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गोपीनाथ मुंडे वाली ‘भूल’ कर गए साइरस मिस्त्री, इस बात को लेकर छिड़ी बहस

कार की पिछली सीट पर बैठने वालों के बेल्ट न पहनने की दो सबसे बड़ी वजह हैं. पहली जागरुकता की कमी और दूसरी पुलिस का ढीला रवैया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई है. इस दुर्घटना की वजह ओवरस्पीडिंग को बताया जा रहा है. साइरस मिस्त्री तीन अन्य लोगों के साथ अपनी मर्सडीज कार में सवार थे. ये कार गुजरात से मुंबई जा रही थी, लेकिन डेस्टिनेशन पर पहुंचने से पहले ही एक्सीडेंट में मिस्त्री सहित दो लोगों की मौत हो गई. इस हादसे ने सीट बेल्ट को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है. 

फ्रंट सीट से टकराए सिर  
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि पिछली सीट पर बैठे साइरस मिस्त्री और उनके दोस्त जहांगीर दिनशॉ पंडोले ने सीट बेल्ट नहीं लगाई थी. इसके अलावा, पिछली सीट के एयरबैग भी समय पर नहीं खुले. इस वजह से जब एक्सीडेंट हुआ, तो मिस्त्री और जहांगीर को सबसे ज्यादा चोटें आईं. उनके सिर फ्रंट सीट से इतनी तेजी से टकराए कि दोनों की मौत हो गई. यदि पिछली सीट पर बैठे पैसेंजर्स ने सीट बेल्ट लगाई होती, तो शायद उनकी जान बच सकती थी.

अधिकांश नहीं लगाते सीट बेल्ट
अब इसे मिस्त्री की लापरवाही कहें या कुछ और, लेकिन कार में पिछली सीट पर बैठने वाले अधिकांश यात्री सीट बेल्ट इस्तेमाल नहीं करते. न ही इसे लेकर ट्रैफिक पुलिस ज्यादा कोई सख्ती बरती जाती है. कुछ साल पहले हुए एक सर्वे में सामने आया था कि कार में आगे बैठने वाले केवल 25 फीसदी और पीछे बैठने वाले महज 4 फीसदी लोग ही सीट बेल्ट का इस्तेमाल करते हैं. सर्वे रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि एसयूवी चलाने वाले 77%, हैचबैक चलाने वाले 72%, सेडान चलाने वाले 68% और लग्जरी कार चलाने वाले 59% लोगों को सीट बेल्ट पहनना पसंद नहीं. 

पुलिस का ढीला रवैया
कार की पिछली सीट पर बैठने वालों के बेल्ट न पहनने की दो सबसे बड़ी वजह हैं. पहली जागरुकता की कमी और दूसरी पुलिस का ढीला रवैया. लोगों को लगता है कि कार में दी गईं पिछली बेल्ट केवल दिखावे के लिए हैं. यानी इन्हें लगाओ या न लगाओ कोई फर्क नहीं पड़ता, जबकि नियम के अनुसार अगर गाड़ी में पीछे सीट बेल्ट है, तो उसे पहनना अनिवार्य है और ऐसा न करने की सूरत में ट्रैफिक पुलिस चालान भी काट सकती है. आजकल नई गाड़ियों में पीछे सीट बेल्ट दी जाने लगी हैं.    

अब मिलेगी एक और बेल्ट 
आजकल की कारों में फ्रंट की तरह रियर सीट पर भी दो सीट बेल्ट होती हैं, जबकि पीछे तीन लोग बैठ सकते हैं. ऐसे में बीच में बैठने वाले यात्री की सुरक्षा का क्या? इस सवाल का जवाब सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इसी साल फरवरी में दिया था. उन्होंने बताया था कि सरकार ने व्हीकल मैनुफैक्चरर्स को कार में बैठने वाले सभी यात्रियों के लिए थ्री-पॉइंट सीट बेल्ट मुहैया कराना अनिवार्य कर दिया है. इसका मतलब है कि पिछली सीट के बीच में बैठे तीसरे व्यक्ति को भी सीट बेल्ट मिलेगी. उन्होंने कहा था कि लोगों की सुरक्षा को देखते हुए सीट बेल्ट की संख्या बढ़ाने का फैसला लिया गया है.

गोपीनाथ मुंडे भी हुए थे शिकार 
2014 में केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे की कार हादसे में मौत हो गई थी. दुर्घटना के समय मुंडे पीछे की सीट पर बैठे थे और उन्होंने सीट बेल्ट नहीं लगाई थी. इस हादसे के बाद रिअर सीट बेल्ट को लेकर जबरदस्त बहस छिड़ी थी. बड़े शहरों में ट्रैफिक पुलिस ने लोगों को जागरुक करने के लिए बकायदा कैंपेन भी चलाया था, लेकिन कैंपेन के बंद होते ही लोगों जागरुकता भी हवा हो गई. आजकल स्थिति ये है कि पीछे बैठने वाले 10 यात्रियों में से शायद कोई एक ही सीट बेल्ट इस्तेमाल करता होगा.

इसलिए ज़रूरी है बेल्ट पहनना
कुछ साल पहले आई एक अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट में बताया गया था कि यदि फ्रंट सीट पर बैठने वाले सीट बेल्ट लगाएं तो दुर्घटना के समय मौत का खतरा 40-50 प्रतिशत कम हो जाता है. वहीं, अगर कार की पिछली सीट पर बैठने वाले लोग सीट बेल्ट इस्तेमाल करें, तो यह खतरा 75% तक कम हो जाता है. बेल्ट नहीं लगाने पर दुर्घटना के समय झटका लगता है, जिससे रीढ़ की हड्डी और गर्दन के जोड़ में चोट आती है. झटका लगने के कारण लीवर भी फट सकता है. इतना ही नहीं हार्ट अटैक की आशंका भी बढ़ जाती है. 

इसलिए बची अनाहिता की जान
जानकारी के अनुसार, साइरस और जहांगीर ने सीट बेल्‍ट्स नहीं पहनी थीं जिसके चलते एयर बैग्‍स खुल पाने से पहले ही उनके सिर फ्रंट सीट्स से टकरा गए. सिर पर लगी गंभीर चोटों की वजह से उनकी मौत हो गई. पुलिस ने कहा कि कार चला रहीं डॉक्टर अनाहिता और उनके पति दारियस पंडोले की जान इसलिए बच गई, क्‍योंकि उन्‍होंने सीट बेल्‍ट पहन रखी थी और उनके एयरबैग्‍स टाइम पर खुले.


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