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ED क्यों नहीं चाहता NSE की पूर्व MD को मिले जमानत, क्यों गिरफ्तार हैं चित्रा रामकृष्ण?
प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने दिल्ली उच्च न्यायालय में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की पूर्व एमडी चित्रा रामकृष्ण की जमानत याचिका का विरोध किया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अवैध फोन टैपिंग से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की पूर्व एमडी चित्रा रामकृष्ण (Chitra Ramkrishna) की जमानत याचिका का विरोध किया है. ED ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि चित्रा आपराधिक साजिश की सरगना हैं और जमानत मिलने पर वह केस को प्रभावित कर सकती हैं. इसलिए उन्हें जमानत नहीं दी जानी चाहिए.
रामकृष्ण ने दी मंजूरियां
ED ने न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की अदालत में कहा कि फोन पर की गई बातचीत सुनने या और उसकी निगरानी का प्रस्ताव रामकृष्ण के जरिए आगे बढ़ाया गया था, जो उस समय NSE की उप प्रबंध निदेशक थीं. उन्होंने ही निगरानी के लिए टेलीफोन नंबर और कर्मचारियों की पहचान की थी. जांच एजेंसी ने कोर्ट को यह भी बताया कि सभी मंजूरियां या तो उनके जरिए दी गईं या उन्होंने खुद दी थीं.
इन लोगों का भी नाम
ED का यह भी कहना है कि उसके पास कई लोगों के बयान हैं, जो उस वक्त NSE में काम कर रहे थे. उन सभी ने बताया कि रामकृष्ण ने ही टेलीफोन नंबर और कर्मचारियों की पहचान की थी. जब इन लोगों का उनसे आमना-सामना कराया गया, तो रामकृष्ण ने यह बात स्वीकार की. उन्होंने आरोपों से इनकार नहीं किया. पूरी आपराधिक साजिश की सरगना रामकृष्ण की हैं, इसलिए उन्हें जमानत नहीं मिलनी चाहिए.
क्या है मामला?
यह मामला कुछ साल पहले का है. ED के मुताबिक, 2009 से 2017 से बीच NSE के कर्मचारियों की अवैध रूप से फोन टैपिंग कराई गई. इस मामले में एनएसई के पूर्व सीईओ रवि नारायण, रामकृष्ण, कार्यकारी उपाध्यक्ष रवि वाराणसी, महेश हल्दीपुर का भी नाम सामने आया है. आरोप है कि सभी ने मिलकर NSE कर्मचारियों से धोखाधड़ी की कथित साजिश रची थी. रामकृष्ण को CBI ने सबसे पहले गिरफ्तार किया था. बाद में 14 जुलाई को ईडी ने हिरासत में ले लिया.
क्या है मनी लॉन्ड्रिंग?
मनी लॉन्ड्रिंग का तात्पर्य अवैध ढंग से कमाए गए धन को, वैध तरीके से कमाए गए धन के रूप में दिखाना है. दूसरे शब्दों में कहें तो मनी लॉन्ड्रिंग अवैध रूप से प्राप्त पैसे को छुपाने का एक तरीका है. इसके माध्यम से धन इस तरह निवेश किया जाता है कि कोई भी धन के मुख्य सोर्स का पता नही लगा पाए. जो व्यक्ति धन की हेराफेरी करता है उसे launderer कहा जाता है. यह ब्लैक मनी को सफेद करने की एक गैर-कानूनी प्रक्रिया है. कहा जाता है कि 'मनी लॉन्ड्रिंग' शब्द की उत्पत्ति अमेरिका में माफिया समूहों से हुई थी.
क्या है सजा का प्रावधान?
मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत दोषी पाए जाने पर अपराधी के पैसे जब्त कर लिए जाते हैं. सरकार अवैध ढंग से कमाए पैसों के जरिए बनाई गई संपत्ति को भी कुर्क कर लेती है. इसके अलावा मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत दोषी पाए जाने पर अपराधी को सजा का प्रावधान भी है.
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