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पहले सेबी अब IT डिपार्टमेंट का हवाला, क्या अडानी को रोक पाएगा NDTV?

अडानी समूह ने 23 अगस्त को वीसीपीएल के जरिए NDTV में 29.18 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा की थी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

जब से अडानी समूह ने NDTV में हिस्सेदारी खरीदी है, पूरे देश में चर्चा शुरू हो गई है. इसे जबरन अधिग्रहण का नाम दिया जा रहा है. वहीं, NDTV के संस्थापक भी इस कोशिश में लगे हैं कि किसी न किसी तरह ये डील रद्द हो जाए. इसलिए पहले वह सेबी को बीच में लाए और अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का हवाला दिया है.

जानकारी के अभाव का तर्क
अडानी समूह ने 23 अगस्त को वीसीपीएल के जरिए NDTV में 29.18 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा की थी. साथ ही अतिरिक्‍त 26 प्रतिशत हिस्‍सेदारी खरीदने के लिए समूह ओपन ऑफर ला रहा है. अडानी ग्रुप के हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा के तुरंत बाद NDTV के संस्थापकों की तरफ से कहा गया था कि उन्हें इस डील के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

लेनी होगी सेबी की मंजूरी 
वीसीपीएल की आरआरपीआर होल्डिंग में 99.99 फीसदी हिस्सेदारी है और आरआरपीआर होल्डिंग NDTV की प्रमोटर है. डील उजागर होते ही NDTV की तरफ से पहले कहा गया कि विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (वीसीपीएल) को पहले बाजार नियामक सेबी की मंजूरी लेनी होगी. इसके बाद ही वह आरआरपीआर होल्डिंग में हिस्सेदारी का अधिग्रहण कर सकती है. 

क्यों लाए सेबी को बीच में?
दरअसल, सेबी ने 27 नवंबर, 2020 को एक आदेश जारी कर एनडीटीवी के संस्थापकों राधिका रॉय और प्रणय रॉय पर दो साल के लिए रोक लगा दी थी. यह आदेश उन्‍हें शेयरों की खरीद-फरोख्‍त से रोकता है. इस प्रतिबंध की अवधि 26 नवंबर को समाप्त होनी है. इसी का हवाला देते हुए NDTV ने सेबी की मंजूरी की बात कही. मीडिया कंपनी के संस्थापकों का तर्क है कि चूंकि पाबंदी जारी है. ऐसे में वीसीपीएल के लिए वॉरंट को इक्विटी में बदलने के लिए सेबी से मंजूरी की ज़रूरी हो जाती है. लिहाजा, अब इस मामले में सेबी की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है.

क्यों किया IT डिपार्टमेंट का जिक्र?
सेबी के बाद अब NDTV के संस्थापक आयकर विभाग (Income Tax Department) को बीच में ले आए हैं. उनका कहना है कि एनडीटीवी में राधिका रॉय और प्रणय रॉय की हिस्सेदारी को आयकर विभाग ने अस्थायी तौर पर कुर्क कर रखा है. लिहाजा, उसके ट्रांसफर के लिए विभाग की मंजूरी जरूरी है. हालांकि, इस दलील को अडानी समूह ने खारिज करते हुए इसे इसे ‘गलत’ और ‘भ्रामक’ बताया है. 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
अब सवाल ये उठता है कि क्या इस तरह प्रणय और राधिका अडानी समूह को NDTV के अधिग्रहण से रोक सकते हैं? एक्सपर्ट्स की नज़र में इस सवाल का जवाब है 'नहीं'. उनका मानना है कि इस तरह अधिग्रहण को कुछ समय के लिए केवल टाला जा सकता है.
 


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