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Explainer: आसमान पर होम लोन की दरें, फ्लोटिंग या फिक्स्ड रेट, क्या रहेगा फायदेमंद?

फिक्स्ड रेट में भले ही अमन की EMI में कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन ये फ्लोटिंग रेट से 3-3.5% तक महंगा होता है. अगर बैंक ब्याज दरों में कटौती करता है तो इसका फायदा नहीं मिलेगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्ली: अमन वर्मा एक आईटी कंपनी में काम करते हैं, उम्र 32 साल है. अभी वो गाजियाबाद में एक किराये के घर में रहते हैं. घर में शादी को लेकर बात चल रही है, लेकिन साथ ही ये भी चर्चा है कि बहू के कदम किराये के घर में न पड़कर अपने घर में पड़ें. इसलिए शादी से पहले वो एक घर खरीद लेना चाहते हैं. 

अब अमन के सामने मुश्किल ये है कि ब्याज दरें लगातार बढ़ रही हैं, साल भर पहले होम लोन की दरें 6.7-7% के आस-पास थीं, लेकिन अब रेट 8.5-9% तक चले गये हैं. आगे भी इसके बढ़ने की पूरी गुंजाइश है. ऐसे में होम लोन की EMI एक बड़ी चिंता है. अमन के साथ उनके माता-पिता भी रहते हैं, और शादी के बाद पत्नी भी आएगी. इसलिए कम से कम 2BHK लेना जरूरी है. कई बैंकों का चक्कर लगाने के बाद अमन अमन कंफ्यूज हैं कि उन्हें होम लोन फ्लोटिंग पर लेना चाहिए या फिक्स्ड रेट पर. क्योंकि अमन को लगता है कि फ्लोटिंग रेट पर ब्याज दरें आगे जाकर बढ़ेंगी, जिससे उन पर वित्तीय दबाव भी बढ़ेगा, लेकिन फिक्स्ड रेट काफी महंगा है. ऐसे में अमन को क्या करना चाहिये. तो चलिये अमन की इस मुश्किल को हल करते हैं. 

सबसे पहले समझते हैं कि फ्लोटिंग और फिक्स्ड रेट क्या होते हैं
फ्लोटिंग रेट - जब जब रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाएगा या घटाएगा, बैंक्स भी ब्याज दरों में बदलाव करेंगे, और आपके लोन की ब्याज दर भी इसी तरह से घटती या बढ़ती रहेगी.

फिक्स्ड रेट - इसमें आपके होम लोन की ब्याज दर पूरी लोन अवधि के दौरान एक रही रहती है. बैंक के ब्याज दरें बढ़ाने या घटाने से आपकी EMI पर कोई फर्क नहीं पड़ता है. 

अब सुनने में तो ऐसा लगता है कि ब्याज दरों के घटने बढ़ने की चिंता क्यों लेनी, इसलिये फिक्स्ड रेट एक बढ़ियां ऑप्शन है. इस नतीजे पर पहुंचने से पहले इन दोनों विकल्पों को गहराई से समझना बेहद जरूरी है. 

फिक्स्ड रेट के फायदे और नुकसान 

1. फिक्स्ड रेट में भले ही अमन की EMI में कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन ये फ्लोटिंग रेट से 3-3.5% तक महंगा होता है. अगर बैंक ब्याज दरों में कटौती करता है तो उनको इसका फायदा नहीं मिलेगा. इसका नुकसान अमन को लंबे समय तक ज्यादा EMI चुकाने में होगा. 

2. फिक्स्ड रेट का एक बड़ा फायदा ये होता है अमन जैसे घर खरीदारों को बढ़ती ब्याज दरों की चिंता नहीं करनी होती है. उनकी EMI पूरी लोन अवधि के लिए फिक्स होती है, इसलिए वो अपने वित्तीय जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभा पाते हैं. भविष्य में उनकी कमाई बढ़ने पर EMI में कोई हिस्सा नहीं जाता है. लेकिन इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि आपकी EMI आपकी कुल मंथली सैलरी का 30 परसेंट से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. मतलब अगर 1 लाख रुपये आपकी इन हैंड सैलरी है तो 30,000 रुपये से ज्यादा EMI नहीं होनी चाहिए. 

3. हालांकि कई बैंक ऐसे फीचर्स भी ऑफर करते हैं जिसमें होम लोन कुछ समय के लिए फिक्स्ड रेट पर रहता है, लेकिन इसके बाद फ्लोटिंग पर शिफ्ट हो जाता है. 
इसको सेमी फिक्स्ड इंटरेस्ट स्कीम के रूप में जाना जाता है. इसमें बैंक लोन अवधि के 2 या 3 वर्ष तक फिक्स्ड रेट पर होम लोन देते हैं.  

फ्लोटिंग रेट के फायदे और नुकसान 

1. इस वक्त अगर आप होम लोन लेने जाएंगे तो ब्याज दरें पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा बढ़ चुकी हैं आगे भी बढ़ने की पूरी गुंजाइश है. ब्याज दरें जो पिछले साल तक 6.7-7% के आस पास थीं अब बढ़कर 8.5-9% पर आ चुकी हैं और अगली बढ़ोतरी में ये 9.5% तक भी जा सकती हैं. मतलब ये कि फ्लोटिंग रेट पर आज अगर होम लोन लिया जाये तो आगे इसके और महंगा होने की पूरी संभावना है

2. लेकिन ब्याज दरें हमेशा शीर्ष पर रहेंगी, ऐसा भी नहीं है, जब महंगाई काबू में आ जाएगी तो ब्याज दरें कम होने का सिलसिला भी शुरू होगा, जिससे EMI का बोझ भी कम होगा. फिक्स्ड रेट के मुकाबले फ्लोटिंग ब्याज दरें कम होती हैं. 

3. जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो EMI का बोझ दो तरीके से बढ़ता है. पहला- आमतौर पर बैंक आपके लोन की अवधि को बढ़ा देते हैं, और EMI की रकम जस की तस रहती है, दूसरा- आप बैंक को बोल सकते हैं कि वो आपकी EMI की रकम को बढ़ा दे ताकि तय समय में लोन का निपटारा हो सके. 

4. फ्लोटिंग रेट में एक बड़ा फायदा मिलता है प्री-पेमेंट का, जिसमें कोई चार्ज नहीं होता है. लेकिन फिक्स्ड रेट में प्री-पेमेंट फ्री नहीं है. अगर आपको लोन को समय से पहले चुकाना है तो बैंक आप पर पेनाल्टी लगाता है, जो कई बार काफी ज्यादा होता है

फिक्स्ड से फ्लोटिंग में शिफ्ट 
ऐसा मत सोचिये कि आपने फिक्स्ड रेट पर होम लोन ले लिया तो आप पूरी जिंदगी के लिए फंस गये. आप चाहें तो फिक्स्ड से फ्लोटिंग में शिफ्ट भी हो सकते हैं. लेकिन ये कब करना चाहिए, इस बारे में आप अपने वित्तीय सलाहकार से बात करके फैसला करें. आमतौर पर एक्सपर्ट कहते हैं कि ऐसा तभी करना चाहिए, जब दी जा रही फिक्स्ड रेट उनके फ्लोटिंग लोन पर मौजूदा रेट से 2 परसेंट से ज्यादा न हो. 

आम तौर पर होम लोन फ्लोटिंग पर लेना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है, लेकिन अंतिम फैसला आप अपने वित्तीय सलाहकार के साथ बैठकर ही करें. क्योंकि ये फैसला आपके लक्ष्य और भविष्य की योजनाएं और वित्तीय जिम्मेदारियों पर निर्भर करता है. 

 

 

 


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