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कितना पावरफुल होता है विपक्ष के नेता का पद, जिस पर राहुल को बैठाने की उठ रही मांग?

कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लोकसभा में विपक्ष का नेता बनाए जाने की मांग हो रही है. यह पद पिछले दो बार से खाली पड़ा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस काफी मजबूत बनकर सामने आई है. पार्टी ने पिछले दो चुनावों से बेहतर प्रदर्शन इस बार किया है. राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की अगुवाई में कांग्रेस को अपने दम पर 99 सीटें मिली हैं. जबकि इंडिया गठबंधन के खाते में 234 सीटें आई हैं. भले ही इंडिया गठबंधन सरकार बनाने के लिए बहुमत के आंकड़े से दूर रह गया है, लेकिन विपक्ष के तौर पर उसकी स्थिति मजबूत हुई है. चूंकि इस गठबंधन में कांग्रेस सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली पार्टी बनी है, इसलिए माना जा रहा है कि लोकसभा में विपक्ष का नेता राहुल गांधी को चुना जा सकता है. लीडर ऑफ अपोजिशन का यह पद बेहद महत्वपूर्ण होता है और इस पर काबिज सांसद को कई सुविधाएं भी मिलती हैं. 

कैबिनेट मंत्री का होगा रुतबा
लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद पिछली 2 बार से खाली पड़ा है. क्योंकि विपक्षी दल के पास इसे भरने के लिए जरूरी सीटें नहीं थीं. अब स्थिति पूरी तरह से बदल गई है, इसलिए इस पद पर राहुल गांधी को बैठाने की मांग जोर पकड़ रही है. लीडर ऑफ अपोजिशन कैबिनेट स्तर का पद है. शुरुआत में यह कोई औपचारिक पद नहीं था. 1969 में विपक्ष के नेता पर आधिकारिक सहमति बनी और उसके अधिकार तय हुए. इस पद पर बैठे व्यक्ति का रुतबा कैबिनेट मंत्री से कम नहीं होता. उसे कैबिनेट मंत्री के बराबर ही वेतन, भत्ते और बाकी सुविधाएं मिलती हैं. यानी राहुल गांधी यदि विपक्ष के नेता चुने जाते हैं, तो उन्हें मोदी सरकार के मंत्री जैसी ही सुविधाएं मिलेंगी.

अब नियम नहीं आएगा आड़े
लीडर ऑफ अपोजिशन सदन में केवल विपक्ष का चेहरा ही नहीं होता, बल्कि कई अहम समितियों का सदस्य भी होता है. ये समितियां कई केंद्रीय एजेंसियों, जैसे कि ED, CBI, सेंट्रल इंफॉर्मेशन कमीशन और सेंट्रल विजिलेंस कमीशन के प्रमुखों को चुनने का काम करती हैं. इसका मतलब ये हुआ कि विपक्ष के नेता के रूप में राहुल इन एजेंसियों के चीफ के चुनाव में भी भूमिका निभाएंगे. 2014 के बाद से यह महत्वपूर्ण पद खाली पड़ा है. उस समय हुए चुनाव में कांग्रेस को महज 44 सीटें मिली थीं. जबकि पिछले चुनाव में कांग्रेस के पास 52 सीटें आई थीं. नियम के अनुसार, विपक्ष का नेता बनने के लिए किसी पार्टी के पास लोकसभा में 10% सीटें यानी 54 सीटें होनी ही चाहिए. इस बार कांग्रेस की सीटों का आंकड़ा बढ़कर 99 हो गया है. इसलिए विपक्ष के नेता का पद हासिल करने में नियम आड़े नहीं आएगा.

सीधे PM से कर पाएंगे सवाल
राहुल गांधी ने 2004 में राजनीति में एंट्री ली थी. उन्होंने अब तक किसी भी संवैधानिक पद पर काम नहीं किया है. जब उनकी पार्टी सत्ता में थी, तब भी उन्होंने कोई संवैधानिक पद ग्रहण नहीं किया. 2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद राहुल ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. पिछले साल उन्हें मानहानि के मामले में संसद से निष्कासित कर दिया गया था. प्रधानमंत्री के उपनाम का मजाक उड़ाने को लेकर उन्हें सजा सुनाई गई थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें राहत मिली और उनकी सांसदी भी वापस मिल गई. इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन ने राहुल गांधी की क्षमता पर उठते सवालों पर विराम लगा दिया है. यदि विपक्ष के नेता के रूप में राहुल के नाम सहमति बनती है, तो सीधे पीएम मोदी से सवाल करने की भूमिका में आ जाएंगे. 


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