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बड़ा सवाल: क्यों सूख रहा दिल्ली का गला, आखिर कैसे पैदा हुए बेंगलुरु जैसे हालात?
राजधानी दिल्ली जल संकट का सामना कर रही है. पानी की बर्बादी रोकने के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
धधकती आग का अहसास दिलाने वाली गर्मी के बीच दिल्ली का गला सूख रहा है. राजधानी में पानी की किल्लत (Delhi Water Crisis) विकराल रूप धारण करती जा रही है. दिल्ली सरकार ने पानी की बर्बादी रोकने के लिए कड़ी नियम लागू कर दिए हैं. साथ ही सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया है. दिल्ली के कई इलाकों में पारा पहले ही 50 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया. ऐसे में पानी की किल्लत ने लोगों की परेशानियों में इजाफा कर दिया है. चलिए समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर दिल्ली की बेंगलुरु वाली स्थिति हुई कैसे?
टैंकर देखते ही लगती है दौड़
इसी साल मार्च में कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से भीषण जल संकट की खबर सामने आई थी. शहर के कई इलाके पूरी तरह से वॉटर टैंकर्स पर निर्भर हो गए थे और टैंकर ऑपरेटरों ने इस आपदा को अवसर मान लिया था. 1000 लीटर पानी के टैंकर की कीमत पहले 600-800 रुपए के बीच थी, लेकिन मार्च में बढ़कर 2000 रुपए से ज्यादा हो गई थी. अब करीब दो महीने बाद देश की राजधानी दिल्ली से ऐसी खबरें आ रही हैं. पानी के टैंकर देखते ही लोग उसके पीछे दौड़ पड़ते है. लगातार बिगड़ते हालात देखकर केजरीवाल सरकार के भी हाथ-पांव फूल गए हैं.
इस वजह से बिगड़े हालात
दिल्ली में जल संकट कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन इस बार स्थिति ज्यादा खराब दिखाई दे रही है. क्योंकि गर्मी इस बार सभी रिकॉर्ड तोड़ने पर अमादा है. गर्मी के चलते पानी की डिमांड बढ़ गई है. दिल्ली में जलापूर्ति पहले से ही कम है, ऐसे में बढ़ती डिमांड ने संकट बढ़ा दिया है. दिल्ली का अपना कोई जल स्रोत नहीं है. इसका मतलब है कि राजधानी पानी के लिए पूरी तरह से पड़ोसी राज्यों पर निर्भर है. गर्मी केवल दिल्ली ही नहीं देश के अधिकांश हिस्से की परेशानी का कारण बनी हुई है. पानी के खपत सभी प्रभावित हिस्सों में बढ़ी है, इसलिए दिल्ली को ज्यादा पानी नहीं मिल रहा है. दिल्ली जल बोर्ड के अनुसार, 2024 में दिल्ली प्रतिदिन करीब 32.1 करोड़ गैलन पानी का सामना कर रही है.
कहां से होती है सप्लाई?
दिल्ली को हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश से पानी मिलता है. हरियाणा सरकार यमुना नदी से, यूपी सरकार गंगा नदी से और पंजाब सरकार भाखरा नांगल से दिल्ली को पानी सप्लाई करती है. सभी जगह से दिल्ली को प्रतिदिन 96.9 करोड़ गैलन पानी मिलता है, जबकि हर दिन 129 करोड़ गैलन पानी की आवश्यकता. यानी दिल्ली को आवश्यकता से कम पानी मिल रहा है. सरकारी स्तर पर जल संकट से निपटने के पूर्व में भी कई दावे किए गए हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति उन दावों की असलियत बयां करने के लिए काफी है. अब केजरीवाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है कि वो पड़ोसी राज्यों से दिल्ली को ज्यादा पानी देने का निर्देश दे. सरकार का कहना है कि हरियाणा द्वारा यमुना में कम पानी छोड़ने के चलते हालात बिगड़े हैं.
देने पड़ सकते हैं ज्यादा दाम
पानी की किल्लत जहां आम जनता के लिए मुसीबत है. वहीं, कुछ लोगों के लिए मुनाफा कमाने का अवसर बन गई है. जल संकट के चलते प्राइवेट टैंकरों की डिमांड बढ़ जाती है. इसके अलावा, RO का पानी भी महंगा हो जाता है. दिल्ली में बड़े पैमाने पर पानी की बोतलें सप्लाई होती हैं, ऐसे में आने वाले दिनों उनकी कीमतों में उछाल आ सकता है. 2021 में जब पूर्वी और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के बड़े हिस्से में जल संकट हुआ था, तब ऐसा ही देखने को मिला था. पानी की 20 लीटर वाली बोतल के दाम दोगुने हो गए थे. 40-50 रुपए में मिलने वाली ये बोतल 80 से 100 रुपए में बिक रही थी.
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