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IPO आवेदन के लिए SEBI के नए नियम आज से लागू, जानिए आपके लिए क्या बदला?

IPO आवेदन में सब्सक्रिप्शन बढ़ाने के खेल को रोकने के लिए मार्केट रेगुलेटर सेबी ने नए नियम बनाए हैं, जो आज से लागू हुए हैं. जरा समझिए क्या हैं नियम.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

मुंबई: IPO में निवेश को लेकर आज से नए नियम लागू हो गए हैं. इन नए नियमों के मुताबिक किसी निवेशक का IPO आवेदन तभी प्रोसेस होगा जब उसके बैंक खाते में उतना बैलेंस होगा. ये नियम 1 सितंबर के बाद आने वाले IPO पर लागू होगा. 

IPO आवेदन के लिए नए नियम 
अगर आप भी IPO में पैसा लगाने की सोच रहे हैं तो मार्केट रेगुलेटर सेबी के इस नए नियम को ध्यान से समझ लीजिए. हालांकि नियमों में कोई बहुत ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है, सेबी ने सिर्फ इतना कहा है कि जो भी निवेशक IPO में पैसा लगाना चाहते हैं, तो निवेश के पहले अपने बैंक खाते में बैलेंस को चेक कर लें कि जितने की बोली आप लगाने जा रहे हैं उतना पैसा आपके खाते में है या नहीं. सेबी के नए नियमों के मुताबिक IPO स्टॉक एक्सचेंज अपनी इलेक्ट्रॉनिक बुक बिल्डिंग प्लेटफॉर्म में उन ASBA (Application Supported by Blocked Amount) एप्लीकेशन को ही स्वीकार करेंगे जब ये बात अनिवार्य रूप से सुनिश्चित हो जाए कि उनके आवेदन का पैसा ब्लॉक हो गया है. मतलब अगर आपने किसी IPO में पैसा लगाया, ये एप्लीकेशन राशि मान लीजिए 15,000 रुपये है, तो इतना पैसा आपके खाते में ब्लॉक होने के बाद ही आपका IPO आवेदन स्वीकार किया जाएगा. अगर आपके खाते में 15,000 रुपये नहीं है तो आपके IPO आवेदन को स्वीकार नहीं किया जाएगा. जब आपको शेयर अलॉट हो जाएंगे तो ये पैसा आपके बैंक खाते से काट लिया जाएगा. 

SEBI को ये क्यों करना पड़ा
अगर आप एक रिटेल निवेशक हैं तो आपको लग रहा होगा कि IPO के लिए ये नियम तो पहले से ही हैं, जब कोई रिटेल निवेशक IPO के लिए बोली लगाता है तो उसका पैसा ब्लॉक हो जाता है. बिल्कुल सही है, लेकिन सेबी का ये नया नियम खासतौर पर गैर-संस्थागत निवेशकों (NIIs), हाई नेटवर्थ निवेशकों (HNIs) QIBs और दूसरी रिजर्व कैटेगरीज के लिए है. दरअसल होता ये है कि बड़े बड़े NIIs, HNIs, QIBs कई बार जब किसी IPO के लिए बोली लगाते हैं, तो उनका मकसद अलॉटमेंट हासिल करना नहीं होता, बल्कि सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों को बढ़ाने का होता है. लेकिन बाद में उनकी एप्लीकेशन कैंसिल हो जाती. 

उदाहरण के तौर पर जब LIC का 21,000  करोड़ रुपये  का IPO आया तो उसे बंपर सब्सक्रिप्शन मिला, ऐसा लगा मानों जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है. लेकिन 20 लाख एप्लीकेशन कैंसिल हो गए, क्योंकि उनके बैंक खातों में पर्याप्त रकम नहीं थी. इसमें ज्यादातर वो एप्लीकेशन थीं जो जिनपर ASBA एप्लीकेशन के नियमों से छूट मिलती थी. अबतक ASBA के नियम रिटेल निवेशकों के लिए अनिवार्य थे, यानी बैंक में पैसा ब्लॉक होगा तो ही IPO एप्लीकेशन स्वीकार होगी, लेकिन NIIs, HNIs और दूसरी रिजर्व कैटेगरीज को इसमें छूट मिलती थी. SEBI ने इस कमजोर कड़ी को पकड़ा और नए नियम लागू कर दिए. 

SEBI के नए नियमों से क्या होगा
SEBI के इस कदम से किसी IPO के सब्सक्रिप्शन आंकड़ों को लेकर सही तस्वीर बनेगी, इससे वो निवेशक दूर हो जाएंगे जो सिर्फ सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों को बढ़ाने के लिए बोली लगाते हैं, जबकि उन्हें इश्यू हासिल करने में कोई दिलचस्पी नहीं होती, सिर्फ गंभीर निवेशक ही आईपीओ में पैसा लगाएंगे. इससे निवेशकों के बीच भरोसा बढ़ेगा 

दिसंबर, 2009 में SEBI ने QIB को छोड़कर दूसरी सभी कैटेगरीज के निवेशकों के लिए IPO में ASBA की सुविधा की शुरुआत की थी, जिसे मई 2010 में QIB के लिए भी लागू कर दिया गया. ASBA किसी निवेशक की तरफ से किया जाने वाला वह आवेदन है, जिसमें किसी IPO का हिस्सा बनने के लिए स्व-प्रमाणित सिंडिकेट बैंक (ASBA) को बैंक खाते में आवेदन की राशि रोकने का अधिकार दिया जाता है. अगर कोई निवेशक ASBA के माध्यम से आवेदन कर रहा है, तो उसके आवेदन का पैसा बैंक खाते से तभी काटा जाएगा.

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