानूनी प्रमाण क्यों नहीं माना जाता?

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट कानूनी रूप से एक यात्रा दस्तावेज है, न कि नागरिकता का अंतिम प्रमाण.

26-June-2026

क्या है 65 साल पुराना सिंधु जल समझौता, जिससे पाकिस्तान में मचेगा हाहाकार, कितना होगा असर?

भारत ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ 1960 से चले आ रहे जल समझौते का बोझ आगे नहीं ढोएगा, जब तक पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद को प्रभावी रूप से बंद नहीं कर देता है.

24-April-2025

अमेरिका के टैरिफ लगाने से भारत के किस सेक्टर्स पर क्या होगा असर? जानिए डिटेल्स

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया को बड़ा झटका दिया है. ट्रंप ने भारत समेत कई देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है. जिससे भारत के निर्यात पर गहरा असर देखने को मिल सकता है.

03-April-2025

भारत की तरक्की को कई गुना बढ़ा रही महिला एंटरप्रेन्योर, NeoGrowth की रिपोर्ट में आया सामने

3,000 से अधिक महिला उद्यमियों के सर्वेक्षण पर आधारित इस रिपोर्ट में महिलाओं की व्यापारिक सफलता और उनके सामने आने वाली चुनौतियों दोनों को दिखाया गया है.

06-March-2025

अडानी परिवार की शादी का उत्सव: परंपरा, आधुनिकता और समाज सेवा का संगम

यह शादी सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि अडानी परिवार की समाज सेवा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जिसमें हर पहलू में कला, परंपरा और सशक्तिकरण जुड़ा हुआ है.

24-February-2025


बड़ी खबरें

बकाया टैक्स पर गिरफ्तारी नहीं, संपत्ति कुर्क कर होगी वसूली; CBDT ने नियमों में किया बदलाव

सीबीडीटी ने 17 सितंबर को जारी अधिसूचना के जरिए आयकर नियम, 2026 के नियम 225 में संशोधन किया है. यह नियम टैक्स बकाया की वसूली की प्रक्रिया से संबंधित है.

22 hours ago

सेबी का कमोडिटी सौदा: विदेशी लाते हैं पैसा, भारतीय ब्रोकर उठाते हैं जोखिम

सेबी भारत के फिजिकली सेटल्ड कमोडिटी कॉन्ट्रैक्ट्स में विदेशी फंड्स चाहता है. वे डिलीवरी नहीं ले सकते. इसलिए अगर कोई फंड समय रहते बाहर निकलने में विफल रहता है, तो उसकी पोजीशन बाजार बंद होने के बाद अपने आप एक भारतीय ब्रोकर की खुद की बुक्स में चली जाती है. फंड "किसी भी आगे के अधिकार, टाइटल, दायित्व या एक्सपोजर" से मुक्त हो जाता है. ब्रोकर यह सब अपने ऊपर ले लेता है. SEBI इसे एक सुरक्षा उपाय कहता है.

19 hours ago

20 वर्षों में भारत की GDP 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है: अजीत डोभाल

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि अगले दो दशकों में भारत का आर्थिक विस्तार नई पीढ़ी के स्नातकों के लिए अवसर पैदा कर सकता है.

20 hours ago

सरकारी जमीन और बिल्डिंग्स से जुटाए जाएंगे ₹5,000 करोड़ से ज्यादा, NLMC ने तेज की एसेट मॉनेटाइजेशन प्रक्रिया

NLMC बोर्ड ने 5,000 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की अतिरिक्त जमीन और बिल्डिंग संपत्तियों के मॉनेटाइजेशन की सिफारिश की है.

20 hours ago

भारत के फॉरेक्स रिजर्व में 4.924 अरब डॉलर की गिरावट, 10 हफ्तों की बढ़त पर लगा ब्रेक

विदेशी मुद्रा आस्तियां देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं. डॉलर में व्यक्त FCA में यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं की विनिमय दरों में होने वाले बदलाव का असर भी शामिल होता है.

1 day ago