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IMF ने घटाया भारत का ग्रोथ अनुमान, लेकिन चीन और अमेरिका से क्यों हैं बेहतर

IMF का अनुमान है कि साल 2022 में विश्व अर्थव्यवस्था 3.2 परसेंट की रफ्तार से बढ़ेगी, जो कि साल 2023 में और सुस्त होकर 2.9 परसेंट रहने का अनुमान है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्ली: इंटरनेशन मॉनिटरी फंड यानी IMF ने दुनिया की अर्थव्यस्थाओं के ग्रोथ अनुमानों में एक बार फिर कटौती कर दी है. IMF ने अपने नए अनुमानों में मौजूदा वित्त वर्ष के लिए भारत के GDP अनुमानों में 80 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर दी है, अब ये 7.4 परसेंट पर आ गया है. वित्त वर्ष 2024 के लिए भी IMF ने भारत का ग्रोथ अनुमान 6.9 परसेंट से घटाकर 6.1 परसेंट कर दिया है. 

ग्लोबल ग्रोथ में और सुस्ती का अनुमान
जहां तक ग्लोबल ग्रोथ की बात है, IMF ने ग्लोबल ग्रोथ अनुमानों में भी कटौती की है. IMF का अनुमान है कि साल 2022 में विश्व अर्थव्यवस्था 3.2 परसेंट की रफ्तार से बढ़ेगी, जो कि साल 2023 में और सुस्त होकर 2.9 परसेंट रहने का अनुमान है. यानी साल 2022 और 2023 के लिए ग्लोबल ग्रोथ अनुमानों में 0.4% और 0.7% की कटौती हुई है. साल 2021 में ग्लोबल इकोनॉमी ने कुछ अच्छे संकेत दिए थे, जिसकी वजह से IMF ने ग्रोथ अनुमान 6.1 परसेंट दिया था.

IMF ने भारत का ग्रोथ अनुमान क्यों घटाया 
जहां तक भारत की बात है, IMF का ग्रोथ अनुमान काफी हद तक रिजर्व बैंक की लाइन पर ही है, रिजर्व बैंक का मौजूदा वित्त वर्ष के लिए ग्रोथ अनुमान 7.2 परसेंट है. हालांकि एक्सपर्ट्स मानते कि भारत की GDP ग्रोथ 7 परसेंट के नीचे भी फिसल सकती है. भारत की ग्रोथ अनुमानों में कटौती पर IMF का कहना है कि भारत पर बाहरी कारणों का ज्यादा असर पड़ा है, रूस और यूक्रेन की जंग के चलते सप्लाई के मोर्चे पर संकट दिखा और पूरी दुनिया में जरूरी कमोडिटीज के दाम बढ़े जिससे भारत भी अछूता नहीं रहा. 40 साल में सबसे ज्यादा महंगाई झेल रहा अमेरिका लगातार ब्याज दरें बढ़ा रहा है, इस साल अमेरिका ने अबतक 150 बेसिस प्वाइंट ब्याज दरें बढ़ा दी है, आगे भी ये सिलिसला जारी रहने वाला है. फेड के इस कदम से रुपया लगातार दबाव में है, बीते हफ्ते रुपया पहली बार 80 डॉलर के निचले स्तरों तक फिसल गया. इन सब कारणों से भारत में महंगाई लगातार बढ़ती चली गई, और मजबूरी में रिजर्व बैंक को भी ब्याज दरें लगातार बढ़ाने को मजबूर होना पड़ा. रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2023 में अबतक 90 बेसिस प्वाइंट का इजाफा कर दिया है. रेपो रेट अब 4.9 परसेंट पहुंच चुका है. ऐसा अनुमान है कि 5 अगस्त की अगली पॉलिसी बैठक में भी रिजर्व बैंक ब्याज दरों में इजाफा करेगा. जब ब्याज दरें बढ़ेंगी तो डिमांड में गिरावट आएगी, लोग कर्ज कम लेंगे और स्पेंडिंग भी घटेगी जिसका सीधा असर ग्रोथ पर दिखेगा. इसी वजह को ध्यान में रखते हुए IMF ने भारत का ग्रोथ अनुमान घटाया है. 

US, चीन का क्या हाल?
भारत के ग्रोथ अनुमान में कटौती से अगर आपकी चिंता बढ़ी है तो एक बार अमेरिका और चीन के ग्रोथ अनुमानों पर डाल लें. IMF ने साल 2022 के लिए अमेरिका के ग्रोथ अनुमान में 1.4 परसेंट की कटौती कर दी है, अब ये 2.3 परसेंट हो गई है, जबकि साल 2023 के लिए 1.3 परसेंट की कटौती करके इसे 1 परसेंट कर दिया है. ये कटौती फेड रिजर्व के लगातार ब्याज दरें बढ़ाने और लोगों की खरीदने की क्षमता में गिरावट को देखते हुए की गई है. चीन की बात करें तो कोरोना की वजह से लॉकडाउन ने मुश्किलें बढ़ाईं, इसके अलावा चीन के रियल एस्टेट संकट से भी ग्रोथ पर असर पड़ा है. IMF ने साल 2022 के लिए चीन के ग्रोथ अनुमान 1.1 परसेंट की कटौती की है, और अब ये 3.3 परसेंट है. हालांकि साल 2023 के लिए ग्रोथ अनुमान 0.5 परसेंट घटाकर 4.6 परसेंट किया गया है, यानी चीन में आगे चलकर सुधार के संकेत हैं. 

यूरो जोन और रूस का हाल  
यूरोप को रूस और यूक्रेन की जंग का खामियाजा भुगतान पड़ा है. यूरोप ने अपनी मॉनिटरी पॉलिसी को सख्त किया है और 11 साल बाद ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है, रूस से यूरोपीय देशों की गैस सप्लाई प्रभावित हुई है, रूस ने हालांकि गैस सप्लाई को 50 परसेंट सप्लाई शुरू की लेकिन अब इसमें आज से फिर कटौती कर दी है. इससे यूरोप में महंगाई के और बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है. साल 2022 में यूरो जोन के लिए IMF ने ग्रोथ अनुमानों में 0.2 परसेंट की मामूली कटौती करके इसे 2.6 परसेंट कर दिया है, लेकिन साल 2023 के लिए इसमें 1.1 परसेंट की बड़ी कटौती करके इसे 1.2 परसेंट कर दिया है. जहां तक रूस का सवाल है, IMF ने जंग लड़ रहे इस देश के लिए साल 2022 में ग्रोथ अनुमान 2.5 परसेंट बढ़ाया है, हालांकि अब भी ये निगेटिव जोन में है. लेकिन अगले साल यानी 2023 में इसमें 1.2 परसेंट की कटौती कर दी है. 

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