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रेलवे का Bullet Train का सपना हुआ फेल, स्टडी के नाम पर करोड़ों रुपये बर्बाद, अब इस पर फोकस
रेलवे ने रूट की स्टडी की करने में भी करोड़ों रुपये बर्बाद कर दिए हैं. फिलहाल देरी के चलते देश के पहले बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की लागत में भी इजाफा हो गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः देश में मुंबई-अहमदाबाद रूट के अलावा अन्य राज्यों में बुलेट ट्रेन चलाने के मोदी सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट पर रेलवे बोर्ड ने ग्रहण लगा दिया है. इतना ही नहीं रेलवे ने रूट की स्टडी की करने में भी करोड़ों रुपये बर्बाद कर दिए हैं. फिलहाल देरी के चलते देश के पहले बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की लागत में भी इजाफा हो गया है. वहीं सरकार ने रेलवे बोर्ड ने अपना फोकस बुलेट ट्रेन से हटाकर के वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन पर लगा लिया है.
दिल्ली-वाराणसी प्रोजेक्ट पर लगा ग्रहण
PM Modi के ड्रीम प्रोजेक्ट जो दिल्ली को सीधे वाराणसी से जोड़ता उस पर रेलवे बोर्ड के सचिव आरएन सिंह की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में ब्रेक लग गया है. इस प्रस्तावित रूट पर ज्यादा मोड़ (Curve) होने की वजह से प्रोजेक्ट को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया है. इस प्रोजेक्ट की फिजिएबिलिटी रिपोर्ट को नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन ने तैयार किया था.
दिल्ली से लेकर के वाराणसी तक नेशनल हाईवे-2 के साथ-साथ इस बुलेट ट्रेन रूट को देखने के लिए कई सारे इंजिनियर्स और टेक्नीकल एक्सपर्ट की टीम ने काम किया था. कॉर्पोरेशन का तर्क था कि इससे सस्ती दर पर भूमि अधिग्रहण और निर्माण की लागत में कमी हो जाएगी.
ड्रोन की मदद से तैयार किया था रूट मैप
350 किमी की रफ्तार से चलने वाली ट्रेन को दिल्ली से नोए़डा, ग्रेटर नोएडा, जेवर, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, औरेया, कानपुर, प्रयागराज के रास्ते वाराणसी तक जाना था. हालांकि इस पूरे रूट पर कई जगह खतरनाक मोड़ पर रहे थे जिस वजह से इसको नहीं चलाया जा सकता है. रूट पर यमुना एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के किनारे पर भी ड्रोन और अन्य माध्यमों से रेलवे स्टेशन और प्रस्तावित रेलवे लाइन का मैप तैयार किया गया था.
सीधा होना चाहिए रेल ट्रैक
सूत्र ने कहा, "350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बुलेट ट्रेन चलाने के लिए हाई स्पीड कॉरिडोर का ट्रैक सीधा होना चाहिए।" जबकि NHSRCL परियोजना पर काम शुरू करने के लिए उत्सुक है, रेलवे बोर्ड इस मसले पर सावधानी बरत रहा है. इसमें यह बात सामने आती है कि क्या NHSRCL के अधिकारियों और इंजिनियरों को इतनी सी बेसिक बात की जानकारी नहीं थी, कि जो ट्रैक को घुमावदार नहीं बल्कि सीधा बनाना है.
लागत में हुआ इजाफा
मुंबई-अहमदाबाद परियोजना की अनुमानित लागत 1.50 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. अधिकारियों ने बताया कि हाई स्पीड कॉरिडोर बनाने पर प्रति किलोमीटर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं.
बुलेट ट्रेन नहीं, वंदे भारत पर फोकस करो
रेलवे बोर्ड ने सुझाव दिया है कि अभी के लिए 160- 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से केवल सेमी-हाई स्पीड वंदे भारत ट्रेनें चलाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए. अधिकारियों ने कहा कि लगभग 400 ऐसी ट्रेनें अगले तीन वर्षों में उपलब्ध होंगी और विभिन्न मार्गों पर इस्तेमाल की जा सकती हैं.
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