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समाधान की ओर बढ़ रही ईरान की परमाणु डील! खबरों से कच्चा तेल और टूटा

अमेरिकी White House ने बताया कि अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस जर्मनी के नेताओं के बीच 2015 के ईरान परमाणु डील को फिर से जीवित करने को लेकर चर्चा हुई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

नई दिल्ली: कच्चे तेल में अचानक ही तेज गिरावट देखने को मिल रही है, दरअसल खबरें आ रही हैं कि ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बर्फ पिघल रही है और पश्चिमी एशियाई देशों के ऊपर से क्रूड सप्लाई को लेकर लगे प्रतिबंधों को हटाया जा सकता है. इस खबर के बाद ही अमेरिकी क्रूड बेंचमार्क WTI Futures 1 परसेंट तक टूटकर $89.39 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि लंदन का ब्रेंट ऑयल फ्यूचर 0.5% गिरकर $95.59 तक चला गया था. 

ईरान के साथ समझौते की खबरें
कतर की समाचार संस्था अल जज़ीरा के मुताबिक ईरान परमाणु समझौता बेहद करीब है, अमेरिकी White House ने बताया कि अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस जर्मनी के नेताओं के बीच 2015 के ईरान परमाणु डील को फिर से जीवित करने को लेकर चर्चा हुई है. White House के मुताबिक- उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चल रही बातचीत, मिडिल-ईस्ट क्षेत्र में भागीदारों के लिए समर्थन को मजबूत करने की जरूरत और ईरान की अस्थिर क्षेत्रीय गतिविधियों को रोकने और बाधित करने के संयुक्त प्रयासों पर चर्चा की. जबकि कुछ और न्यूज रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि तेहरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को अमेरिकी विदेश विभाग की विदेशी आतंकवादी संगठनों की लिस्ट से हटाने की मांग को छोड़ने पर राजी हो गया है. दरअसल, ये मांग अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का एक अहम मुद्दा था, ईरान अपनी मांग पर अड़ा था और अमेरिका उसकी मांग को मानने को राजी नहीं था, जिसके चलते दोनों के बीच सुलह का रास्ता नहीं बन पा रहा था, जिसकी कोशिश यूरोपियन यूनियन की ओर से की जा रही थी. आपको बता दें कि 2018 में, तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पदभार संभालने से पहले हुए परमाणु समझौते से इनकार कर दिया, उन्होंने इसे ईरान के लिए बहुत नरम बताया था. उन्होंने नए सिरे से कठोर अमेरिकी प्रतिबंधों को फिर से लागू किया, जिससे ईरान ने यूरेनियम संवर्धन पर अपनी सीमा का उल्लंघन करना शुरू कर दिया.

ईरान से हटेंगे प्रतिबंध
अल जज़ीरा के मुताबिक इस डील के होने के बाद 17 ईरानी बैंकों और 150 वित्तीय संस्थाओं पर से प्रतिबंध हट जाएगा. तेहरान को भी इस डील के होने के बाद चार महीनों में रोजाना 5 करोड़ बैरल कच्चा तेल एक्सपोर्ट करने की इजाजत मिल जाएगी. इस कदम से मार्केट में रोजाना 10 लाख बैरल कच्चा तेल सप्लाई होगा, जिसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिल सकती है. ऐसे में ये कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर ये डील होती है तो OPEC उत्पादन में कटौती कर सकता है, पिछले हफ्ते OPEC की ओर से सप्लाई घटाने की खबरें मार्केट में आईं थीं, जिसके चलते कच्चा तेल थोड़ा मजबूत हुआ था. 

$70 तक जाएगा कच्चा तेल: Moody's
कच्चा तेल पहले ही ग्लोबल मंदी की चिंताओं के चलते 6 महीने के निचले स्तर तक लुढ़क गया है. दो महीने में कच्चा तेल 30% तक कमजोर हुआ है, एक महीने में इसके भाव करीब 18 परसेंट तक कमजोर हुए हैं. 7 अगस्त 2022 को कच्चा तेल 92 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसल गया था. कच्चा तेल की कीमतें कहां जाएंगी, इसे लेकर कई रेटिंग एजेंसीज ने अपने अनुमान भी जारी किए हैं. इसी महीने Moody's Analytics की ओर से अनुमान जारी किया गया है कि कच्चा तेल साल 2024 के अंत तक 70 डॉलर प्रति बैरल तक नीचे आ सकता है. इसके पहले जुलाई में Citigroup ने भी अनुमान जारी कर बताया था कि कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल तक फिसल सकता है, जबकि 2022 के आखिर तक कच्चे तेल के दाम 65 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकते हैं और 2023 के आखिर तक दाम घटकर 45 डॉलर प्रति बैरल तक फिसल सकते हैं.

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