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दुनिया भर के बाजार औंधे मुंह गिरे, रुपये में फिर रिकॉर्ड कमजोरी, आखिर ये हो क्या रहा है?
भारत समेत दुनिया भर के एशियाई बाजारों में इस समय कोहराम मचा हुआ है. जापान, चीन, हॉन्ग-कॉन्ग और यूरोपीय बाजारों में तबाही मची हुई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
मुंबई: नोएडा में जिस तरह से ट्विन टावर जमींदोज हुए हैं और आसपास की धरती हिली है, ठीक वैसा ही हाल बीते हफ्ते से दुनिया भर के बाजारों का भी है. अमेरिकी बाजार शुक्रवार को औंधे मुंह गिरे हैं, डाओ जोंस 1000 अंक गिरकर बंद हुआ, S&P 500 में 3 परसेंट की गिरावट रही और नैस्डेक में 4 परसेंट की बड़ी गिरावट देखी गई.
दुनिया भर के बाजारों में गिरावट
भारत समेत दुनिया भर के एशियाई बाजारों में इस समय कोहराम मचा हुआ है. जापान, चीन, हॉन्ग-कॉन्ग और यूरोपीय बाजारों में तबाही मची हुई है. जापान का बाजार निक्केई 2.5 परसेंट टूटा है, यूरोपीय बाजारों में DAX 2.26%, CAC 1.4%, FTSE 0.7% तक टूटे हैं. भारतीय शेयर बाजारों का भी यही हाल है. सेंसेक्स आज 1200 अंकों की कमजोरी के साथ खुला है.
इस वजह से गिरे दुनिया भर के बाजार
तो सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ है कि दुनिया भर के बाजार अचानक से दबाव में आ गए हैं. दरअसल, बाजार की बिसात का सारा खेल अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल के एक बयान के बाद बिगड़ा है, जो उन्होंने जैक्सन होल सम्मेलन में दी है. जेरोम पॉवेल ने अपने बयान में संकेत दिया है कि महंगाई को काबू करने के लिए आगे भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि महंगाई दर जबतक 2% तक नहीं पहुंच जाती है, ब्याज दरों में सख्ती जारी रहेगी. जबकि अमेरिकी बाजारों को उम्मीद थी कि जेरोम पॉवेल ब्याज दरों में नरमी को लेकर कुछ बयान देंगे, लेकिन पॉवेल ने उम्मीदों के ठीक उलट बात करके बाजारों को जोर का झटका दिया. नतीजतन बाजार धराशायी हो गए.
फेड के बयान को समझ नहीं पाए बाजार
इसके पहले जुलाई की फेड की बैठक में पॉवेल ने कहा था कि हमारा न्यूट्रल रेट आ गया है, जिससे अमेरिकी बाजारों को लगा कि फेड अब ब्याज दरों पर थोड़ा नरम होगा और साल के अंत तक दरें बढ़ाने के सिलसिले पर ब्रेक लग जाएगा. लेकिन बाजार का यही अनुमान गलत हो गया, फेड चेयरमैन ने अपने बयान में कहा कि दरें बढ़ाने का सिलसिला जारी रहेगा और जहां तक अर्थव्यवस्था की बात है तो उसे अभी थोड़ा और दबाव सहना होगा. अमेरिकी बाजार इस झटके को सह नहीं पाए और धड़ाम हो गए, यही हैंगओवर दुनिया भर के बाजारों पर रहा, एशियाई बाजार और यूरोपीय बाजार भी गिरने लगे.
भारतीय रुपया भी धड़ाम
पॉवेल के बयान के बाद दुनिया भी करेंसीज भी दबाव में हैं, डॉलर के मुकाबले रुपया फिर से नए रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया है. एक डॉलर की कीमत अब 80.12 रुपये हो गई है. आज रुपया 21 पैसे की कमजोरी के साथ 80.08 पर खुला था, जबकि क्लोजिंग 79.87 थी. इसके पहले रुपया जुलाई में डॉलर के मुकाबले 80.0650 के स्तर तक गिरा था. डॉलर इंडेक्स जो महीने तक 104 के लेवल तक फिसल गया था, अब एक बार फिर 109 के लेवल के ऊपर चला गया है.
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