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आखिर क्या है अडानी ग्रुप और रिलायंस के बीच हुआ 'नो-पोचिंग एग्रीमेंट'? जानें यहां  

गौतम अडानी भारत और एशिया के सबसे अमीर शख्स बन गए हैं. जबकि दुनिया के अरबपतियों के लिस्ट में अब वह दूसरे स्थान पर हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

दुनिया के दूसरे नंबर के रईस गौतम अडानी का अडानी समूह तेजी से विस्तार कर रहा है. अडानी नए-नए सेक्टर्स में पैर जमा रहे हैं. वहीं, मुकेश अंबानी के रिलायंस समूह ने भी अपनी रणनीति बदल दी है. समूह अधिग्रहण के साथ-साथ विदेशी कंपनियों से हाथ मिला रहा है, ताकि कारोबार का विस्तार किया जा सके. अब तक अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले इन गुजराती कारोबारियों के बीच अब सीधी जंग भी देखने को मिल रही है. यही वजह है कि अब दोनों ने एक खास समझौता किया है.

दोनों समूहों में बढ़ा कंपीटिशन
अडानी और रिलायंस समूह ने 'नो पोचिंग' एग्रीमेंट किया है. दोनों उद्योग घरानों ने यह समझौता इसलिए किया है ताकि उनके बीच टैलेंट वॉर को रोका जा सके. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये समझौता इस साल मई में किया जा चुका है और दोनों समूहों के सभी बिजनेस में लागू होगा. बता दें कि दोनों समूहों में कंपीटिशन बढ़ता हुआ साफ नजर आ रहा है. पिछले साल अडानी ग्रुप ने पेट्रोकेमिकल्स के क्षेत्र में कदम रखा है. जबकि रिलायंस इस सेक्टर में पहले से ही मौजूद है. यानी इस सेक्टर में दोनों के बीच कारोबारी जंग तय है.

तेजी से बढ़ रही अडानी की दौलत 
पेट्रोकेमिकल्स के अलावा भी कई क्षेत्रों में दोनों के बीच अब सीधी टक्कर होने की उम्मीद है. पिछले कुछ सालों में अडानी समूह ने बहुत तेजी से विस्तार किया है. समूह के चेयरमैन गौतम अडानी भारत और एशिया के सबसे अमीर शख्स बन गए हैं. जबकि दुनिया के अरबपतियों के लिस्ट में अब वह दूसरे स्थान पर हैं. इस दौरान, मुकेश अंबानी की नेटवर्थ में भी इजाफा हुआ है, लेकिन अडानी जितना नहीं. लिहाजा, मुकेश अंबानी को समझ आ गया है कि यदि आक्रामक रणनीति नहीं बनाई गई तो रिलायंस, अडानी समूह से पिछड़ जाएगी. इसलिए वह अधिग्रहण और विदेशी कंपनियों से साझेदारी पर जोर दे रहे हैं. हाल ही में रिलायंस ने सोलर एनर्जी सेक्टर में बड़ा दांव खेलते हुए अमेरिका की कैलक्स कॉरपोरेशन में निवेश की घोषणा की है. रिलायंस 12 मिलियन डॉलर में कैलक्स की 20% हिस्सेदारी खरीदेगी. इससे कंपनी को एडवांस सोलर सेल टेक्नोलॉजी में मजबूती मिलने की उम्मीद है.  

क्या है नो पोचिंग एग्रीमेंट?
पोचिंग का मतलब है शिकार. आमतौर पर कंपनियों की नज़र प्रतियोगी कंपनी ने टैलेंटेड स्टाफ पर रहती है. हर कोई अपनी टीम में सबसे योग्य सदस्य चाहता है और इसी चाहत में कर्मचारियों को अपने खेमे में लाने की कोशिश होती है. इसके अलावा, कर्मचारी भी बेहतर विकल्प की तलाश में दूसरी प्रतियोगी कंपनियों का रुख कर लेते हैं. इस व्यवस्था को रोकने के लिए होने वाले समझौते को 'नो पोचिंग' एग्रीमेंट कहा जाता है. अडानी-रिलायंस समूह के बीच मई से लागू हुए इस समझौते के बाद अब इन दोनों कंपनियों के कर्मचारी एक दूसरे के यहां काम नहीं कर पाएंगे. एक रिपोर्ट के अनुसार, मुकेश अंबानी की कंपनियों में 3 लाख 80 हजार से ज्यादा कर्मचारी हैं, जबकि अडानी की कंपनियों में 23 हजार कर्मचारी काम कर रहे हैं.  
 


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