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राकेश झुनझुनवाला स्मृति शेष: जोखिम, ज्ञान और धैर्य का संगम

स्टॉक बाजार में कामयाब निवेश सिर्फ जोखिम लेने की क्षमता के आधार पर नहीं होता. राकेश झुनझुनवाला चार्टर्ड एकाउंटेंट थे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

आलोक पुराणिक
(लेखक आर्थिक पत्रकार हैं.)

राकेश झुनझुनवाला नहीं रहे, यह खबर भारतीय शेयर निवेशकों के लिए स्तब्धकारी है. 62 साल की उम्र में राकेश झुनझुनवाला चले गये. राकेश झुनझुनवाला ने हाल में एवियेशन में निवेश को लेकर गंभीर योजना बनायी थीं. राकेश झुनझुनवाला भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर हमेशा बुलिश यानी गहरे तौर पर सकारात्मक रहे. उनका मानना था कि भारतीय अर्थव्यवस्था के साथ भारत के शेयर बाजार का भविष्य बहुत चमकदार है.

भारतीय निवेशकों में अलग किस्म के निवेशक राकेश झुनझुनवाला
राकेश झुनझुनवाला क्यों भारतीय निवेशकों में अलग किस्म के निवेशक थे, यह  सवाल बहुत महत्वपूर्ण है. स्टॉक बाजार में निवेश के नाम पर सट्टा और जुआ खेलनेवाले कई निवेशक राकेश झुनझुनवाला का उदाहरण पेश करते हुए बताते हैं कि देखो, राकेश झुनझुनवाला ने 5000 रुपये से की थी और अब उनके निवेश की वैल्यू करीब 40 हजार करोड़ रुपये की हो गयी है. पर राकेश झुनझुनवाला के निवेश को जानकर और उन्हें समझकर यह साफ होता है कि निवेश और जुए में बहुत फर्क होता है.

स्टॉक बाजार में कामयाब निवेश क्या होता है
स्टॉक बाजार में कामयाब निवेश सिर्फ जोखिम लेने की क्षमता के आधार पर नहीं होता. राकेश झुनझुनवाला चार्टर्ड एकाउंटेंट थे. यह अनायास नहीं है कि भारतीय शेयर बाजार के बहुत कामयाब निवेशकों में चार्टर्ड एकाउंटेंट काफी हैं. इसकी वजह है कि चार्टर्ड एकाउंटेंसी पढ़कर किसी को भी कारोबार की असली भाषा समझ में आ जाती है. किसी कंपनी की बैलेंस शीट में नोट्स दिये जाते हैं, जिन्हे आम तौर पर सामान्य निवेशक पढ़ते समझते नहीं हैं. चार्टर्ड एकाउंटेंसी ने राकेश झुनझुनवाला को वह गुर दिया था कि वह बैलेंस शीट के कोने कतरे के नोट्स पढ़कर भी कंपनी के प्रबंधन से महत्वपूर्ण सवाल पूछते थे.

ज्ञान के बगैर जोखिम बेवकूफी है
ज्ञान के बगैर जोखिम बेवकूफी है और जोखिम लेने की क्षमता के बगैर ज्ञान डरपोक होने का लक्षण है. राकेश झुनझुनवाला का टाटा समूह की एक कंपनी टाइटन से विशेष जुड़ाव रहा. बहुत पहले राकेश झुनझुनवाला ने समझ लिया था कि भारत में एक उभरता मध्यवर्क टाइटन के लिए बड़ा ग्राहक आधार पैदा करेगा. राकेश झुनझुनवाला शेयर बाजार में निवेश करने जब उतरे थे, तब वह काल उदारीकरण से पहले का काल था. भविष्य की ट्रेंड्स को पढ़ने की अपार क्षमताएं राकेश झुनझुनवाला में थी.

शेयर बाजार में धैर्य की जरूरत
शेयर बाजार में जुए की तरह निवेश करके बहुत लोगों ने कमाया है, पर वह उस कमाये हुए धन को अपने पास बनाये नहीं रख पाये हैं. इसके लिए धैर्य की जरूरत होती है, जो राकेश झुनझुनवाला में अपार था. शेयर बाजार के डूबने पर वह कभी धैर्य नहीं खोते थे और धैर्य का संदेश देते थे. राकेश झुनझुनवाला को भारतीय शेयर बाजार का वारेन बूफे कहा जाता था. वारेन बूफे अमेरिका के महान निवेशक हैं, जो अपने धैर्य के लिए चिन्हित किये जाते हैं. दशकों तक उन्होने कई शेयरों को अपने निवेश का हिस्सा बनाये रखा. रोज शेयर बाजार के ऊपर नीचे जाने से वारेन बूफे व्यथित नहीं होते.

जोखिम, ज्ञान और धैर्य का संगम ही किसी निवेशक को वारेन बूफे या राकेश झुनझुनवाला बनाता है.

VIDEO: प्रधानमंत्री मोदी के पास कितने करोड़ की है संपत्ति


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