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कारोबार बन चुके पेपर लीक पर लगाम मुश्किल, लगातार असफल NTA को अभयदान क्यों?
नीट पेपर लीक के बाद सरकार और उसकी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की भूमिका सवालों के घेरे में है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
नीट पेपर लीक (NEET Paper Leak) ने कई गंभीर सवालों को जन्म दिया है, जिसमें सबसे प्रमुख तो यही है कि आखिर इसका जिम्मेदार कौन है? क्या पेपर हासिल करने वाला अनुराग यादव या पेपर की व्यवस्था करवाने वाला उसका फूफा सिंकदर यादवेंदु ही असली गुनाहगार हैं? पुलिस मामले जांच कर रही है और संभव है आने वाले दिनों में वो किसी नतीजे पर भी पहुंच जाए, लेकिन क्या इस अवैध सिस्टम की पूरी चेन को तोड़ने में वह सक्षम होगी? क्या इसके बाद कोई पेपर लीक नहीं होगा? यह पहली बार नहीं है जब कोई पेपर लीक हुआ है और संभवतः आखिरी भी नहीं होगा. क्योंकि पेपर लीक अब एक कारोबार का रूप अख्तियार कर चुका है. एक-एक पेपर लाखों में बिकता है. जितना बड़ा पेपर, उतनी बड़ी रकम. नीट का पेपर 30 से 32 लाख में बिका था.
5 साल में 41 लीक
पेपर लीक को अंजाम देने के लिए बाकायदा एक सिस्टम काम करता है, जिसमें ऊपर से लेकर नीचे तक कई मोहरे होते हैं. सिंकदर यादवेंदु तो महज एक मोहरा है, जिसने अपने भतीजे के लिए नीट पेपर की सेटिंग कराई. असल गुनाहगार तो वह हैं, जिन्होंने आंखें मूंदकर पेपर लीक होने दिया. जब तक ऐसे लोगों के चेहरे सामने नहीं आते, कुछ बदलने वाला नहीं है. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, गुजरात, बिहार, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, असम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर में पिछले 5 साल में 41 भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं. हर बार कुछ देर के लिए शोर मचता है और फिर खामोशी छा जाती है.
बहुत गहरी हैं जड़ें
केवल प्रतियोगी परीक्षाएं ही नहीं, निचले स्तर पर भी पेपर लीक महामारी बना हुआ है. चूंकि नीट बड़ी परीक्षा है, इसलिए मामला भी इतना बड़ा हो गया है. इस साल के शुरुआती महीने में यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा में बड़ी गड़बड़ी सामने आई थी. इसके बाद लगातार परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामले सामने आ रहे हैं. नीट मामले की जांच में यह भी सामने आया है कि यादवेंदु यादव एक रैकेट के संपर्क में था, जिसने ना केवल NEET बल्कि बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षाओं के प्रश्न पत्र भी लीक किए थे. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पेपर लीक के कारोबार की जड़ें कितनी गहरी हैं.
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सवालों में NTA
नीट मामले में सरकार और उसकी एजेंसी NTA सवालों के घेरे में हैं. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का गठन इसलिए किया गया था, ताकि प्रवेश परीक्षाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ कराया जा सके, NTA इस काम में लगातार विफल रही है. बीते 9 दिन में NTA की तीन बड़ी परीक्षाएं रद्द या स्थगित हो चुकी हैं. नेशनल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट की परीक्षा 12 जून को दोपहर में हुई थी. शाम को इसे रद्द कर दी. इसी तरह, UGC-NET की 18 जून को परीक्षा ली गई थी और 19 जून को रद्द कर दी गई. सीएसआईआर-यूजीसी-नेट का एग्जाम 25 जून से होना था, लेकिन इसे टाल दिया गया है. यह दर्शाता है कि NTA अपने काम को लेकर कितना सजग और सतर्क है.
कब बनी NTA?
NTA नवंबर 2017 में अस्तित्व में आया था. दरअसल, मानव संसाधन विकास मंत्रालय उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए एकल, स्वायत्त और स्वतंत्र एजेंसी चाहता था, ताकि प्रवेश परीक्षाओं को दोषमुक्त बनाया जा सके. इसी के तहत नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को अमल में लाया गया. हालांकि, शुरुआत से ही यह संस्था सवालों में रही. वर्ष 2019 में JEE मेंन्स के दौरान छात्रों को परेशान होना पड़ा. वजह थी सर्वर में खराबी. कुछ जगहों पर प्रश्न पत्र देरी से मिलने की भी शिकायतें की गईं. इसी तरह, NEET अंडरग्रेजुएट मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम 2020 को लेकर भी NTA पर सवाल उठे. अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने के बाद एग्जाम को कई बार स्थगित करना पड़ा. इस साल नीट का पेपर लीक हो गया. जबकि UGC-NET की परीक्षा भी रद्द की जा चुकी है.
Edutest पर विश्वास?
NTA की स्थापना से अब तक केवल 2 बार यानी 2018 और 2023 में पेपरलीक और गड़बड़ी जैसी शिकायतें नहीं मिलीं. वरना हर साल कुछ न कुछ सामने आता रहा. इसके बावजूद भी सरकार का NTA को लेकर कोई सख्त कदम न उठाना उसकी भूमिका को भी कठघरे में खड़ा करता है. यहां एक गौर करने वाली बात यह भी है कि NTA के अस्तित्व में होने के बावजूद एजूटेस्ट (Edutest) जैसी प्राइवेट कंपनी को परीक्षा आयोजित करवाने की जिम्मेदारी क्यों दी जाती रही है. यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा इसी कंपनी ने आयोजित करवाई थी. क्या इसका ये मतलब निकाला जाए कि यूपी सरकार को केंद्र की इस एजेंसी का भरोसा नहीं है या फिर उसे एजूटेस्ट इस काम के लिए ज्यादा काबिल लगी?
कई एग्जाम करवाए
पुलिस भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हो गया था, जिसमें Edutest की भूमिका सवालों के घेरे में थी. यूपी एसटीएफ की कई महीनों की जांच के बाद योगी सरकार ने अहमदाबाद की एजूटेस्ट (EDUTEST) को ब्लैक लिस्ट कर दिया. यानी एजूटेस्ट को अब प्रदेश में दोबारा किसी भी विभाग की भर्ती परीक्षा कराने का जिम्मा नहीं दिया जाएगा. एसटीएफ ने एजूटेस्ट कंपनी के संचालक विनीत आर्या को चार बार नोटिस भेजकर बयान देने के लिए बुलाया, लेकिन वह एक बार भी नहीं आया. बताया जा रहा है कि वो अमेरिका चला गया है. एजुटेस्ट की स्थापना 1982 में की गई थी. कंपनी UPSSSC PET और CAT जैसे कई एग्जाम करा चुकी है. एजुटेस्ट सॉल्यूशंस ने UPSSSC PET 2022 के लिए पेपर तैयार किया था. कंपनी का दावा है कि वो हर साल 50 मिलियन से ज्यादा परीक्षाएं आयोजित करवाती है.
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