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वैश्विक लिक्विडिटी मजबूत, भारत में लौटी निवेशकों की दिलचस्पी; 7 हफ्तों बाद आया पॉजिटिव फ्लो

भारत-केंद्रित फंड्स में बिकवाली का दबाव कम हुआ है. साप्ताहिक आउटफ्लो 1.2 अरब डॉलर के उच्च स्तर से घटकर 180 मिलियन डॉलर रह गया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

वैश्विक बाजारों में निवेशकों का भरोसा बना हुआ है और इसका असर भारत पर भी दिखने लगा है. Elara Capital की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भू-राजनीतिक तनाव में कमी के बाद लगातार चौथे हफ्ते वैश्विक लिक्विडिटी मजबूत बनी हुई है. इसी बीच भारत में भी सात हफ्तों बाद पहली बार इक्विटी में शुद्ध निवेश (इनफ्लो) दर्ज किया गया है.

अमेरिका और ग्लोबल फंड्स में मजबूत निवेश

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक महीने में अमेरिकी इक्विटी बाजारों में हर हफ्ते 10 से 22 अरब डॉलर के बीच मजबूत निवेश देखने को मिला. ग्लोबल-मैंडेटेड फंड्स में भी पांच हफ्तों का उच्चतम स्तर दर्ज हुआ, जहां 16 अरब डॉलर का इनफ्लो आया. वहीं, ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट (GEM) फंड्स में हर हफ्ते 1 से 2 अरब डॉलर का स्थिर निवेश जारी रहा.

इमर्जिंग मार्केट ग्रोथ फंड्स में रिकॉर्ड इनफ्लो

इमर्जिंग मार्केट ग्रोथ फंड्स में 1.4 अरब डॉलर का साप्ताहिक रिकॉर्ड निवेश दर्ज किया गया. इसमें ताइवान आधारित निवेश रणनीतियों का बड़ा योगदान रहा. हालांकि, यूरोप और चीन में पिछले पांच हफ्तों से लगातार निवेशकों की निकासी (रिडेम्प्शन) जारी है, जो वहां के बाजारों पर दबाव बनाए हुए है.

भारत में 7 हफ्तों बाद लौटी पॉजिटिव फ्लो

भारत के लिए यह एक सकारात्मक संकेत रहा कि सात हफ्तों के बाद पहली बार शुद्ध निवेश देखने को मिला. एलोकेशन और डेडिकेटेड फंड्स के जरिए कुल 106 मिलियन डॉलर का नेट इनफ्लो दर्ज हुआ. इससे पहले लगातार छह हफ्तों में करीब 5 अरब डॉलर की निकासी हुई थी.

बिकवाली का दबाव घटा, लेकिन आउटफ्लो जारी

भारत-केंद्रित फंड्स में बिकवाली का दबाव कम हुआ है. साप्ताहिक आउटफ्लो 1.2 अरब डॉलर के उच्च स्तर से घटकर 180 मिलियन डॉलर रह गया. फिर भी, यह भारत-डेडिकेटेड रणनीतियों में लगातार नौवां हफ्ता रहा जब आउटफ्लो दर्ज किया गया.

ETF में निवेश बढ़ा, लॉन्ग-ओनली फंड्स में निकासी

भारतीय बाजार में ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) के जरिए 220 मिलियन डॉलर का निवेश आया. वहीं, लॉन्ग-ओनली फंड्स में 400 मिलियन डॉलर की निकासी जारी रही. अच्छी बात यह रही कि अमेरिकी फंड्स में 225 मिलियन डॉलर का इनफ्लो दर्ज हुआ, जबकि इससे पहले सात हफ्तों में 3.3 अरब डॉलर की निकासी हो चुकी थी. यह बाजार में स्थिरता के शुरुआती संकेत माने जा रहे हैं.

कमोडिटी बाजार में निवेश सुस्त

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि युद्ध के दौरान कमोडिटी आधारित शेयरों में निवेश घटा था और अब तनाव कम होने के बावजूद इसमें खास सुधार नहीं हुआ है. एनर्जी इक्विटी फंड्स में पिछले तीन हफ्तों से आउटफ्लो धीरे-धीरे कम हुआ है.

सोने में निवेश स्थिर हुआ है, लेकिन यह पहले की तुलना में धीमा है. वहीं, चांदी में जनवरी 2026 से ही कमजोरी बनी हुई है.

विश्लेषकों के अनुसार, निवेशक धीरे-धीरे जोखिम वाले एसेट्स की ओर लौट रहे हैं. भारत में निवेश प्रवाह का स्थिर होना बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है, खासकर तब जब विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव कम होता दिख रहा है.

वैश्विक स्तर पर बेहतर माहौल और घरेलू बाजार में घटती बिकवाली भारत के लिए राहत भरी खबर है. आने वाले समय में अगर यह रुझान जारी रहता है, तो भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो सकता है.
 


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