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GST के दायरे में आएगा पेट्रोल-डीजल! यदि ऐसा हुआ तो आपको कितना होगा फायदा? 

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि केंद्र पेट्रोल -डीजल को GST के दायरे में लाने का प्रयास करेगी. यदि ऐसा होता है तो तेल के दाम काफी कम हो जाएंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

सहयोगियों के दम पर सत्ता में आई मोदी सरकार (Modi Govt) को शायद अहसास हो गया है कि महंगाई को नजरंदाज करने के चलते लोकसभा चुनाव में मनमाफिक परिणाम नहीं मिले. इसलिए सरकार ने आसमान पर पहुंच चुके पेट्रोल-डीजल के दामों (Petrol-Diesel Price) में कमी के लिए बड़ा कदम उठाने के संकेत दिए हैं. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने वाले हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि केंद्र सरकार का प्रयास होगा कि पेट्रोल-डीजल और नेचुरल गैस जैसे ईंधन को वस्तु एवं सेवा कर (GST) के दायरे में लाया जाए. 

पहले बताई थी मजबूरी
हरदीप पुरी ने कहा कि हम पेट्रोल-डीजल और प्राकृतिक गैस को वस्तु एवं सेवा कर (GST) के दायरे में लाने का प्रयास करेंगे. वैसे यह पहली बार नहीं है जब पुरी ने पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की बात कही है. उन्होंने पहले भी इस पर जोर दिया था और यह भी कहा था कि पेट्रोल और डीजल को GST के तहत लाने के लिए राज्यों को सहमत होना होगा. क्योंकि ईंधन और शराब उनके राजस्व का प्रमुख सोर्स हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी पिछले साल नवंबर में कहा था कि पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाने से लोगों को फायदा होगा.  

केंद्र-राज्य ऐसे भरते हैं जेब
यदि पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाने को लेकर मोदी सरकार इस बार गंभीरता दिखाती है, तो इससे तेल की कीमतों से परेशान जनता को राहत मिल सकती है. पेट्रोल-डीजल के महंगा होने के पीछे उस पर लगने वाला भारी-भरकम टैक्स है. केंद्र और राज्य सरकार दोनों इससे अपनी जेब भरती हैं. आंध्र प्रदेश में सबसे पेट्रोल पर ज्यादा 31% टैक्स लगाया जाता है. जबकि कर्नाटक 25.92%, महाराष्ट्र 25% और झारखंड सरकार पेट्रोल पर 22% वैट वसूलती है. इसी तरह, डीजल पर आंध्र प्रदेश में 22%, छत्तीसगढ़ में 23%, झारखंड में 22% और महाराष्ट्र में 21% वैट लगता है. हर राज्य अपने हिसाब से टैक्स वसूलता है, इसलिए पेट्रोल-डीजल के दाम वहां अलग-अलग होते हैं. इसके साथ ही केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी लगाती है. 

60% तो केवल टैक्स है
मोटे तौर पर पेट्रोल-डीजल पर सरकारें 60% से भी ज्यादा टैक्स वसूलती हैं. ऐसे में अगर इसे जीएसटी के दायरे में लाया जाता है, तो इस भारी-भरकम टैक्स की छुट्टी हो जाएगी. पेट्रोल-डीजल पर केवल जीएसटी के हिसाब से टैक्स लगेगा और GST की अधिकतम दर 28% है. इससे पेट्रोल-डीजल के दामों में काफी कमी देखने को मिलेगी. इस राह में समस्या ये है कि सभी राज्यों को इसके लिए तैयार होना होगा. राज्यों की कमाई में सबसे बड़ा योगदान शराब और ईंधन पर टैक्स का है. यदि उन्हें अपनी मनमर्जी के हिसाब से इन पर टैक्स लगाने की छूट नहीं मिलेगी, तो उनकी कमाई कम होगी. GST के दायरे में आने पर जो पैसा राज्यों को पेट्रोलियम पदार्थों पर टैक्स से सीधे मिल जाता था, वो केंद्र के पास जाएगा और वहां से राज्यों मिलेगा. यानी इसमें केंद्र की भूमिका मजबूत हो जाएगी.

निकल सकता है बीच का रास्ता 
राज्यों का इस विषय पर सहमत होना मुश्किल ज़रूर है, लेकिन आम जनता का हवाला देकर उन्हें तैयार किया जा सकता है. इसके लिए कोई बीच का रास्ता भी निकाला जा सकता है. जीएसटी के तहत अधिकतम टैक्स स्लैब 28% का है. ऐसे में सरकार पेट्रोल-डीजल के लिए जीएसटी के स्लैब में कुछ संशोधन करके एक अलग स्लैब बना सकती है, जो 28 प्रतिशत से ज्यादा का हो. इस तरह से केंद्र और राज्य दोनों के नुकसान को कुछ कम किया जा सकता है. एक रिपोर्ट बताती है कि यदि पेट्रोल को अधिकतम 28 प्रतिशत जीएसटी स्लैब में शामिल किया जाता है, तो एक लीटर पेट्रोल की कीमत 70 रुपए के आसपास हो सकती है. 


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