✕

होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / विकसित भारत: पूंजी की लागत कम करने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर काम करने की जरूरत

विकसित भारत: पूंजी की लागत कम करने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर काम करने की जरूरत

निवेशक मोहनदास पाई स्टार्टअप्स के लिए निरंतर फंड प्रवाह की वकालत करते हैं और हर राज्य के लिए आर्थिक सलाहकार परिषद की पैरवी करते हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago

विकसित भारत@2047 के विजन को साकार करने के लिए निवेशक-स्तंभकार मोहनदास पाई का कहना है कि भारत को पूंजी की लागत कम करनी होगी और युद्ध स्तर पर ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में काम करना होगा. “पहला, हमें पूंजी की लागत कम करनी होगी, जो आज बहुत अधिक है. 11 से 13 प्रतिशत पर यह अमेरिका, चीन, जर्मनी और जापान से काफी ज्यादा है. दूसरा, हमें तेल पर अपनी निर्भरता कम करनी होगी, क्योंकि पिछले 50 वर्षों से तेल अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा है. अगले 3 से 4 वर्षों में हमें 35 से 40 प्रतिशत वाहनों को ईवी में बदलना होगा. तीसरा, हमें अधिक बुनियादी ढांचा बनाना होगा, जो हम कर रहे हैं. चौथा, हमें वित्तीय प्रणाली को मजबूत करना होगा ताकि निवेश के लिए कम दरों पर अधिक पूंजी उपलब्ध हो. पांचवां, हमें लाइसेंस कोटा राज के अवशेषों को हटाना होगा. छठा, हमें न्याय प्रणाली में सुधार करना होगा,” उन्होंने BW Businessworld के एक प्रश्न के जवाब में कहा और जोर दिया कि आगे बढ़ते हुए पूंजी की लागत कम करना और ऊर्जा आत्मनिर्भरता शीर्ष प्राथमिकताएं होनी चाहिए.

पाई ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया भारत का सम्मान करती है, लेकिन आर्थिक ताकत अभी भी कम है. “राजनीतिक रूप से प्रधानमंत्री मोदी की वजह से दुनिया हमारा सम्मान करती है, लेकिन आर्थिक रूप से हमारे पास वह वजन नहीं है,” उन्होंने कहा. उन्होंने कहा कि “अगले 20 वर्षों में विकास की संभावनाओं वाला एकमात्र बड़ा देश भारत है.” “अमेरिका का GDP 35 ट्रिलियन डॉलर है, चीन का 20 ट्रिलियन डॉलर है, और हम केवल 4 ट्रिलियन डॉलर पर हैं. जब हम बढ़ रहे हैं, तो हमें अगले 25 वर्षों में 10 ट्रिलियन डॉलर और 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचना होगा.”

भारत की आर्थिक यात्रा पर बात करते हुए उन्होंने कहा: “पहले 40 वर्षों में हमने पंडित नेहरू की विफल नीतियों का पालन करके अपने देश को नुकसान पहुंचाया. हमने समाजवाद और सरकारी व्यवसाय को अपनाया. लाइसेंस कोटा राज था. 1947 में भारत एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था. अब हम काफी अच्छा कर रहे हैं और भविष्य में और बेहतर करेंगे.”

BW Businessworld के हालिया इंटरव्यू में बेंगलुरु (बैंगलोर) का नाम उद्यमिता के शीर्ष केंद्र के रूप में उभरा है. शहर की खासियत पर बात करते हुए उन्होंने कहा: “बेंगलुरु भारत का एक बहुत अनोखा शहर है. यह एक उच्च शिक्षित मध्यम वर्ग का शहर है. हमारे पास पारंपरिक व्यवसायिक वर्ग नहीं है. नया शहर, जो ब्रिटिश छावनी था, 1956 के बाद मैसूर से कर्नाटक की राजधानी बना. 50 और 60 के दशक में यहां सार्वजनिक क्षेत्र का विकास हुआ. सार्वजनिक क्षेत्र में काम करने के लिए पूरे भारत से लोग यहां आए. उनके बच्चों को बहुत अच्छी शिक्षा मिली क्योंकि राजनीतिक नेताओं ने इंजीनियरिंग कॉलेज शुरू किए. यह रहने के लिए बेहतरीन जगह है और पूरा देश यहां आ गया. बेंगलुरु जिले में 1100 कॉलेज हैं.”

“आज बेंगलुरु में 1.3 करोड़ लोग हैं, जिनमें 26 लाख लोग तकनीक क्षेत्र में काम करते हैं. हमारे पास 1.2 करोड़ वाहन हैं, जिनमें 27 लाख कारें हैं. हर महीने हम 88,000 कारें और वाहन खरीदते हैं. हम 130 बिलियन डॉलर की सेवाओं का निर्यात करते हैं. ऐसा किसी अन्य शहर में नहीं है. ट्रैफिक के बावजूद बेंगलुरु जैसी जीवन गुणवत्ता किसी अन्य शहर में नहीं है. यहां आने वाला कोई भी व्यक्ति आसानी से नौकरी पा सकता है. और तकनीक क्षेत्र में लोग हर दो साल में नौकरी बदलकर 30-40 प्रतिशत अधिक कमा सकते हैं. देश में कहीं और ऐसा नहीं है.”

BW Businessworld ने उनसे केंद्र सरकार के साथ उनके संबंधों के बारे में पूछा. उन्होंने कहा: “मैं पिछले 25-30 वर्षों से सरकार से मिल रहा हूं. इंफोसिस में शामिल होने के बाद से और उससे पहले भी मैंने सभी सरकारों के साथ काम किया है. मैं उद्योग और देश के लिए मांग करता हूं, अपने या अपनी कंपनी के लिए नहीं. कोई व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं है. यह सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए है. हम पोजिशन पेपर तैयार करते हैं. मैं SEBI के साथ काम करता हूं. मैं RBI जाता हूं. मैंने वित्त मंत्री से कई बार मुलाकात की है. हम यह जारी रखेंगे क्योंकि हम सभी इकोसिस्टम को बेहतर बनाना चाहते हैं.”

जब उनसे पूछा गया कि बेंगलुरु के उद्योग जगत के नेता, जो नागरिक मुद्दों को भी उठाते हैं, क्या राजनीतिक रूप से जुड़े हैं, तो उन्होंने कहा: “हम राजनीतिक रूप से जुड़े नहीं हैं, चाहे हमारी व्यक्तिगत राजनीतिक राय कुछ भी हो. किरण (मजूमदार शॉ) और मैं, अन्य लोगों के साथ, 1997 से सरकार के साथ काम कर रहे हैं. हमने राज्य की पहली आईटी नीति लिखी. कई सरकारें आईं और हम सभी के साथ काम करते रहे. हमने जो भी मांगा और जो भी हमसे कहा गया, सभी मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों ने सहमति दी. अब तक किसी ने हमें ‘ना’ नहीं कहा. लेकिन जमीनी स्तर पर यह लागू नहीं होता. यही समस्या है. मेरे राज्य में यह जमीनी स्तर पर काम नहीं करता क्योंकि निचले स्तर के अधिकारी सुनते नहीं हैं.”

पाई, जो उत्तर प्रदेश की राज्य आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य हैं, कहते हैं कि हर राज्य में आर्थिक सलाहकार परिषद होनी चाहिए, जिसमें उद्योग जगत के लोग शामिल हों. “हर राज्य में उद्योग के लोगों से बनी आर्थिक सलाहकार परिषद होनी चाहिए, न कि वामपंथी सोच वाले अर्थशास्त्रियों से, क्योंकि वे नहीं समझते कि व्यवसाय कैसे चलता है. वे व्यवसाय के अनुकूल नहीं हैं और उनके पास समाधान भी नहीं हैं.”

पाई, जो एक निवेशक भी हैं, हर महीने लगभग 700 स्टार्टअप प्रस्ताव प्राप्त करते हैं. वे स्टार्टअप्स के लिए फंड जुटाना आसान बनाने की बात दोहराते हैं. वे कहते हैं: “हम प्रधानमंत्री से चाहते हैं कि अगले पांच वर्षों के लिए हर साल 50,000 करोड़ रुपये का फंड बनाया जाए. इसे वेंचर फंड्स और स्टार्टअप्स को उनकी वृद्धि के दौरान दिया जाना चाहिए. अगर यह पांच साल तक किया गया, तो हम अपनी सबसे बड़ी समस्या, विकास के लिए पूंजी की कमी को हल कर लेंगे, खासकर उस समय जब नवाचार तेजी से बढ़ रहा है और एआई आ रहा है. हमें पैसे की जरूरत है और हमारे पास पर्याप्त पैसा नहीं है. भारत में फंड जुटाना एक बड़ी समस्या है.”

सुमन के झा, BW रिपोर्टर्स
(लेखक BW Businessworld में पूर्व कार्यकारी संपादक और डिप्टी एडिटर हैं.)

 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

कविता में एक शोकगीत: मेरे मित्र और बैचमेट, हेमचंद सिरोही, IAS

केजे अल्फोंस लिखते हैं, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और बिहार के पूर्व राज्य चुनाव आयुक्त के रूप में, हेमचंद सिरोही को प्रशासनिक कुशलता, जन-केंद्रित शासन और जनसेवा में योगदान के लिए व्यापक सम्मान प्राप्त था. उनके योगदानों में महाबोधि मंदिर को यूनेस्को की विश्व धरोहर की मान्यता दिलाना और जमीनी स्तर पर विकास की पहल शामिल थीं.

4 days ago

दो दुनियाओं के बीच जिंदगी: उथल-पुथल भरे समय की चुनौती

लेखक के अनुसार, हमारे आसपास की दुनिया उतनी नहीं बदली है, जितनी हमारे दिमाग के भीतर की दुनिया बदल गई है. लगातार आती खबरों, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पैदा होने वाली चिंताओं के इस दौर में चुनौती है अपना ध्यान फिर से अपने नियंत्रण में लेना और उन चीजों पर फोकस करना, जिन्हें हम नियंत्रित कर सकते हैं.

4 days ago

कलाकार की अनंत रेखाएं: जोगेन चौधरी को श्रद्धांजलि

87 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले प्रख्यात कलाकार अपने पीछे ऐसी विशिष्ट कला छोड़ गए हैं, जो उनकी खास क्रॉस-हैचिंग शैली, असामान्य रेखाओं और गहराई से मानवीय चित्रों के लिए पहचानी जाती है.

5 days ago

समुद्र मंथन का अर्थशास्त्र: समृद्धि के लिए विरोधी शक्तियों की जरूरत क्यों है

लेखिका प्रियंका शर्मा कैंतुरा इस लेख में बताती हैं कि देवताओं, असुरों और लक्ष्मी के प्राकट्य की प्राचीन कथा प्रतिस्पर्धा, सहयोग और धन सृजन के बारे में क्या सीख देती है.

1 week ago

जेमी बीटन: असाधारण दिमाग और अरबों डॉलर के कारोबार के पीछे ज्योतिषीय गणना

क्रिमसन एजुकेशन के संस्थापक की शैक्षणिक महत्वाकांक्षा, उद्यमशीलता में उभार और 2027 की संभावनाओं का ज्योतिषीय विश्लेषण

1 week ago


बड़ी खबरें

दिल्ली में 1 नवंबर से BS-6 से पुराने वाहनों की नो एंट्री, जानें किन गाड़ियों को मिलेगी छूट

इस फैसले का असर दिल्ली से सटे हरियाणा के शहरों से आने वाले वाहनों पर भी पड़ेगा. खासतौर पर गुरुग्राम और फरीदाबाद से दिल्ली आने वाले वाहन चालकों को इस नियम का ध्यान रखना होगा.

1 day ago

सरदार पटेल के विचारों पर आगे बढ़ रहा भारत, रक्षा उत्पादन 1.80 लाख करोड़ रुपये के पार: राजनाथ सिंह

सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर भारत-भारती ने दिल्ली में आयोजित किया राष्ट्रीय समारोह, रक्षा मंत्री ने कहा- राष्ट्रीय एकता और अखंडता को चुनौती देने वाली ताकतों के खिलाफ देश एकजुट रहेगा

18 hours ago

तमिलनाडु में 5 लाख से अधिक ग्रामीण घरों को मिलेगा ब्रॉडबैंड कनेक्शन, केंद्र ने दी सब्सिडी को मंजूरी

संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत तमिलनाडु के 4,767 गांवों तक मांग के आधार पर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाई जाएगी. केंद्र की वित्तीय सहायता से ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट नेटवर्क का विस्तार और डिजिटल सेवाओं तक पहुंच आसान होगी.

1 day ago

सोना 4,200 रुपये और चांदी 10 हजार रुपये टूटी, एक साल के निचले स्तर पर पहुंचे भाव; जानें गिरावट की वजह

MCX पर चांदी करीब 5 फीसदी और सोना 3 फीसदी तक टूट गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई.

1 day ago

IDBI बेच रही थी LIC, उसी दौरान Fairfax की कंपनी के बोर्ड में भी रहे LIC के निदेशक

पूर्व नीति आयोग प्रमुख, RBI के डिप्टी गवर्नर, SEBI बोर्ड के सदस्य, रक्षा सचिव और LIC के चेयरमैन जैसे सार्वजनिक पदों पर रह चुके लोगों को Fairfax की भारतीय कंपनियों ने अपने साथ जोड़ा.

1 day ago