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क्या दुनिया में मंदी का आना तय है, World Bank की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

विश्व बैंक के अध्ययन का अनुमान है कि 2023 की GDP ग्रोथ 0.5 परसेंट धीमी होगी और प्रति व्यक्ति टर्म पर 0.4 परसेंट तक गिरेगी, जो कि ग्लोबल मंदी की तकनीक परिभाषा को पूरा करता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्ली: क्या दुनिया पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है, इसे लेकर कई रेटिंग एजेंसीज अपना अनुमान जारी कर चुकी हैं. ग्लोबल रेटिंग एजेंसी Fitch ने अमेरिका, यूरोप में मंदी की आशंकाओं को लेकर अभी एक रिपोर्ट जारी की थी. अब विश्व बैंक ने भी अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि दुनिया मंदी की चपेट में आने वाली है. 

'सख्त मॉनिटरी पॉलिसी से आएगी मंदी'
विश्व बैंक (World Bank) ने  अपनी नई रिपोर्ट में कहा है कि महंगाई को काबू करने के लिए केंद्रीय बैंकों की सख्त पॉलिसी के चलते अगले साल ग्लोबल इकोनॉमी मंदी में जा सकती है. विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दुनिया भर के पॉलिसीमेकर्स मॉनिटरी और वित्तीय समर्थन को उस हद तक वापस ले रहे हैं, जो आधी सदी में नहीं देखा गया. निवेशकों को लगता है कि महंगाई दर को 5 परसेंट पर लाने के लिए सेंट्रल बैंक्स अगले साल मॉनिटरी पॉलिसी रेट्स को 4 परसेंट तक बढ़ाएंगे. जो कि 2021 में औसत से दोगुना होगा. रिपोर्ट के मॉडल के मुताबिक, अगर सेंट्रल बैंक महंगाई दर को अपनी सीमा रेखा में लाना चाहते हैं तो ब्याज दरें 6 परसेंट तक जा सकती हैं.

'उत्पादन बढ़ाने पर जोर देना होगा'
विश्व बैंक के अध्ययन का अनुमान है कि 2023 की GDP ग्रोथ 0.5 परसेंट धीमी होगी और प्रति व्यक्ति टर्म पर 0.4 परसेंट तक गिरेगी, जो कि ग्लोबल मंदी की तकनीक परिभाषा को पूरा करता है. विश्व बैंक के ग्रुप प्रेसिडेंट डेविड मैलपास ने कहा है कि पॉलिसीमेकर्स को अपना फोकस खपत घटाने की बजाय उत्पादन बढ़ाने पर लगाना चाहिए. पॉलिसी में अतिरिक्त निवेशक लाने और उत्पादन और पूंजी आवंटन पर ध्यान देना चाहिए, जो कि ग्रोथ और गरीबी मिटाने के लिए बेहद जरूरी हैं. 

विश्व बैंक के सुझाव
विश्व बैंक के अर्थशास्त्रियों जस्टिन-डैमियन ग्वेनेट, एम अहयान कोस और नाओटाका सुगावारा का मानना है कि केंद्रीय बैंकों को महंगाई को काबू करने के लिए अपने कदम उठाना जारी रखना चाहिए, लेकिन बिना ग्लोबल मंदी में जाए बिना, इसके लिए उन्होंने सुझावों की लिस्ट भी तैयार की है, जिसमें कुछ ये हैं

1. केंद्रीय बैंकों को अपनी पॉलिसी के फैसलों को बेहतर तरीके से से बताना चाहिए जिससे महंगाई को रोकने में मदद मिले और सख्ती को थोड़ा कम किया जा सके
2. एडवांस इकोनॉमी वाले केंद्रीय बैंकों को सख्ती को लेकर इसका ध्यान रखना चाहिए कि दूसरे देशों पर इसका क्या असर होगा. जबकि जबकि उभरते बाजारों को मैक्रो-प्रूडेंशियल नियमों को मजबूत करना चाहिए और विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाना चाहिए
3. वित्तीय अधिकारियों को मॉनिटरी पॉलिसी उद्देश्यों के साथ निरंतरता सुनिश्चित करते हुए सपोर्ट को सावधानी पूर्वक वापस लेना चाहिए 
 

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