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भारतीय स्टार्टअप के सामने हैं 2 बड़ी चुनौतियां, इन 4 सवालों के होने चाहिए जवाब

वाधवानी फाउंडेशन ने विश्व उद्यमी दिवस 2022 के अवसर पर भारत में उद्यमिता को बढ़ावा देने का आवाहन किया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्ली: हर साल 21 अगस्त को विश्व उद्यमी दिवस मनाया जाता है. यह उद्यमिता और लीडरशिप के लिए इनोवेशन और वैश्विक प्रगति के सम्मान का अवसर होता है. आज इसके प्रमाण हैं कि अधिक सक्षम उद्यम जो ज्यादा रोजगार देते हैं इनोवेशन और जोखिम लेने की संस्कृति से उत्पन्न होते हैं. उद्यमिता से नौकरी ढूंढ़ने वालों की तुलना में रोजगार देने वालों की संख्या बढ़ती है. यह भारत के आर्थिक विकास का अत्यावश्यक और बुनियादी पहलू है.

उद्यमी ओलंपिक खिलाड़ी की तरह होते हैं
वाधवानी फाउंडेशन के अध्यक्ष और सीईओ डॉ. अजय केला ने विश्व उद्यमी दिवस पर कहा, "उद्यमी ओलंपिक खिलाड़ी की तरह होते हैं; जो खुद बहुत कठिन दौर से गुजरते हैं और फिर संपत्ति और रोजगार पैदा कर अपनी टीम और देश का गौरव बढ़ाते हैं. विश्व उद्यमी दिवस पर हम पूरी दुनिया के उद्यमियों का नमन करते हैं."

इकोसिस्टम का तेजी से विकास
उन्होंने कहा, "डिजिटलीकरण और वैश्वीकरण के दौर में उद्यमी के अनुकूल इकोसिस्टम का तेजी से विकास हुआ है. एक दशक से भी कम समय में भारत स्टार्टअप्स और उद्यमियों का अग्रणी राष्ट्र बन गया है. आज देश में 100 से अधिक यूनिकॉर्न हैं और अगले तीन वर्षों में अन्य 100 यूनिकॉर्न बनने की उम्मीद है. भारत में स्थापित और मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की कुल संख्या आज 73 हजार है. भारत के अलावा, ब्राजील, मैक्सिको, सिंगापुर, इंडोनेशिया और अन्य देश भी उत्साहवर्धक स्टार्टअप इकोसिस्टम बना रहे हैं. स्टार्टअप्स के दृष्टिकोण से हम अब तक के सबसे बेहतरीन दौर में हैं. हम चाहते हैं कि वे अधिक सबल बन कर दुनिया की बढ़ती युवा आबादी को रोजगार दें."

दो बड़ी चुनौतियां 
भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम 2021 में तेजी से आसमान छूते हुए दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम बन गया. इसने 2020 में कुल फंडिंग के मुकाबले 3 गुनी वृद्धि दर्ज की. हालांकि इस शानदार प्रदर्शन के बावजूद भारतीय स्टार्टअप के सामने दो बड़ी चुनौतियां बनी हुई है:

(1) भारत के कई यूनिकॉर्न के पास आमदनी का ठोस आधार नहीं है और उन्हें कार्यरत रहने के लिए नकद का प्रवाह चाहिए.

(2) उनके लिए जरूरी है टेक्नोलॉजी और प्लैटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, घरेलू पूंजी निवेश के लिए सही नीतियां और सहयोग, टियर 2 और टियर 3 शहरों में निवेश का अनुकूल माहौल, हर राज्य में इनक्यूबेटर बनाने के लिए प्रोत्साहन, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर कर में छूट और फिर स्टार्टअप इन्फ्रास्ट्रक्चर पर अधिक ध्यान देना.

गेम चेंजर
वाधवानी फाउंडेशन के मुख्य परिचालन अधिकारी (भारत/द.पू. एशिया) संजय शाह ने कहा, "वाधवानी फाउंडेशन में हमारा प्रयास उद्यमियों को सहयोग देना है क्योंकि वे रोजगार सृजन करेंगे जिसका विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर महत्वपूर्ण और सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. वे सही मायनों में गेम चेंजर हैं जो निरंतर कुछ नया करते हैं और बड़ी संख्य में लोगों का उत्थान कर प्रगति करते हैं. विश्व उद्यमी दिवस के अवसर पर मैं उद्यमियों से अपील करता हूं कि ग्रीन टेक्नोलॉजी (इलेक्ट्रिक वाहन, पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, पुनर्चक्रण और कचरा प्रबंधन आदि) जैसे उभरते क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करें क्योंकि इससे सस्टेनेबलिटी के स्पष्ट लाभ मिलने के साथ-साथ भारत स्वच्छ अर्थव्यवस्था अपना कर 2070 तक 50 मिलियन रोजगार सृजन करने में सक्षम होगा."

4 सवालों के होने चाहिए जवाब
भारत में निस्संदेह स्टार्टअप्स का एक खुशहाल और जानदार इकोसिस्टम है. देश के उद्यमी और उद्यमी बनने के इच्छुक सबसे अच्छे और प्रतिभाशाली लोग दोनों के दृष्टिकोण से भारत ऊंचे मुकाम पर है. हालांकि स्टार्टअप नाकाम भी होते हैं, शुरुआती फेज में स्टार्टअप्स को सावधानी से खर्च करना, ग्राहक पर ध्यान केंद्रित रखना और चुनौतियों को दूर करने पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है. इसके अलावा स्टार्टअप्स के पास निम्नलिखित सवालों के स्पष्ट जवाब होने चाहिए:

A. किसी समाधान का इकाई अर्थशास्त्र कैसे काम करता है?
B. समाधान तैयार करने की लागत क्या है?
C. उस कठिन परिश्रम (दर्द) के लिए ग्राहक क्या भुगतान करने को तैयार हैं?
D. लक्षित बाजार कितना बड़ा है?

भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम की साल-दर-साल वृद्धि का अनुमान 12-15 प्रतिशत है. हालांकि यह वृद्धि निरंतर हो इसके लिए स्टार्टअप को इकोसिस्टम में सक्षमता बढ़ाने वाले और बाजार को बढ़ावा देने वाले पहलुओं जैसे कि एक्सेलेरेटर, इन्क्यूबेटर्स, वेंचर कैपिटलिस्ट, एंजल इनवेस्टर्स, सपोर्ट ग्रुप्स, टेक्नोलॉजी कॉरपोरेशन और मेंटर्स के कदम-से-कदम मिला कर चलना होगा.
 


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