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Meta से आखिर क्या हुई बड़ी गलती, जिसकी वजह से उसकी ऐसी बुरी हालत हो रही है?

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि मेटा अपनी रणनीतियों में लगातार बदलाव करती रही. यह उसकी सबसे बड़ी गलती रही. इस क्रम में वह उस रास्ते से भटक गई.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्ली: भारत में मेटा के प्रमुख अजीत मोहन ने जैसे ही अचानक इस्तीफा दिया, पूरी दुनिया हैरान रह गई. उसके तुरंत बाद तो मानो मेटा में भूचाल सा ही आ गया. सोशल नेटवर्किंग की दिग्गज कंपनी ने वैश्विक स्तर पर तुरंत लगभग 11,000 कर्मचारियों की छंटनी की घोषणा कर दी. मेटा भी लगातार घाटे में जा रही थी और मार्क जुकरबर्ग की नेटवर्थ तेजी से गिर रही थी.

इसके बाद इंडस्ट्री में यह सवाल उठने लगा कि मेटा ने ऐसी क्या गलती कर दी, जिसने उसे आर्थिक तंगी की ओर धकेलना शुरू कर दिया. विशेषज्ञों ने पहले ही भारत में भी मेटा की कमजोर पकड़ का संकेत दिया था. ऐसा नहीं है कि मेटा ने भारत में अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए अलग-अलग जोखिम नहीं उठाए. मोनेटाइजेशन के लिए इंस्टाग्राम को प्रमोट करने की पूरी कोशिश की. WhatsApp के जरिए भी कंपनी ने रेवेन्यू बढ़ाने की कोशिश की.

टिकटॉक बैन का फायदा इंस्टाग्राम को
जब भारत सरकार ने देश में टिकटॉक पर बैन लगाया तो उसका सबसे अधिक फायदा इंस्टाग्राम को हुआ. इंस्टाग्राम ने यूजर्स के लिए रील्स पेश किया. ऐसा दिख रहा था कि कंपनी अच्छा कर रही है, तभी अचानक नवंबर आते-आते सारी पोल खुल गई. मेटा इंडिया के प्रमुख का इस्तीफा हो गया. वैश्विक स्तर पर कई डिपार्टमेंट्स बंद कर दिए गए. कर्मचारियों की छंटनी शुरू हो गई. टेक दिग्गज ने लगातार दूसरी बार राजस्व में गिरावट दर्ज की.

आखिर गलती कहां हुई?
विशेषज्ञों का मानना ​​है कि मेटा अपनी रणनीतियों में लगातार बदलाव करती रही. यह उसकी सबसे बड़ी गलती रही. इस क्रम में वह उस रास्ते से भटक गई, जहां उसे जाना था. एक्सपर्ट्स ने बताया कि रणनीति में लगातार बदलाव के कारण Meta मार्केटर्स और एडवर्टाइजर्स के लिए फायदेमंद नहीं रहा.  iOS यूजर्स के लिए फेसबुक ने जो बदलाव किया, वो उसके लिए नुकसानदायक साबित हुआ. एडवर्टाइजर्स के लिए कोई ट्रैकिंग सिस्टम नहीं था. उन्होंने बताया, "जो कोई भी IOS या सफारी पर निर्भर है, वह इस परिवर्तन से बहुत बुरी तरह प्रभावित हुआ, जिससे फेसबुक संघर्ष करता रहा."

Google ने भी दिया झटका
वहीं, दूसरी तरफ Google की शानदार मार्केटिंग पॉलिसी से भी मेटा बुरी तरह प्रभावित हुई. Google अपनी नई रणनीति के अनुसार एडवर्टाइजर को अट्रैक्ट करने में कामयाब रही, जबकि Meta उन्हें खोता चला गया. हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत के दृष्टिकोण से मेटा का राजस्व अभी भी अच्छा है और प्रदर्शन से मार्केटर्स खुश हैं.

WhatsApp में कहां हो गई गलती?
मेटा (तत्कालीन फेसबुक) ने 2014 में WhatsApp का अधिग्रहण किया था. तभी से यूजर्स की गोपनीयता सुरक्षित रहने को लेकर सवाल खड़ा होने लगा. कंपनी ने बहुत सफाई देने की कोशिश की कि उनके किसी भी कदम से यूजर्स की गोपनीयता भंग नहीं होगी, पर कंपनी अपने दलील से लोगों का भरोसा जीतने में पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाई. इस प्रकार कंपनी के लिए WhatsApp से लाभ हासिल करना मुश्किल हो गया.

आपको बता दें कि वर्ष 2021 में मेटा का राजस्व लगभग 97 प्रतिशत विज्ञापन से आ रहा था, लेकिन उनकी लगातार बदलती रणनीति के विज्ञापनदाताओं का भरोसा उठता गया. एक्सपर्ट्स को लगता है कि WhatsApp कॉमर्स पर बेहतर तरीके से काम किया जा सकता था. उन्होंने कहा, "वे यह नहीं समझ पाए हैं कि यूजर्स की प्राइवेसी और कॉमर्स इंटीग्रेशन को कैसे बैलेंस किया जाए." मेटा अभी तक इसका हल नहीं निकाल पाई है.

किसी चीज की जरूरत, कंपनी नहीं समझ पा रही
एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनी अभी यह नहीं समझ पा रही है कि किस चीज की आवश्यकता है. जब तक वह यह नहीं समझेगी, तब तक उसे फायदा नहीं होगा और कंपनी के लुप्त होने की संभावना भी बढ़ जाएगी. हालांकि तुरंत कोई समाधान नजर नहीं आ रहा. एक्सपर्ट्स ने कहा, "यह कल या परसों नहीं होने वाला है. इसमें काफी समय लगने वाला है."

क्या इंस्टाग्राम से कुछ मिला फायदा?
मेटा के इंस्टाग्राम ने हाल ही में दो बिलियन मंथली एक्टिव यूजर्स के आंकड़े को छू लिया है. यह कंपनी की सफलता है, पर क्या टिकटॉक के बैन होने के बाद भी रील्स के जरिए मेटा इंस्टाग्राम से उतना प्रॉफिट हासिल कर पाई है, जितनी उसे जरूरत थी? एक्सपर्ट्स्स का यह भी मानना ​​है कि शॉर्ट फॉर्मेट वीडियो स्पेस अभी बहुत शुरुआती लेवल पर है. टिकटॉक के बाहर होने के बाद इंस्टाग्राम अच्छा प्रयोग कर रहा है, पर उसमें अभी बहुत गुंजाइश है.

हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स्स का ये भी मानना है कि मेटा में चुनौतियों का सामना करने की पूरी क्षमता मौजूद है. अतीत में भी ऐसा देखा जा चुका है. हालांकि, अभी ये देखना है कि कंपनी इन चुनौतियों से कैसे निपटती है और उसकी आगे की रणनीति क्या होगी.

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