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Explainer: आखिर स्विस बैंक क्यों है काला धन जमा करने वालों का स्वर्ग?
स्विस बैंकों का अपने ग्राहकों की जानकारी गोपनीय रखने का इतिहास करीब 300 साल से ज्यादा पुराना है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
स्विस बैंक, ये नाम सुनते ही हमारे दिमाग में तुरंत ही ब्लैकमनी यानी कालाधन का ख्याल कौंधने लगता है, हमें लगता है कि दुनिया के जितने चोर बिजनेसमैन, घूसखोर नेता या फिर अपराधी टाइप के लोग हैं, जिन्होंने गलत तरीके से पैसा कमाया है वो अपनी अकूत काली दौलत इसी बैंक में जमा करते हैं. अगर ये कहें कि स्विस बैंक काले धन का पर्याय बन चुका है, तो गलत नहीं होगा. भारत में तो स्विस बैंक में काले धन के नाम पर सरकारें बनती और बिगड़ती हैं.
काले धन का पर्याय बने स्विस बैंक
तो आखिर ऐसा क्या है स्विस बैंक में जो सभी अपराधी और टैक्स चोर अपना पैसा यहां जमा करते हैं. क्या हम और आप इस बैंक में अपना पैसा जमा नहीं कर सकते, और क्या स्विस बैंक में जमा सारा पैसा ही काला धन है. अगर स्विस बैंक पड़ा पैसा काला धन है तो सरकारें क्यों नहीं उन लोगों के खातों की जानकारी निकालकर दोषी लोगों को सजा देती. दरअसल ये इतना आसान नहीं है.
स्विट्जरलैंड ने भेजी चौथी लिस्ट
लेकिन इसके पहले जान लीजिये कि एक बार फिर स्विस बैंक ने भारतीय खाताधारकों की लिस्ट जारी की है. भारत को मिलने वाली ये चौथी लिस्ट है. इसमें कई ट्रस्टों और कंपनियों के खाते भी शामिल है. सरकार ने इन खाता धारकों की लिस्ट सार्वजनिक नहीं की है क्योंकि इससे जांच पर विपरीत असर पड़ सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक स्विट्जरलैंड ने भारत समेत 101 देशों को 34 लाख अकाउंट होल्डर्स की लिस्ट शेयर की है. इनमें भारत के भी सैकड़ों लोगों के खाते शामिल हैं. स्विट्जरलैंड के फेडरल टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन (FTA) ने कहा कि भारत उन गिने-चुने देशों में शामिल है, जिसे लगातार चौथे साल अकाउंट होल्डर्स की लिस्ट भेजी गई है. FTA ने कहा कि सभी देशों को यह सूचना पिछले महीने भेजी गई थी. अब इस प्रकार की अगली सूचना सितंबर 2023 में भेजी जाएगी.
महज 86 लाख की आबादी वाले स्विट्जरलैंड में 400 के करीब बैंक मौजूद हैं. स्विस बैंक क्यों रईसों के लिए अपना पैसा छिपाने की पसंदीदा जगह है, इसके पीछे वजह है इन बैंकों की सख्त गोपनीयता पॉलिसी.
सख्त गोपनीयता पॉलिसी
स्विस बैंकों की गोपनीयता पॉलिसी के तहत वो अपने ग्राहकों की जानकारी किसी के साथ भी साझा नहीं करते हैं. स्विस बैंकों का अपने ग्राहकों की जानकारी गोपनीय रखने का इतिहास करीब 300 साल से ज्यादा पुराना है. साल 1713 में ग्रेट काउंसिल ऑफ जिनेवा ने स्विस बैंकों के लिये नियम बनाए थे, जिसके मुताबिक बैंक अपने ग्राहक के रजिस्टर या जानकारी सिटी काउंसिल के अलावा किसी और के साथ साझा नहीं करेगा. अगर बैंकर अपने ग्राहक से जुड़ी जानकारी किसी को देता है, तो ये अपराध की श्रेणी में गिना जाएगा. यानी कोई भी बैंक अधिकारी अपने किसी ग्राहक का नाम या दूसरी कोई भी जानकारी किसी के साथ भी शेयर नहीं कर सकता.
हालांकि जब वहां की अदालत आदेश दे तो स्विस बैंकों को ये जानकारियां साझा करनी पड़ती है. अदालतें भी ऐसा आदेश तभी देती हैं जब उस खाताधारक के खिलाफ कोई गंभीर आरोप हो. गोपनीयता के इतने सख्त नियमों के चलते ही ये दुनिया के रईसों को अपना पैसा स्विस बैंकों में रखने के लिए आकर्षित करता है. स्विस बैंक इन रईसों से उनके पैसों को लेकर कोई सवाल नहीं करता है, जैसे- ये पैसा कहां से आया, कहां से कमाया, क्या ये पैसा टैक्स चोरी का है, वगैरह-वगैरह.
लेकिन टैक्स चोरी, भ्रष्टाचार और आतंकी घटनाओं ने जब दुनिया भर के देशों को परेशान किया, तो शक की सुई स्विस बैंकों की ओर घूमी. स्विस बैंकों पर कई एक्टिविस्ट ग्रुप और देशों ने अकाउंट की जानकारी साझा करने का दबाव बनाया. साल 2008 की मंदी के दौरान भी अमेरिकी सरकार और यूरोपियन यूनियन की ओर से स्विस बैंक बैंकों पर दबाव बनाया गया कि वो रईस खाताधारकों के नामों का खुलासा करे. अब चूंकि स्विट्जरलैंड फॉरेट अकाउंट टैक्स कंप्लायंस एक्ट यानी FATCA का सिग्नेचरी है, जिसके तहत स्विस बैंक अमेरिकी खाताधारकों की जानकारी देने के लिए बाध्य हैं, नहीं तो उन पर कार्रवाई हो सकती है. ऐसा ही करार स्विस बैंकों का यूरोपीय यूनियन के साथ भी है. बावजूद इसके आज भी स्विस बैंक फाइनेंशियल सीक्रेसी इंडेक्स 2020 में तीसरे नंबर पर है.
Numbered Account क्या होता है
स्विस बैंक में खातों की गोपनीयता का स्तर ये है कि यहां पर एक खास किस्म का सीक्रेट अकाउंट भी खोला जाता है जिसे Numbered Account कहते हैं.
इसमें खाताधारक के नाम की जगह मल्टी डिजिट नंबर दिया जाता है. इस अकाउंट की जानकारी इतनी ज्यादा गोपनीय होती है कि इसकी जानकारी बैंक के कर्मचारियों को भी नहीं होती है, बैंक के कुछ टॉप अधिकारी ही नंबर्ड अकाउंट की जानकारी रखते हैं. बैंक स्टेटमेंट और बैंक अकाउंट होल्डर के नाम की जगह उसका नंबर सीक्रेट नंबर लिखा होता है. हालांकि ये अकाउंट आसानी से नहीं खुलवाया जा सकता है. इसके लिए अकाउंट होल्डर को खुद स्विस बैंक जाना पड़ता है. यही वो अकाउंट होता है जिसमें ज्यादातर कालाधन रखा जाता है. आमतौर पर बैंक में जब पैसा रखा जाता है तो बैंक ग्राहक को ब्याज देता है, लेकिन इन अकाउंट्स में पैसा रखने पर बैंक ग्राहकों से फीस चार्ज करता है.
यही वजह है कि दुनिया भर के रईस, जिसमें भारत भी शामिल है, इतनी सख्त गोपनीय पॉलिसी के चलते अपना पैसा स्विस बैंक में रखते हैं. हालांकि ये पैसा ब्लैक मनी है या नहीं, इसे लेकर कोई पुख्ता दावा नहीं कर सकता. अक्सर दावा किया जाता है कि स्विस बैंकों में भारतीयों ने बड़ी मात्रा में काला धन जमा, लेकिन सरकार का कहना है कि स्विस बैंकों में भारतीयों का कितना पैसा जमा है, इस बारे में कोई सरकारी अनुमान नहीं है.
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