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Explainer: क्या है Quite Quiting, आखिर क्यों कर रहा है ट्रेंड, समझिये पूरी कहानी
एक रिसर्च में ये बात सामने आई है कि वर्कप्लेस में बर्नआउट यानी अक्रियाशील होना युवाओं के लिए जिनकी उम्र 20s में है काफी बड़ा खतरा है
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: कभी Moonlighting, कभी Quit quitting और कभी Quite Firing, अब एक नया शब्द ट्रेंड में आया है Quite Quiting. अब इस शब्द के क्या मायने हैं और ये ट्रेंड में क्यों हैं.
क्या है Quite Quiting
नाम सुनकर तो ऐसा लगता है कि जैसे कोई कर्मचारी अपनी नौकरी से परेशान होकर नौकरी छोड़ रहा है, लेकिन बात दरअसल इसके ठीक उलट है. इसका सीधा रिश्ता वर्क-लाइफ बैलेंस को मेनटेन करने से है. यानी ऑफिस में सिर्फ उतना ही काम करो जितना जरूरी है, सिर्फ उन्हीं कामों की परफॉर्मेंस दुरुस्त रखो जो HR ने आपके KRA में असाइन की है. ज्यादा उत्साह या महात्वकांक्षा में आकर काम करने की जरूरत नहीं है. बाकी का वक्त अपनी निजी जिंदगी को दीजिए, ताकि काम और जिंदगी के बीच तालमेल बना रहे. इसके अलावा आपकी शिफ्ट की टाइमिंग जितनी है, उससे एक मिनट भी ज्यादा काम करने की जरूरत नहीं है, अगर आपकी शिफ्ट शाम 5 बजे खत्म होती है तो आप 5 बजे ऑफिस से निकल जाइए. अगर आपसे इस बात की उम्मीद की जाती है कि आप अपनी शिफ्ट से ज्यादा काम करें तो आप ओवरटाइम की मांग करें.
कैसे शुरू हुआ ट्रेंड Quite Quiting
हालांकि ये कॉन्सेप्ट नया नहीं है, बल्कि इसका नाम Quite Quiting नया है. अब सवाल उठता है कि ये ट्रेंड शुरू कैसे हुआ. दरअसल, कोरोना महामारी के दौरान कंपनियों ने अपने कर्मचारियों से जमकर काम लिया. कर्मचारी जिनकी शिफ्ट 8-9 घंटे होती है, वर्क फ्रॉम होम के नाम पर उनसे कई-कई घंटे काम करवाया गया. इस महामारी के बाद कई युवाओं ने वर्कफोर्स में कदम रखा. इनको ये अहसास हुआ कि काम को ज्यादा गंभीरता से लेने के चक्कर में उनकी मानसिक, सामाजिक और पारिवारिक स्थिति बिगड़ रही है. युवाओं खासतौर पर GenZ (18-24 साल की उम्र वाले ) ने TikTok, Instsgram पर इसे लेकर वीडियो बनाने शुरू कर दिए, जिसमें इस बात पर फोकस था कि कैसे वर्क-लाइफ बैलेंस बनाया जाये, हालांकि शुरू में इसका कोई नामकरण नहीं हुआ था लेकिन धीरे-धीरे ये Quite Quiting के ट्रेंड से दुनियाभर में पॉपुलर हो गया.
Quite Quiting पर रिपोर्ट्स
Quite Quiting को लेकर तमाम तरह की रिसर्च भी छपीं, एक रिसर्च में ये बात सामने आई है कि वर्कप्लेस में बर्नआउट यानी अक्रियाशील होना युवाओं के लिए जिनकी उम्र 20s में है काफी बड़ा खतरा है. Microsoft की ओर से 30 हजार वर्कर्स पर कराए गए एक सर्वे में पता चला कि 54% GenZ (18-24 साल की उम्र वाले ) नौकरी छोड़ने पर विचार कर रहे हैं. World Economic Forum ने अपनी 2021 की ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट में "युवा मोहभंग" को 10 तात्कालिक जोखिमों में से 8वें नंबर पर रखा है. इसमें महामारी की शुरुआत के बाद से खराब होती मानसिक स्थिति शामिल है, जिससे दुनिया भर के 80% युवा अवसाद, चिंता और निराशा की चपेट में आ गए हैं.
नौकरी छोड़ना चाहते हैं युवा
ग्लोबल फर्म McKinsey के सर्वे में एक बात सामने आई कि ज्यादातर लोग अब 9-5 की नौकरी नहीं करना चाहते हैं, वो अब खुद का कोई बिजनेस करना चाहते हैं, कुछ ऐसा करना चाहते हैं जो अलग हो, वो पार्ट-टाइम काम के लिए भी तैयार हैं. कंपनियों के वर्कफोर्स आंकड़ों जिसमें McKinsey भी शामिल है, पता चलता है कि ग्लोबल वर्कफोर्स की 40 परसेंट आबादी अगले 3 से 6 महीने में नौकरी छोड़ना चाहती है. McKinsey की रिपोर्ट कहती है कि एक औसत व्यक्ति जीवन भर काम पर 90,000 घंटे बिताता है, इसलिए इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि नौकरी से संतुष्टि, या असंतोष, आपके जीवन को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है.
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