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अक्टूबर तक होती रहेगी इस साल मूसलाधार बारिश, इसके बाद भी 223 जिलों में क्यों पड़ा सूखा?

भारतीय मौसम विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार मानसून के इस बार अक्टूबर तक सक्रिय रहने की संभावना है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

नई दिल्लीः देश भर में आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून सितंबर के मध्य तक विदाई ले लेता है और उसके बाद गुलाबी ठंड का मौसम शुरू हो जाता है. लेकिन इस साल ऐसा कुछ नहीं होगा. भारतीय मौसम विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार मानसून के इस बार अक्टूबर तक सक्रिय रहने की संभावना है. जहां एक तरफ कई राज्यों में बारिश असमान्य तौर पर बहुत ज्यादा हुई है और बाढ़ के हालात हैं, वहीं देश के 223 जिलों में इस बार सूखे की विभिषका से जूझ रहे हैं. 

जून सूखा रहा, 2 जुलाई से देश भर में बारिश शुरू

इस साल जून के महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश न के बराबर हुई. वहीं मौसम विभाग का कहना है कि 2 जुलाई से पूरे देश में मानसून ने अपने कदम रख दिए थे. हालांकि इस बार मानसून के पैटर्न में काफी बदलाव देखा गया है. ऐसे राज्यों में इस बार ज्यादा बारिश हो रही है, जहां पहले ये बहुत कम होती थी. उदाहरण के लिए राजस्थान और गुजरात. वहीं दूसरी ओर यूपी, बिहार, बंगाल जैसे राज्यों में बारिश का औसत न के बराबर है. पिछले तीन वर्षों में ला नीना और आर्कटिक क्षेत्र के गर्म होने से गर्मियों के मानसून की वापसी में देरी होने कीऔर इसके बजाय, भारी वर्षा होने की संभावना है. 

कई जिलों में बदल गया है पैटर्न

पिछले दो हफ्तों में कई जिलों में बारिश के पैटर्न में अत्यधिक बदलाव आया है. 10 अगस्त से 17 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह में कम से कम 163 जिलों में अधिक वर्षा से कम वर्षा हुई. ये पैटर्न तमिलनाडु, दक्षिण भारत के अन्य हिस्से, उत्तराखंड, बंगाल और हरियाणा जैसे राज्यों के जिलों में देखा गया. वहीं इसी अवधि के दौरान, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और ओडिशा के 167 जिलों में कम से अधिक वर्षा हुई. Climate change की वजह से यह पैटर्न इस बार देखने को आया है, जिससे मौसम वैज्ञानिक भी हैरान हैं. 

11-17 अगस्त तक, बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और केरल में बहुत कम या बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई और  60-90 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. इसी अवधि में, उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में 98 प्रतिशत वर्षा की कमी देखी गई. उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर में 100 फीसदी, बिजनौर में 98 फीसदी और शाहजहांपुर में 92 फीसदी की कमी थी. इसी तरह बिहार में पूर्वी चंपारण में 93 फीसदी, अररिया में 92 फीसदी, मधुबनी में 89 फीसदी और बेगूसराय जिले में 91 फीसदी बारिश कम हुई.
 
पिछले तीन महीनों में उत्तरी और पूर्वी राज्यों जैसे मणिपुर, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के साथ-साथ दक्षिण में केरल में औसत से कम बारिश हुई है. 

इन राज्यों में कम वर्षा का चार्ट

कम वर्षा वाले राज्य (1 जून-अगस्त 18, 2022) राज्य वास्तविक (मिलीमीटर) सामान्य अंतर  मणिपुर 435.6 741.8 -41% त्रिपुरा 697.4 1002.7 -30% पश्चिम बंगाल 707.1 914.5 -23% झारखंड 426.6 689.8 -38% बिहार 389.9 666.9 -42% उत्तर प्रदेश 271.6 504.5 -46% केरल 1287.4 1603.7 -20% दिल्ली 292.4 369.7 -21% स्रोत: आईएमडी

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

इन राज्यों में औसत से अधिक बारिश

इस समय अवधि में दक्षिणी और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में अत्यधिक वर्षा हुई है, जिसमें तेलंगाना में सामान्य से 68 प्रतिशत अधिक औसत वर्षा (819.3 मिमी), तमिलनाडु में सामान्य से 71 प्रतिशत अधिक (287.3 मिमी) और कर्नाटक में 30 प्रतिशत (774.8 मिमी) हुई. राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में भी वर्षा औसत क्रमशः 49 प्रतिशत (471.3 मिमी), 42 प्रतिशत (734.2 मिमी) और 30 प्रतिशत (923.3 मिमी) अधिक रहा है. लक्षद्वीप और लद्दाख में भी वर्षा औसत से क्रमशः 23 प्रतिशत (917.6 मिमी) और 64 प्रतिशत (25.6 मिमी) अधिक बारिश हुई है.  

बाढ़ के बावजूद सामान्य

वहीं 14 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में इस मॉनसून में सामान्य बारिश हुई है. इनमें अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मिजोरम, ओडिशा, हरियाणा, पंजाब, जम्मू और कश्मीर, गोवा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश,  पुडुचेरी और सिक्किम शामिल हैं. 

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