होम / एक्सप्लेनर / Foreign Trade Policy में क्या बदलाव ला रही है सरकार?
Foreign Trade Policy में क्या बदलाव ला रही है सरकार?
नई विदेश व्यापार नीति (FTP) कई मायनों में पिछली व्यापार नीति से अलग है. इसका लक्ष्य देश के निर्यात को सस्ता और आसान बनाना है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई विदेश व्यापार नीति (FTP) एक अप्रैल से लागू हो गई है. नई FTP पुरानी नीति से काफी अलग है. इस नीति का उद्देश्य 2030 तक देश के निर्यात को 2 ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ाना है. पिछली विदेश व्यापार नीति का टाइम फ्रेम संशोधनों के साथ 5 साल था. जबकि नई नीति ओपन एंडेड है - इसमें आवश्यकतानुसार संशोधन किए जाएंगे और यह किसी डेट से भी लिंक नहीं है. यानी इसकी कोई विशिष्ट अंतिम तिथि नहीं है.
नई रिजीम पर फोकस
नई विदेश व्यापार नीति का मकसद कारोबार को इंसेटिव यानी प्रोत्साहन वाली रिजीम से हटाकर छूट और पात्रता आधारित रिजीम पर शिफ्ट करना है. इस FTP का मुख्य दृष्टिकोण चार स्तंभों पर आधारित है- छूट के लिए प्रोत्साहन, सहयोग के माध्यम से निर्यात प्रोत्साहन, व्यापार करने में आसानी और उभरते क्षेत्र. पिछली FTP में निर्यातकों को उनके प्रदर्शन के आधार पर पुरस्कृत करने पर जोर था. ये रिवॉर्ड ट्रांसफरेबल स्क्रिप के रूप में था. इनका इस्तेमाल सीमा शुल्क के भुगतान के लिए किया जा सकता है. निर्यात को बढ़ावा देने के इस तरीके पर लगातार बहस हो रही थी. नई नीति में सरकार ने इस बहस पर लगाम लगाने के प्रयास किया है.
WTO के अनुरूप
नई नीति में रिवॉर्ड योजनाओं को खत्म करके कारोबार को छूट और पात्रता आधारित रिजीम पर शिफ्ट करने की कोशिश की गई है. इसका मतलब यह हुआ कि सरकार माल के निर्माण और निर्यात में उपयोग किए जाने वाले इनपुट पर भुगतान किए गए टैक्स को रिफंड कर देगी. इस प्रकार निर्यात उत्पाद योजना पर शुल्कों और करों की छूट (RoDTEP) और विभिन्न उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं की शुरुआत की गई है. ये बेहद लोकप्रिय, टाइम-टेस्टेड ड्रॉबैक योजनाएं हैं, जो सभी विश्व व्यापार संगठन (WTO) के अनुरूप हैं और आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करती हैं.
बनेंगे 4 नए TTE
नई विदेश व्यापार नीति में चार नए एक्सपोर्ट टाउन (TEE) विकसित करने का लक्ष्य रखा है. मौजूदा समय में देश में 39 TEE हैं. अब फरीदाबाद, मुरादाबाद, मिर्जापुर और वाराणसी के रूप में चार नए TEE विकसित किए जाएंगे. नई नीति भारतीय करेंसी को ग्लोबल करेंसी बनाने का लक्ष्य लेकर भी चल रही है. इसका मकसद रुपए को इंटरनेशनल ट्रेड सेटलमेंट में इस्तेमाल करना है, ताकि करेंसी एक्सचेंज के रूप में दी जाने वाली भारी-भरकम शुल्क से बचा जा सके.
इस तरह मिलेगा फायदा
नई नीति का फोकस निर्यात को अधिक से अधिक सस्ता बनाना है. क्योंकि ऐसा करके निर्यात को बढ़ावा दिया जा सकेगा. एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए राज्यों के साथ जिलों में भी निर्यात के लिए कदम उठाए जाएंगे. जानकार मानते हैं कि सहयोग के माध्यम से निर्यात को प्रोत्साहन देना स्वागत योग्य कदम है. इससे राज्यों को भी अहसास होगा कि निर्यात उनके विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है. नई FTP का ई-कॉमर्स और एक्सपोर्ट हब जैसे उभरते क्षेत्रों पर फोकस करेगा. एफटीपी में पहचाने गए उभरते क्षेत्र ई-कॉमर्स निर्यात पर केंद्रित हैं. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ई-कॉमर्स निर्यात क्षमता व्यापक है. इसके 2030 तक 200 बिलियन डॉलर से 300 बिलियन डॉलर के बीच रहने का अनुमान है. जिसका फायदा उठाना अब भारत के लिए आसान होगा.
होंगे क्रांतिकारी बदलाव
नई नीति के तहत कूरियर सेवाओं के माध्यम से निर्यात की वैल्यू लिमिट 5 लाख रुपए प्रति खेप से बढ़ाकर 10 लाख कर दी गई. जानकार मानते हैं कि नई नीति से MSMEs के विकास में भी क्रांतिकारी बदलाव होंगे. सरकार पहले से ही कई देशों से ट्रेड एग्रीमेंट्स कर रही है. इसके साथ ही कनाडा के साथ FTA पर भी बातचीत चल रही है. नई विदेश व्यापार नीति के तहत पहले चरण के लिए 2200-2500 करोड़ की योजना तैयार की गई है. इस विदेश व्यापार नीति 2023 को समय-समय पर जरूरत के हिसाब से अपडेट किया जाएगा. FTP ई-कॉमर्स हब और संबंधित तत्वों जैसे Payment Reconciliation, Book-Keeping, Returns Policy और Export Entitlements की स्थापना के लिए एक रोडमैप की बात करती है. मर्चेंटिंग ट्रेड, जिसमें भारतीय मध्यस्थ से जुड़े भारतीय बंदरगाहों से गुजरे बिना एक देश से दूसरे देश माल भेजना शामिल है, अब संभव हो सकेगा.
टैग्स