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In Depth: ऊंची उड़ान भरने वाली Go First आखिर कैसे आ गई जमीन पर?

एविएशन सेक्टर में बीते कुछ समय में काफी कुछ हुआ है. जेटएयरवेज उड़ान नहीं भर पा रही है. वहीं, गो फर्स्ट आसमान से जमीन पर आ गई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

गो फर्स्ट एयरलाइन (Go First Airline) आखिरकार बिकने जा रही है. इस एयरलाइन ने आर्थिक परेशानियों के चलते इसी साल 3 मई को उड़ानें बंद कर दी थीं और तब से अब तक उसके विमान जमीन पर ही खड़े हैं. कुछ साल पीछे जाकर देखें, तो गो फर्स्ट के लिए सबकुछ अच्छा था. भारतीय आकाश में कंपनी अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही थी, लेकिन फिर एकदम से सबकुछ बदलता चला गया और आज Go First बिकने वाली है. जिंदल पवार और जेटविंग्स एयरवेज सहित कुछ कंपनियां गो फर्स्ट को अपना बनाने की दौड़ में शामिल हैं. 

कोरोना लाया मुश्किलों का समुंदर
Go First के लिए कोरोना महामारी मुश्किलों का समुंदर लेकर आई. कंपनी धीरे-धीरे इस समुंदर में डूबती चली गई. उसने इससे बाहर निकलने की तमाम कोशिशें की, लेकिन सफल नहीं हुई. कंपनी को एक साथ कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ा. एविएशन सेक्टर में बढ़ती प्रतियोगिता, ज्यादा से ज्यादा यात्रियों को आकर्षित करने के लिए प्राइज वॉर में उलझना उसकी मुश्किलों को बढ़ाता चला गया. गो फर्स्ट देश की पांचवीं सबसे बड़ी एयरलाइन है और 2020 के पहले तक कंपनी धीरे-धीरे विस्तार की रणनीति पर आगे बढ़ रही थी, मगर उसके बाद सबकुछ पलट गया.

खराब विमानों ने पूरी की कसर
कोरोना संकट ने टूर्स एंड ट्रेवल इंडस्ट्री को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया था. ऐसे में पहले से ही आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियों का सामना कर रहीं, कंपनियों के लिए खुद को बचाए रखना कठिन हो गया था. Go First की स्थिति ठीक थी, लेकिन दूसरी एयरलाइन्स के मुकाबले वह बैकफुट पर थी. कोरोना ने उसकी आर्थिक कमर पर बोझ बढ़ा दिया और रही सही कसर खराब विमानों ने पूरी कर दी. आकाश में जब हवाई जहाजों की आवाजाही शुरू हुई, तो कंपनी इसका पूरा लाभ नहीं उठा सकी, क्योंकि उसके कई विमान उड़ान भरने की स्थिति में नहीं थे. इसने गो फर्स्ट के लिए हालात को बद से बदतर कर दिया.  

इस तरह बिगड़ती गई स्थिति 
गो फर्स्ट की तरफ से कहा गया था कि प्रैट एंड व्हिटनी ने इंजनों की आपूर्ति समय पर नहीं की, जिसकी वजह से उसे काफी नुकसान उठाना पड़ा. जाहिर है जब फ्लाइट ही नहीं चलेंगी, तो पैसा कहां से आएगा. गो फर्स्ट को बकाया राशि का भुगतान नहीं करने के चलते लीज पर लिए गए विमानों को वापस करना पड़ा. कंपनी की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए ईंधन कंपनियों ने उसे कैश एंड कैरी वाले वर्ग में रख दिया. जिसका मतलब है हर दिन उड़ान के लिए ईंधन का भुगतान, जो कंपनी के लिए मुमकिन नहीं था. Go First ने अपने हाल के लिए सीधे तौर पर अमेरिकी कंपनी प्रैट एंड व्हिटनी को जिम्मेदार ठहराया था. प्रैट एंड व्हिटनी विमानों के इंजन बनाती है और इस मामले में दुनिया की लीडिंग कंपनी है. 

Pratt & Whitney पर लगे आरोप
गो फर्स्ट का कहना था कि अमेरिकी फर्म ने ऑर्डर के मुताबिक इंजन नहीं दिए, जिसके चलते उसके बेड़े के 50% विमानों का परिचालन ठप रहा. यानी वो उड़ान भरने की स्थिति में नहीं रहे. आरोपों के मुताबिक, Pratt & Whitney (P&W) की तरफ से इंजन की सप्लाई लगातार प्रभावित रही. गो फर्स्ट ने उसे 27 अप्रैल, 2023 तक कम से कम 10 स्पेयर लीज्ड इंजन और 10 अतिरिक्त इंजन देने को कहा था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया. इतना ही नहीं. उसकी ओर से भेजे जा रहे इंजनों के विफल होने की संख्या बढ़ती रही. नतीजतन उड़ानें बंद करनी पड़ीं. गो फर्स्ट के बेड़े में लगभग 90% प्रैट एंड व्हिटनी के इंजन वाले A320 नियो विमान हैं. स्पेयर पार्ट्स की अनुपलब्धता और P&W की ओर से रेट्रो फिटेड इंजनों की आपूर्ति में देरी के कारण कई विमानों को सेवा से बाहर करना पड़ा था. बता दें अपनी बिगड़ती स्थिति को देखते हुए कंपनी ने खुद ही नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में वॉलेंटरी इनसॉल्वेंसी प्रॉसीडिंग के लिए एप्लिकेशन दी थी.
 


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