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Vedanta वाले अनिल अग्रवाल क्यों बेच रहे हैं अपना स्टील कारोबार, कौन हैं दौड़ में?

वेदांता के मालिक अनिल अग्रवाल कंपनी पर कर्ज का बोझ कम करना चाहते हैं, इसके लिए उन्होंने कई योजनाएं बनाई हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

माइनिंग और मेटल सेक्टर की दिग्गज कंपनी वेदांता (Vedanta) के मालिक अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) अपना स्टील कारोबार बेच रहे हैं. वेदांता लिमिटेड के स्वामित्व वाली ESL स्टील बिकने जा रही है. ESL की वर्तमान क्षमता 1.5 मिलियन टन है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अग्रवाल के स्टील कारोबार को खरीदने वालों की दौड़ में आर्सेलर मित्तल के लक्ष्मी मित्तल (Lakshmi Mittal) और जय सराफ की कंपनी निथिया कैपिटल शामिल हैं. जय सराफ आर्सेलर मित्तल के पूर्व एग्जीक्यूटिव हैं और वह ESL स्टील पर बोली लगाने के लिए एक कंसोर्टियम बना रहे हैं, जिसमें निथिया कैपिटल सहित कुछ अन्य इन्वेस्टर्स शामिल हो सकते हैं. 

वैल्यूएशन से मिलेगा कम
आर्सेलर मित्तल से अलग होकर जय सराफ ने 2010 में निथिया कैपिटल की स्थापना की थी. जय सराफ को कई देशों में फंसे स्टील संयंत्रों को सफलतापूर्वक चालू करने का अनुभव है. इसलिए उनकी दावेदारी ज्यादा मजबूत मानी जा रही है. हालांकि, इस संबंध में तीनों की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. वहीं, बताया जा रहा है कि ESL स्टील का वैल्यूएशन 10,000 करोड़ रुपए है, लेकिन वेदांता को इससे कम पर समझौता करना पड़ सकता है.

कर्ज कम करने की कोशिश
वेदांता लिमिटेड के मालिकाना हक वाली ईएसएल स्टील की वर्तमान क्षमता 1.5 मिलियन टन है, जिसे कंपनी ने दोगुना करने का लक्ष्य रखा है. हालांकि, अब कंपनी अपनी इस यूनिट को बेच रही है. दरअसल, अनिल अग्रवाल वेदांता के कर्ज को जल्द से जल्द कम करना चाहते हैं. इसी क्रम में वह अपने नॉन-कोर एसेट्स को बेच रहे हैं. ईएसएल स्टील की बिक्री अग्रवाल की इसी योजना का हिस्सा है. बता दें कि वेदांता लिमिटेड ने कुछ वक्त पहले विभिन्न व्यवसायों को अलग करने के लिए छह लिस्टेड यूनिट्स बनाने की घोषणा की थी. कंपनी पर करीब 20,000 करोड़ रुपए का कर्ज है. 

पहले भी बनाई थी योजना
वेदांता ने 2022 के आखिरी में भी ईएसएल स्टील को बेचने की बात कही थी, मगर बाद में इस योजना को रोक दिया गया. अब कंपनी फिर से स्टील कारोबार को बेचने की दिशा में आगे बढ़ रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्टील कारोबार को कुछ खरीदने में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई है. अगले कुछ महीनों में डील पूरी हो सकती है. वेदांता ने 2018 में 5,320 करोड़ में ईएसएल स्टील का अधिग्रहण किया था. गौरतलब है कि अडानी समूह को लेकर पिछले साल आई हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद से वेदांता जैसी कंपनियां अपना कर्ज कम करने पर ज्यादा फोकस कर रही हैं.


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