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Explainer: कार कम्पनियों को लेना चाहिए Initiative, जान पर भारी पड़ता है ये जुगाड़ सिस्टम!
भारत में सड़क के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जाती हैं, हेलमेट,सीटबेल्ट जैसी चीजें लोग ट्रैफिक पुलिस को देखकर चालान कटने से बचने के लिए लगाते हैं न कि अपनी सुरक्षा के लिए.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: सड़क हादसे में सायरस मिस्त्री की मौत से कारोबार जगत और देश स्तब्ध है, लेकिन उनकी इस आकस्मिक मौत ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं, जैसे - अगर सायरस मिस्त्री ने पीछे की सीट की सीटबेल्ट लगाई होती तो शायद उनकी जान बच सकती थी.
सायरस जिस कार में सवार थे वो दुनिया में अपनी सेफ्टी और लग्जरी के लिए मशूहर है, 50 लाख से ऊपर की कीमत वाली Mercedes GLC के लिए कहा जाता है कि इसमें सड़क हादसों में यात्री की जान नहीं जा सकती, क्योंकि इसे Euro NCAP में सबसे ज्यादा 5 स्टार रेटिंग मिली है, जो सुरक्षा के हर पैमाने पर खरा उतरती है. लेकिन अगर यात्री ही लापरवाह हो जाए तो? कार कितनी भी सेफ हो, जान तो तभी बचेगी जब आप सीट बेल्ट लगाएंगे. दूसरी बात ये कि Mercedes GLC जैसी लग्जरी कार में भी पिछली सीट पर सीटबेल्ट अलार्म नहीं होता.
पिछले सीट की बेल्ट को लेकर ऐसी लापरवाही
भारत में सड़क के नियमों की जिस कदर धज्जियां उड़ाई जाती हैं, शायद ही दुनिया में कहीं होता है. हेलमेट और सीटबेल्ट जैसी चीजें लोग या तो ट्रैफिक पुलिस को देखकर चालान कटने से बचने के लिए लगाते हैं या जिन्हें अपनी जान की थोड़ी बहुत फिक्र होता है वो लगाते हैं. इसमें भी अगर कार की पिछली सीट की बात करें तो लोगों को ये लगता है कि वहां पर सीटबेल्ट जरूरी नहीं, वो तो बस ऐसे ही लगा रखा है. जबकि सच्चाई ये है कि पिछली सीट पर बैठे यात्रियों को भी सीटबेल्ट लगाना जरूरी है, सेंट्रल मोटर व्हीकल एक्ट के रूल नंबर 138 के मुताबिक कार की फ्रंट सीट या सामने की ओर मुंह करके बैठे यात्रियों के लिए सीट बेल्ट अनिवार्य है. ऐसा नहीं करने पर 1000 रुपये का जुर्माना है.
डरा देने वाले आंकड़े
2019 में 11 शहरों में Save LIFE Foundation ने एक शोध किया था, जिसमें सिर्फ 7 परसेंट लोगों ने माना कि वो पिछली सीट पर बैठकर सीटबेल्ट का इस्तेमाल करते हैं. मजे की बात ये है कि सिर्फ 27.7% लोगों को ही पता था कि पिछली सीट पर भी बेल्ट लगाना अनिवार्य है. 77 परसेंट पैरेंट्स ने माना कि उनके बच्चे पिछली सीट पर बैठते हैं और सीट बेल्ट नहीं लगाते हैं. Save LIFE Foundation ने कई हाईवे पर हुए हादसों की जांच के दौरान पाया कि जिन लोगों को दुर्घटना में गंभीर चोटें आईं थी, उन सभी ने पिछली सीट पर बेल्ट नहीं लगाई थी. ऐसे ही तमाम रिसर्च, रिपोर्ट आपको मिल जाएंगी जिसमें यही सब बातें निकलकर आई हैं कि लोग या तो सीटबेल्ट की अनिवार्यता को नजरअंदाज करते हैं या फिर उसे सिर्फ एक एक्सेसेरीज का हिस्सा मानकर चलते हैं.
कार कंपनियों की जिम्मेदारी भी है क्या?
अब सवाल उठता है कि यात्री पिछली सीट पर सीटबेल्ट नहीं लगाते, इसके पीछे क्या कार कंपनियों की भी कोई जिम्मेदारी बनती है. क्योंकि, कार कंपनियां कारों में फ्रंट सीट पैसेंजर्स के लिए तो सीट बेल्ट अलार्म देती हैं, लेकिन पिछली सीट पर बैठे यात्रियों के लिए ऐसा कोई अलार्म नहीं होता है. इससे क्या यात्रियों को ये संदेश नहीं जाता है कि पिछली सीट के लिए सीटबेल्ट लगाना अनिवार्यता के दायरे से बाहर है. दूसरी बात, कारों में जो सीट बेल्ट अलार्म होता है वो कुछ सेकेंड के लिए होता है, ऑटो इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स ये सलाह देते हैं कि अलार्म की आवाज तेज और लंबे समय के लिये होनी चाहिए, ताकि यात्री झुंझलाकर ही सही सीट बेल्ट लगाए. एक्सपर्ट्स का मानना है कि सीट बेल्ट नहीं लगाने की चेतावनी कम से कम 90 सेकेंड की होनी चाहिए या इसे तबतक बजना चाहिए जबतक सभी यात्री सीटबेल्ट न लगा लें. कई एक्सपर्ट्स तो ये भी सलाह देते हैं कि अगर कार में बैठे लोग सीट बेल्ट न लगाएं तो कार कंपनियों को ऐसा फीचर देना चाहिए कि गाड़ी का इंजन ऑटोमैटिक बंद हो जाए. इसलिए मजबूरी में ही सही लेकिन यात्री सीटबेल्ट लगाएंगे.
पिछली सीट पर भी मिलना चाहिए सेंसर
जहां तक पिछली सीट पर अलार्म देने की बात है, ये डिमांड भी काफी पहले से उठ रही है. दरअसल, सीटबेल्ट का सिस्टम सेंसर पर काम करता है, जैसे ही कोई यात्री सीट पर बैठता है, उसके भार से सेंसर एक्टिव हो जाता है और अलार्म बजने लगता है, ये तभी बंद होता है जब सीट बेल्ट लगा लिया जाता है. लेकिन पिछली सीट पर ऐसा कोई सेंसर नहीं होता, एक्सपर्ट्स ये मांग करते हैं कि पिछली सीट पर भी सेंसर का फीचर दिया जाना अनिवार्य करना चाहिए. सड़क और हाईवे मंत्रालय की साल 2020 के लिए एक रिपोर्ट के मुताबिक सीट बेल्ट नहीं लगाने की वजह से 15100 लोगों की सड़क हादसों मौत हो गई, इसमें ड्राइवर्स और यात्री दोनों ही शामिल थे. इसलिए ये जरूरी हो जाता है कि सिर्फ अगली ही सीट नहीं, बल्कि पिछली सीट के लिए सीटबेल्ट अलार्म अनिवार्य होना चाहिए. और पुलिस प्रशासन की तरफ से भी ऐसी सख्ती बरतनी चाहिए कि पिछली सीट पर बैठे यात्री भी सीटबेल्ट को लगाएं.
हर नियम का तोड़ और जुगाड़
ये तो रही कार कंपनियों की बात, भारत जैसे देश में नियम-कानून बाद में बनते हैं, लोग उसकी काट पहले निकाल लेते हैं. अगर आप गूगल में जाकर seat belt alarm stopper सर्च करेंगे तो आपको ढेरों सर्च और रिजल्ट मिलेंगे, ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर अवैध रूप से कई ऐसे डिवाइस बेचे जा रहे हैं जो सीटबेल्ट अलार्म को बंद कर देते हैं. इसी साल अप्रैल में सड़क परिवहन मंत्रालय ने इसका संज्ञान लिया है और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय को ऐसे डिवाइस की बिक्री पर तुरंत रोक लगाने को कहा है. दरअसल, ये डिवाइस और कुछ नहीं बल्कि कार की बकल की कॉपी होते हैं, जो अलार्म की आवाज को बंद कर देते हैं. ये आपको ई-कॉमर्स को वेबसाइट पर महज 250 रुपये में मिल जाते हैं. मोटर व्हीकल एक्ट के तहत ऐसे डिवाइस को बेचना, बनाना या खरीदना कानूनन अपराध है. अगर दोषी पाए गए तो 1 लाख का जुर्माना, 1 साल की कैद या दोनों हो सकती है.
वैसे भी अगर आपने शायद ही किसी पुलिसवाले को पिछली सीट पर बैठ यात्री के सीटबेल्ट नहीं पहनने पर चालान काटते देखा या सुना हो, इससे क्या संदेश जाता है. तो कहने का मतलब ये है कि कार में बैठने वाली सवारी की अपनी जान की सुरक्षा उसके हाथ में ही है. नियम-जुर्माने तो बहुत हैं, लेकिन उनको मानना भी जरूरी है. नियमों का उल्लंघन करके बचने के आपको 100 मौके मिलेंगे, लेकिन मौत को सिर्फ 1 मौका चाहिए. बाकी आप समझदार हैं.
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