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हमारे योग से दुनिया के कई देशों की आर्थिक सेहत में आ रहा निखार, आखिर कितना बड़ा है बाजार?
2014 में संयुक्त राष्ट्र ने भारत की पहल पर 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था. तब से हर साल मनाया जाता आ रहा है. इस साल के लिए योग दिवस की थीम 'योगा फॉर सेल्फ एंड सोसाइटी' है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
योग (Yoga) दुनिया को भारत की देन है. शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य प्रदान करने वाले योग को लोग बड़े पैमाने पर अपना रहे हैं. केवल भारत ही नहीं अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, जर्मनी और आस्ट्रेलिया जैसे देशों में इसने पिछले कुछ सालों में ज़बरदस्त लोकप्रियता हासिल की है. आज यानी 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day 2024) के मौके पर दुनिया के कई देशों के लोग योग करते नजर आए. योग के प्रति लोगों के लगातार बढ़ते रुझान ने इसे एक इंडस्ट्री में तब्दील कर दिया है और सेहत को दुरुस्त रखने वाला योग अब देश की इकॉनमी को स्वस्थ रहने का भी काम कर रहा है.
रोजी-रोटी का जरिया योग
हर साल 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के तौर पर मनाया जाता है. आज से करीब 10 साल पहले 2014 में संयुक्त राष्ट्र ने भारत की पहल पर 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था. तब से इसे लगातार अलग-अलग थीम पर योग दिवस सेलिब्रेट किया जाता आ रहा है. इस साल यानी 2024 के लिए योग दिवस की थीम 'योगा फॉर सेल्फ एंड सोसाइटी' है. योग आज सैकड़ों लोगों की रोजी-रोटी का जरिया बन गया है. इसमें एक सामान्य योग ट्रेनर से लेकर योग का सामान बनाने वालीं बड़ी-बड़ी कंपनियां तक शामिल हैं.
इतना है ग्लोबल मार्केट
इन 10 सालों में योग न केवल भारत बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा बाजार बन गया है, जिसके आने वाले सालों में बेहद तेजी से बढ़ने की संभावना है. यह कहना गलत नहीं होगा कि योग न केवल बीमारियों से दूर रखने में मदद कर रहा है, बल्कि अर्थव्यवस्था को धक्का लगाने में भी अहम भूमिका निभा रहा है. एक रिपोर्ट बताती है कि योग का ग्लोबल मार्केट साइज करीब 115.43 अरब डॉलर का है. इसमें यदि कपड़े, मैट आदि योग से जुड़े समान को जोड़ दिया जाए तो ये आंकड़ा 140 अरब डॉलर तक पहुंच जाता है. वहीं, 2025 तक इसके तेजी से बढ़ते हुए 215 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है.
भारत में इतनी बड़ी है इंडस्ट्री
योग दुनिया को भारत की देन है, लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, आस्ट्रेलिया जैसे देशों में ये ज्यादा लोकप्रिय हो गया है. हालांकि, भारत में भी इसके प्रति रुचि में इजाफा हुआ है, लेकिन दूसरे देशों के मुकाबले गति अभी भी धीमी है. भारत में योग इंडस्ट्री का आकार करीब 80 अरब डॉलर का है. कोरोना महामारी के बाद इसमें 154% तक की ग्रोथ दर्ज की गई है. वहीं, देश की योग क्लासेस की इंडस्ट्री का रिवेन्यु साइज लगभग 2.6 अरब डॉलर का है. वेलनेस सर्विसेज, जिसके तहत योग स्टूडियो आदि आते हैं, की इस बाजार में 40% हिस्सेदारी है. मोदी सरकार भी योग दिवस को प्रमोट करने के लिए काफी खर्चा कर रही है. 2015 से 2019 तक अकेले भारतीय आयुष मंत्रालय ने योग दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों पर 137 करोड़ रुपए खर्च किए थे.
US में बढ़ रहे योग स्टूडियो
अमेरिका की बात करें, तो वहां योग कारोबार के तौर पर तेजी से फलफूल रहा है. यूएस में यह 15 अरब डॉलर से अधिक का बाजार बन गया है और सालाना 9.8% की दर से बढ़ रहा है. योग की बदौलत यहां करीब डेढ़ लाख लोगों को रोजगार भी मिला हुआ है. अमेरिका में हर साल योग स्टूडियो की संख्या बढ़ रही है. 2018 में यूएस में 37569 योग स्टूडियो थे, 2019 में 40949, 2020 में 42105, 2021 में 45068, 2022 में 46912 और 2023 में ये संख्या बढ़कर 48547 हो गई. वहीं, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और चीन में भी योग का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है.
मैट बेचकर हो रही कमाई
योग के लिए मैट बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होते हैं. खासतौर पर यूके और अमेरिका जैसे देशों में योग मैट इस्तेमाल करने वालों की संख्या काफी ज्यादा है. भारत में भी अब इसके खरीदारों की संख्या में इजाफा हो रहा है. मैट के बढ़ते चलन से इसे बनाने वाली कंपनियों की चांदी हो गई है. एक रिपोर्ट के अनुसार, योग मैट सबसे ज्यादा जर्मनी, US और चीन में बनते हैं. अब Nike और Reboke जैसी दिग्गज कंपनियां भी योग मैट को बेच रही हैं. भारत में ज्यादातर योग मैट चीन से मंगाए जाते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए चीन से 92 लाख रुपए के योग मैट आयात किए गए थे.
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