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पहली तिमाही में 28.3% बढ़ा देश का वित्तीय घाटा, फिर भी टेंशन की बात नहीं, जानिए क्यों

कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही अप्रैल-जून के दौरान देश का वित्तीय घाटा 3.52 लाख करोड़ रुपये रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही अप्रैल-जून के दौरान देश का वित्तीय घाटा 3.52 लाख करोड़ रुपये रहा है. ये पिछले साल इसी तिमाही के मुकाबले थोड़ा बढ़ा है. पिछले वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही में वित्तीय घाटा 2.74 लाख करोड़ रुपये रहा था. 

पहली तिमाही में वित्तीय घाटा 28.3% बढ़ा
कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही अप्रैल-जून के दौरान देश का वित्तीय घाटा 3.52 लाख करोड़ रुपये रहा है. जो कि पूरे साल के लक्ष्य का 21.2 परसेंट है. पिछले साल के मुकाबले पहली तिमाही में वित्तीय घाटा 28.3 परसेंट बढ़ा है. अभी तीन और तिमाहियों के आंकड़े आना बाकी है. वित्त वर्ष 2023 में
वित्तीय घाटे को लेकर सरकार का लक्ष्य 16.61 लाख करोड़ रुपये का है. 

वित्तीय घाटा बढ़ा, लेकिन अनुमान से कम
पहली तिमाही में वित्तीय घाटा बढ़ा जरूर है, लेकिन ये बढ़ोतरी अनुमान से काफी कम है. ये वित्तीय घाटा ज्यादा भी हो सकता था लेकिन सरकार को मिले ज्यादा टैक्स कलेक्शन और सब्सिडी कटौती के चलते पहली तिमाही में इसका फायदा मिला. महंगाई के चलते सरकार को ज्यादा GST कलेक्शन हुआ, आर्थिक गतिविधियां बढ़ने से कॉर्पोरेट टैक्स में भी अच्छा इजाफा देखने को मिला. दूसरी ओर सरकार ने फूड और फर्टिलाइजर पर सब्सिडी में कटौती की है. सरकार ने अप्रैल-जून तिमाही के दौरान सब्सिडी पर 68,000 करोड़ रुपये खर्च किए, जो कि पिछले साल इसी तिमाही में 1 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा था. 

वित्तीय घाटा बढ़ने की वजह 
आपको बता दें कि इस साल सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती फर्टिलाइज सब्सिडी को बढ़ाने का ऐलान किया, जिसका असर वित्तीय घाटे पर दिख रहा है. इसी साल 21 मई को केंद्र ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी को घटाया था. साथ ही किसानों के लिए फर्टिलाइजर सब्सिडी को भी बढ़ाने का फैसला लिया गया, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत मुफ्त अनाज देने की समयसीमा को बढ़ाकर 30 सितंबर 2022 कर दिया गया है. सरकार के इन कदमों के चलते वित्तीय घाटा बढ़ा. 

जून में वित्तीय घाटा हल्का घटा
अकेले जून महीने की बात की जाए तो सरकार का वित्तीय घाटा 1.51 लाख करोड़ रुपये से घटकर 1.48 लाख करोड़ रुपये रहा है. जून महीने में सरकार का सालाना आधार पर रेवेन्यू घाटा भी कम हुआ है, ये 1 लाख करोड़ रुपये से घटकर 82900 करोड़ रुपये रहा है. अर्थशास्त्री मानते हैं कि अकेले एक्साइज ड्यूटी में कटौती से वित्त वर्ष 2023 में सरकार की कमाई 80,000 करोड़ रुपये की गिरावट देखी जा सकती है. सिर्फ जून की बात करें तो एक्साइज ड्यूटी में कटौती की वजह से एक्साइज ड्यूटी कलेक्शन 30402 करोड़ रुपये रहा है जो कि पिछले साल के मुकाबले 1.8 परसेंट कम है.

हासिल हो सकता है वित्तीय घाटे का लक्ष्य 
बावजूद इसके वित्तीय घाटा उस रफ्तार से नहीं बढ़ा है, जिसकी आशंका थी. सरकार को भरोसा है कि आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियों के बावजूद मौजूदा वित्त वर्ष के लिए रखे गए वित्तीय घाटे के लक्ष्य 6.4 परसेंट को हासिल किया जा सकता है. आपको बता दें कि जून में GST टैक्स कलेक्शन 56 परसेंट बढ़कर 1.44 लाख करोड़ रुपये रहा है, जो कि अबतक का सबसे ज्यादा कलेक्श है. अप्रैल-जून तिमाही के दौरान डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में भी 41 परसेंट का उछाल देखने को मिला है और ये 3.54 लाख करोड़ रुपये रहा है. ऐसे में अगर सरकार आगे सब्सिडी पर खर्चे न बढ़ाए और एक्साइज में कोई कटौती न करे तो सरकार अपने वित्तीय घाटे के लक्ष्य को हासिल कर सकती है. 

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