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टैक्स भरने के मामले में क्यों पीछे हैं Gautam Adani की कंपनियां, मिल गया जवाब
2022 में सबसे ज्यादा कॉर्पोरेट टैक्स भरने वाली कंपनियों की लिस्ट में अडानी समूह की एक भी कंपनी नहीं है. TCS इस मामले में सबसे आगे है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
हाल ही में एक लिस्ट जारी हुई थी, जिसमें बताया गया था कि 2022 में किस कंपनी ने सबसे ज्यादा कॉर्पोरेट टैक्स का भुगतान किया. टॉप-10 कंपनियों की इस लिस्ट में अडानी समूह (Adani Group) की एक भी कंपनी नहीं थी. इसे लेकर अडानी समूह और उसके मुखिया गौतम अडानी की आलोचना की गई. कहा गया कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट से पहले तक अडानी दोनों हाथों से पैसा बंटोर रहे थे, इसके बावजूद भी उनकी कंपनियां टैक्स भरने के मामले में पीछे रहीं. ये बात सही है कि टॉप-10 कॉर्पोरेट टैक्सपेयर कंपनियों में Adani की एक भी कंपनी नहीं है, लेकिन इसके पीछे कुछ और नहीं बल्कि एक टेक्निकल कारण है.
7 कंपनियां हैं सूचीबद्ध
पहले ये जान लेते हैं कि कॉर्पोरेट टैक्स भरने के मामले में कौनसी कंपनी टॉप पर रही. टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने सबसे ज्यादा 1.4 बिलियन डॉलर का टैक्स दिया था. इसके बाद मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज रही. बता दें कि स्टॉक मार्केट में अडानी की सात कंपनियां सूचीबद्ध हैं, जिनका कुल बाजार पूंजीकरण 123.2 अरब डॉलर है. हिंडनबर्ग की रिपोर्ट जारी होने से पहले यह 267.1 अरब डॉलर था. इससे पता चलता है कि हिंडनबर्ग ने अडानी ग्रुप किस कदर नुकसान पहुंचाया. गौतम अडानी की पर्सनल वेल्थ भी बुरी तरह प्रभावित हुई है.
प्रॉफिट पर लगता है टैक्स
अब बात करते हैं उस टेक्निकल पॉइंट की, जिसके कारण अडानी समूह की कंपनियां रिलायंस जैसी कंपनियों के मुकाबले कम कॉर्पोरेट टैक्स का भुगतान करती हैं. एक रिपोर्ट में बताया गया है कि कॉरपोरेट टैक्स केवल मुनाफे पर लगाया जाता है, बाजार पूंजीकरण पर नहीं. 2019 में, भारत सरकार ने 48.7 मिलियन डॉलर से अधिक के कारोबार वाली कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट कर की दर में 30% की कटौती की थी. ऐसा विदेशी कंपनियों को मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिए लुभाने के लिए किया गया था. हालांकि, ये लक्ष्य काफी हद तक अधूरा रहा, क्योंकि महामारी ने कुछ समय के लिए सभी नए निवेशों को रोक दिया था.
रिलायंस का ज्यादा है मुनाफा
2019 में कर कटौती के साथ, भारतीय कंपनियों के लिए प्रभावी कर दर में गिरावट आई. नतीजतन, वे कर के रूप में अपने मुनाफे का एक छोटा हिस्सा चुका रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी कंपनियां भी अपने टैक्स को और कम करने के लिए कई तरह की छूट का फायदा उठाती हैं. अडानी समूह मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज या स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के बराबर मुनाफा नहीं कमाता है. वित्तीय वर्ष 2022 के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज और एसबीआई का शुद्ध लाभ क्रमशः 7.4 बिलियन डॉलर और 4.3 बिलियन डॉलर था, जबकि अडानी एंटरप्राइजेज का शुद्ध लाभ 94.5 मिलियन डॉलर था.
केवल ये कमा रही लाभ
2022 Burgundy Private Hurun India 500 लिस्ट के अनुसार, 2022 में मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज शुद्ध लाभ के मामले में इंडियन चार्ट में शीर्ष पर रही. जबकि अडानी की कोई भी कंपनी इस लिस्ट में नहीं थी. अडानी की कई कंपनियों में से, अडानी एंटरप्राइजेज एकमात्र ऐसी कंपनी है जो लाभ कमा रही है. फिच रेटिंग्स के अनुसार, गौतम अडानी का पर्सनल फार्च्यून न केवल उनकी कंपनियों की घाटे वाली प्रकृति से अलग है, बल्कि ज्यादातर 'पेपर वेल्थ' के रूप में मौजूद है, जो उनकी कंपनी के शेयरों में उनकी होल्डिंग से जुड़ा है. तो कहने का मतलब ये है कि चूंकि अडानी समूह की कंपनियां ज्यादा मुनाफा नहीं कमा रही हैं, इसलिए कॉर्पोरेट टैक्स देने के मामले में पीछे हैं.
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