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मुश्किल में Bharat: युद्ध की आंच, Qatar से टेंशन बिगाड़ न दे कारोबारी सेहत

इजरायल-हमास युद्ध के बीच भारत के लिए कतर से भी टेंशन वाली खबर आ गई है. यदि कतर से तनाव बढ़ता है, तो कारोबारी रिश्ते प्रभावित हो सकते हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

भारत इस समय मुश्किल दौर से गुजर रहा है. एक तरफ इजरायल-हमास युद्ध (Israel-Hamas War) ने उसकी टेंशन बढ़ाई हुई है. वहीं, अब कतर (Qatar) भी उसके लिए परेशानी बन रहा है. भारत के इजरायल के साथ-साथ कतर से भी कारोबारी संबंध है. इजरायल-हमास जंग का असर भारत के शेयर बाजार पर देखने को मिल रहा है. विदेशी निवेशक बिकवाल बने हुए हैं और बाजार लगातार गोते लगा रहा है. एक रिपोर्ट बताती है कि बाजार में गिरावट के कारण महज 6 दिनों में ही निवेशकों के 20 लाख करोड़ रुपए डूब गए हैं. बात केवल शेयर बाजार तक ही सीमित नहीं है, इस जंग ने कच्चे तेल की कीमत के भड़कने की आशंका को जन्म दिया है. यदि युद्ध में ईरान जैसे दूसरे देश भी शामिल होते हैं, तो हालात काफी खराब हो जाएंगे.  

अच्छे रहे हैं दोनों के संबंध
उधर, कतर की एक अदालत ने 8 पूर्व भारतीय नौसैनिकों को मौत की सजा सुनाई है. इन भारतीयों को अगस्त 2022 में गिरफ्तार किया गया था. आरोप के स्पष्ट रूप से खुलासा किए बिना ही उन्हें मौत की सजा सुना दी गई है. भारत कतर से आई इस खबर से पूरी तरह हैरान है, क्योंकि दोनों देशों के रिश्ते काफी अच्छे रहे हैं. इस मुस्लिम देश ने कई मौकों पर भारत का साथ दिया है और भारत भी समय-समय पर उसकी मदद करता रहा है. चूंकि ये मामला बेहद गंभीर है, इसलिए इसके परिणाम भी बेहद गंभीर हो सकते हैं. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि दोनों देशों के बीच तनाव का असर कारोबार पर भी पड़ सकता है.   

कौन, क्या मंगवाता है?
भारत और कतर कुछ मामलों में एक-दूसरे पर निर्भर हैं. भारत अपने कुल LNG आयात का 40 से 50 फीसदी कतर से मंगाता है. जबकि कतर के कुल एलएनजी निर्यात में भारत की 15% हिस्सेदारी है. कतर के लिए भारत एक करीबी कारोबारी दोस्त रहा है. साल 2016 में कतर ने भारत के लिए LNG के दाम में 50% से अधिक की कटौती की थी. भारत कतर से नैचुरल गैस, इथेनॉल, LPG, उर्वरक, रसायन-पेट्रोकेमिकल्स, प्लास्टिक और एल्युमीनियम आदि खरीदता है. वहीं कतर भारत से प्रमुख तौर पर अनाज, सब्जियां, तांबा, लोहा और इस्पात, निर्माण सामग्री, प्लास्टिक उत्पाद, कपड़े गारमेंट्स मंगवाता है. खासतौर पर कतर के लिए भारत का गेहूं महत्वपूर्ण है. 

ऐसा रहा है आयात-निर्यात
दोनों देशों के बीच कारोबार की बात करें, तो वित्त वर्ष 2021-22 में यह 15.3 अरब डॉलर था. एक रिपोर्ट बताती है कि 2021 में, भारत ने कतर को 1.85 बिलियन डॉलर का निर्यात किया था. भारत द्वारा कतर भेजे गए मुख्य उत्पादों में आभूषण (115 मिलियन डॉलर), चावल (97.5 मिलियन डॉलर) और रिफाइंड पेट्रोलियम (86.6 मिलियन डॉलर) शामिल थे. पिछले कुछ सालों में कतर को भारत का निर्यात 17.3% की वार्षिक दर से बढ़ा है. इसी तरह, 2021 में कतर ने भारत को 10.3 अरब डॉलर से ज्यादा का निर्यात किया. इसमें मुख्य तौर पर पेट्रोलियम गैस (7.52 अरब डॉलर), क्रूड पेट्रोलियम (766 मिलियन डॉलर), और हैलोजेनेटेड हाइड्रोकार्बन (458 मिलियन डॉलर) शामिल थे. पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत को कतर का निर्यात 19.8% की वार्षिक दर से बढ़ा है.

कतर में हमारी कई कंपनियां 
कतर में कई भारतीय कंपनियां भी कारोबार कर रही हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, 6000 से अधिक छोटी-बड़ी भारतीय कंपनियां कतर में मौजूद हैं. कतर के इंफ्रास्टक्चर, कम्युनिकेशन, टेक्नॉलिजी और एनर्जी सेक्टर में भारतीय कंपनियों का दबदबा है. दूसरी तरफ, कतर की कई कंपनियों का भारत में भी निवेश है. कतर के सॉवरेन वेल्थ फंड 'कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी' ने मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस रिटेल में निवेश किया है. ऐसे में यदि दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता है, तो कारोबार के प्रभावित होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता. इसके अलावा, कतर में रहने वाले भारतीयों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. कतर की 29 लाख आबादी में से 7.5 लाख भारतीय हैं.

Israel से हमारा कारोबार
दूसरी ओर इजरायल और हमास की जंग भारत की टेंशन बढ़ा रही है. एशिया में इजरायल के लिए भारत तीसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है. उसकी कंपनियों ने यहां निवेश किया हुआ है, जिसके युद्ध लंबा खिंचने की स्थिति में प्रभावित होने से इंकार नहीं किया जा सकता. भारत के कुल व्यापारिक निर्यात में इजरायल की हिस्सेदारी 1.8% है. इजरायल भारत से लगभग 5.5 से 6 बिलियन डॉलर के परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद (Refined Petroleum Products) खरीदता है. वित्तवर्ष 23 में, इजराइल को भारत का कुल निर्यात 8.4 बिलियन डॉलर था. जबकि आयात 2.3 बिलियन डॉलर रहा. इस तरह, दोनों देशों के बीच करीब 10 बिलियन डॉलर का कारोबार होता है.

बढ़ जाएंगे नुकसान के आंकड़े
इजरायल भारत से परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों के साथ-साथ ज्लैवरी, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग से जुड़े प्रोडक्ट्स मंगाता है. जबकि भारत मोती, हीरे, डिफेंस मशीनरी, पेट्रोलियम ऑयल्स, फर्टिलाइजर्स और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट आदि आयात करता है. एक रिपोर्ट बताती है कि अप्रैल 2000 से मार्च 2023 के दौरान, भारत में इजरायल का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी FDI 284.96 मिलियन अमेरिकी डॉलर था. कई भारतीय कंपनियों ने भी इजरायल में बड़ा निवेश किया हुआ है. भले ही अभी ज्यादा असर नजर नहीं आ रहा, लेकिन यदि युद्ध जल्द खत्म नहीं होता तो नुकसान के आंकड़े दिखाई देने शुरू हो जाएंगे.

यहां भी होगा नुकसान
इजरायल के साथ-साथ भारत के फिलिस्तीन के साथ भी व्यापारिक रिश्ते हैं. हालांकि, भारत और फिलिस्तीन के बीच व्यापार इजरायल के जरिए होता है. 2020 में भारत-फिलिस्तीन ट्रेड वॉल्यूम करीब 67.77 मिलियन डॉलर था. भारत से वहां मार्बल और ग्रेनाइट, सीमेंट, बासमती चावल, मेडिकल एवं सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट्स आदि जाता है. जबकि भारत ताजा और सूखे खजूर, बेस मेटल्स से बनी वस्तुएं इम्पोर्ट करता है. युद्ध बढ़ने की स्थिति में भारत के फिलिस्तीन के साथ आयात-निर्यात पर भी असर पड़ेगा. वहीं, भारतीय एक्सपोर्ट्स को आशंका है कि युद्ध जारी रहने पर उन्हें इजरायल भेजे जाने वाले माल के लिए ज्यादा इंश्योरेंस प्रीमियम और बढ़ी हुई शिपिंग कॉस्ट वहन करनी पड़ेगी. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि ये युद्ध घरेलू निर्यातकों के मुनाफे को कम कर सकता है और अगर युद्ध जल्द नहीं थमता को ट्रेड वॉल्यूम का प्रभावित होना भी लाजमी है. इसलिए भारत चाहेगा कि युद्ध की ये आग जल्द शांत हो जाए.

Tea Exporter में बेचैनी
इजरायल-हमास युद्ध ने भारत के Tea Exporter की परेशानी भी बढ़ा दी है. इस युद्ध में ईरान के शामिल होने की संभावना लगातार बढ़ती जा रही है. यदि ऐसा होता है, तो चाय निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो सकता है. ईरान मुख्य रूप से भारत के लिए एक परंपरागत चाय बाजार है. असम से ईरान सबसे ज्यादा चाय भेजी जाती है. भारतीय चाय निर्यातक पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं. वह जल्दी से जल्दी ऑर्डर पूरा करने की कोशिश में हैं, लेकिन साथ ही भुगतान को लेकर आशंकित हैं. उन्हें इस बात का भी डर है कि युद्ध के चलते माल की आवाजाही में कोई दिक्कत न हो जाए. एक्सपर्ट्स का कहना है कि चाय निर्यातकों के लिए यह समय घबराहट वाला है. ईरान हमारी चाय का बड़ा खरीदार है. अगर वहां हालात बिगड़ते हैं, तो सप्लाई प्रभावित होना लाजमी है. इसके अलावा, निर्यातकों का पेमेंट भी अटक सकता है. इसलिए वो यही चाहते हैं कि इजरायल और हमास के युद्ध की आंच ईरान तक न पहुंचे. वैसे, जनवरी-दिसंबर 2022 के दौरान भारत ने सबसे ज्यादा चाय का निर्यात संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को किया था. UAE को 4.23 करोड़ किलोग्राम चाय भेजी गई थी. इसी तरह, रूस को 4.11 करोड़ किलोग्राम और ईरान में 2.16 करोड़ किलोग्राम चाय का निर्यात हुआ. 


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