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भारत के लिए क्यों अहम है G20 शिखर सम्मेलन, क्या है इस बार का एजेंडा; जानें सबकुछ
G20 शिखर सम्मेलन में शिरकत करने के लिए PM मोदी सोमवार को ही बाली पहुंच गए थे. वह 20 से ज्यादा बैठकों में हिस्सा लेंगे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
इंडोनेशिया के बाली में G20 शिखर सम्मेलन की शुरुआत हो चुकी है. भारत के लिहाज से यह सम्मेलन बेहद अहम है, क्योंकि अगले साल उसे इसकी अध्यक्षता करनी है. 2023 का शिखर सम्मेलन भारत में होगा. G20 सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया तमाम तरह की परेशानियों का सामना कर रही है, इसमें रूस-यूक्रेन युद्ध भी शामिल है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सम्मेलन से दूरी बना ली है, जाहिर है वो दुनिया के सवालों का सामना नहीं करना चाहते. उन्होंने विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को अपने प्रतिनिधि के रूप में भेजा है.
इन मुद्दों पर होगी चर्चा
G20 शिखर सम्मेलन में शिरकत करने के लिए PM मोदी सोमवार को ही बाली पहुंच गए थे. वह 20 से ज्यादा बैठकों में हिस्सा लेंगे, जिनमें खाद्य, सुरक्षा, ऊर्जा, यूक्रेन संकट जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस बार का सम्मेलन भारत के लिए एक मौका है उसे करीब से समझने का, ताकि अगले साल वह इसकी मेजबानी और ज्यादा बेहतर ढंग से कर सके. इसके अलावा, PM मोदी विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात दुनिया तक पहुंचा सकेंगे. ऋषि सुनक ने हाल ही में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली है, इस सम्मेलन के बहाने PM मोदी को भारत के प्रति सुनक के नजरिए को समझने का मौका भी मिलेगा.
कौन तय करता है एजेंडा?
जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, G20 दुनिया की बीस सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा और दशा तय करता है. हर साल इसकी अध्यक्षता एक नए सदस्य के पास आती है और वही इसका एजेंडा भी तय करता है. इस साल सम्मेलन की मेजबानी इंडोनेशिया के पास है और वह चाहता है कि बाली सम्मेलन में महामारी के बाद स्वास्थ्य से जुड़े वैश्विक समाधानों और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के साथ-साथ अक्षय ऊर्जा पर चर्चा हो. सालाना तौर पर होने वाला G20 शिखर सम्मेलन की शुरुआत 2008 की आर्थिक मंदी के बाद हुई.
किसलिए अहम है G-20?
दुनिया का 85 प्रतिशत आर्थिक उत्पादन और 75% कारोबार G20 समूह के देशों में होता है. दुनिया की दो तिहाई आबादी भी G20 देशों में ही रहती है. इस ग्रुप में अमेरिका, ब्रिटेन, भारत, चीन, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, कनाडा, फ़्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया और तुर्की शामिल हैं. स्पेन को भी मेहमान के रूप में सम्मेलन में बुलाया गया है. 1999 के एशियाई वित्तीय संकट के बाद यह ग्रुप अस्तित्व में आया था. शुरुआती समय में G20 का ज़्यादातर जोर अंतरराष्ट्रीय कारोबार और आर्थिक लक्ष्यों पर था, लेकिन बाद में इसमें जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद जैसे मुद्दे भी शामिल हो गए.
सभी की टिकीं निगाहें
इस बार का सम्मेलन विवादों के बीच हो रहा है, इसलिए सभी निगाहें इस पर टिकी हुई हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते दुनिया भर के तमाम देशों की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं. अमेरिक और ब्रिटेन में महंगाई ने सभी रिकॉर्ड तोड़ डाले हैं. ऐसे में संभव है कि अमेरिका और उसके सहयोगी वैश्विक हालातों के लिए रूस पर युद्ध बंद करने का दबाव बनाएं. इस बात की भी संभावना है कि दुनियाभर के नेता PM मोदी से इस मामले में रूस पर दबाव बनाने के लिए कहें. बता दें कि भारत अब तक इस मामले में रूस के खिलाफ खुलकर बोलने से बचता रहा है.
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