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अगर 'मूनलाइटिंग' से कमाई छिपाई, तो समझो शामत आई! समझिए 'एक्स्ट्रा इनकम' का टैक्स कनेक्शन

अगर कोई आईटी प्रोफेशनल बिना इसके टैक्स पहलू को समझे काम करता है तो आगे चलकर उसे परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. टैक्स को लेकर क्या नियम हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्ली: आईटी इंडस्ट्री में आजकल 'मूनलाइटिंग' एक बहस का मुद्दा बना हुआ है. सभी के अपने अपने तर्क और पक्ष हैं. कुछ आईटी कंपनियां इसे नैतिकता का मुद्दा बता रही हैं तो कुछ सुरक्षा का, लेकिन जिस मुद्दे पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है कि वो है टैक्सेशन का. 

मूनलाइटिंग से कमाई और टैक्स
देश की इनकम टैक्स अथॉरिटीज और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs) ने उन आईटी प्रोफेशनल्स को जो 'मूनलाइटिंग' कर रहे हैं उन्हें टैक्स से जुड़े पहलुओं को जान और समझ लेने की चेतावनी दी है. टैक्स अथॉरिटीज और CAs का कहना है कि मूनलाइटिंग के जरिए वो जो भी अतिरिक्त पैसा कमाएंगे, उसकी जानकारी उन्हें इनकम टैक्स रिटर्न में दिखानी होगी. मूनलाइटिंग का मतलब होता है, जब कोई आईटी प्रोफेशनल अपनी रेगुलर जॉब के अलावा, अपनी शिफ्टी खत्म होने के बाद वो कहीं कोई दूसरा असाइनमेंट या काम भी कर सके, जिससे उसे थोड़ा एक्स्ट्रा कमाई हो जाए. इसे लेकर देश की टॉप आईटी कंपनियां परेशान हैं. Wipro और Infosys जैसे कंपनियों ने इसे नैतिकता का मुद्दा बनाकर कई लोगों को नौकरी से निकाला भी है. 

क्या हैं टैक्स के नियम
अगर कोई आईटी प्रोफेशनल बिना इसके टैक्स पहलू को समझे काम करता है तो आगे चलकर उसे परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. टैक्स को लेकर क्या नियम हैं, इसे समझते हैं, मान लीजिये कोई इंडिविजुअल या कोई कंपनी किसी को उसकी सेवाओं, कॉन्ट्रैक्ट जॉब के लिए (Section 194C of IT Act, 1961 के तरत) 
या प्रोफेशनल फीस (सेक्शन 194J) का भुगतान करता है, और ये रकम 30,000 से ज्यादा है तो वो टैक्स डिडक्शन एट सोर्स यानी TDS के दायरे में आएगा, यानी कंपनी आपका 1% की दर से TDS काटेगी और बची हुई रकम आपको मिलेगी. अगर ये रकम 30,000 रुपये से कम है तो कोई भी TDS नहीं कटेगा, लेकिन अगर यही पैसा एक वित्त वर्ष में 1 लाख रुपये के ऊपर चला जाता है तो उस पर 194C के तहत TDS लगेगा. ऐसे में जरूरी होता है कि ऐसे व्यक्तियों को इस तरह की इनकम का खुलासा अपने टैक्स रिटर्न में जरूर करना चाहिए. 

नहीं तो क्या होगा 
कई प्रोफेशनल्स, जिसमें कि ज्यादातर आईटी कर्मचारी हैं, उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स से अपनी अतिरिक्त इनकम पर लगने वाले टैक्स को कम करने या इससे बचने के उपाय मांगने शुरू कर दिए हैं. आमतौर पर किसी कंपनी एचआर डिपार्टमेंट दिसंबर या जनवरी तक टैक्स डेक्लेरेशन फॉर्म्स भेज देता है. आईटी प्रोफेशनल्स जानना चाहते हैं कि क्या उन्होंने जो अतिरिक्त पैसा कमाया है वो उसे कानूनी तौर पर प्रोफेशनल इनकम घोषित कर सकते हैं. अगर कोई payee यानी जो पेमेंट कर रहा है, वो TDS नहीं काट रहा है और recipient यानी जो पेमेंट हासिल कर रहा है, वो इसे छिपा रहा है, दोनों के लिए ही मुश्किल खड़ी हो सकती है. क्योंकि इसे इनकम टैक्स कानूनों का उल्लंघन माना जाएगा और उसके मुताबिक इन दोनों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है. 

ऐसे खुल जाएगी सारी पोल
टैक्स एक्सपर्ट कहते हैं कि फॉर्म 26AS, जो कि वार्षिक सूचना विवरण और टैक्सपेयर की सूचना का सारांश होता है, जिसमें कि एक वित्त वर्ष में किसी भी भुगतान और टैक्स कटौती का एक विस्तृत ब्यौरा होता है. टैक्स रिटर्न में इस तरह की इनकम को नहीं दिखाना या रिपोर्ट नहीं करना, व्यक्ति द्वारा रिपोर्ट की गई इनकम और अधिकारियों के पास मौजूद डेटा में मिसमैच होगा. यहीं से मुश्किलें शुरू होंगी, टैक्स अथॉरिटीज इसे इनकम की अंडर रिपोर्टिंग या मिस रिपोर्टिंग की तरह मान सकती हैं और व्यक्ति को पेनल्टी या ब्याज देना पड़ सकता है. इसके बाद भी अगर इनकम टैक्स विभग को ऐसी अघोषित इनकम के बारे में पता चलता है तो व्यक्ति के खिलाफ आईटी एक्ट के सेक्शन 148A के तहत जांच का सामना भी करना पड़ सकता है और पेनल्टी लगाई जा सकती है. टैक्स एक्सपर्ट्स कहते हैं कि टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को देखते हुए अपनी दूसरी कमाई को लंबे समय तक छिपाए रखना मुश्किल हो सकता है. 

भारत में टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर कंपनियां मूनलाइटिंग के मुद्दे पर बंटी हुई हैं, Infosys पहली कंपनी है जिसने इस बात की इजाजत दी है कि उसके कर्मचारी अपने मैनेजर्स की मंजूरी से कुछ शर्तों के साथ मूनलाइटिंग कर सकते हैं. जबकि TCS ने इसे अनैतिक बताया है, और कर्मचारियों के करार का उल्लंघन भी माना है. 

VIDEO: धोनी के पास कहां-कहां और कितनी है प्रॉपर्टी


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