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Climate Change ने बिगाड़ दिया इस बार कपास का उत्पादन, भारत में भी ऐसे पड़ा असर

विश्व के प्रमुख कपास उत्पादक देश जैसे की भारत, ब्राजील, चीन और अमेरिका में कपास की खेती पर इस साल भयंकर सूखे और गर्मी की मार पड़ी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्लीः जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) की वजह से पूरे विश्व में कॉटन (कपास) के उत्पादन पर बड़ा असर देखने को मिल रहा है. विश्व के प्रमुख कपास उत्पादक देश जैसे की भारत, ब्राजील, चीन और अमेरिका में कपास की खेती पर इस साल भयंकर सूखे और गर्मी की मार पड़ी है, जिसके कारण खेती 30 फीसदी से अधिक चौपट हो गई है. इसका असर आने वाले दिनों में कपड़ों, डायपर, कागज और कार्डबोर्ड जैसी वस्तुओं पर पड़ने वाला है, जिसमें मुख्यतः कॉटन का इस्तेमाल होता है.  

भारत में बारिश तो अन्य जगह सूखे और गर्मी ने बिगाड़ा उत्पादान

भारत में भारी बारिश और कीटों ने कपास की फसलों को इतना नुकसान पहुंचाया है कि अब भारत कॉटन आयात कर रहा है. चीन में गर्मी के चलते वहां आने वाली फसल को लेकर चिंता बढ़ रही है. अमेरिका जो कपास का सबसे बड़ा निर्यातक देश है, वहां एक बिगड़ता सूखा खेतों को तबाह कर रहा है और एक दशक से अधिक समय में उत्पादन को सबसे निचले स्तर पर ले जाने के लिए तैयार है. वहीं ब्राजील जो दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक, अत्यधिक गर्मी और सूखे से जूझ रहा है, जिसने पहले ही पैदावार में लगभग 30% की कटौती की है. 

कीमतों में हुई बढ़ोतरी

कॉटन की कीमतों में विश्वव्यापी 30 फीसदी से अधिक की वृद्धि अभी हो चुकी है, जिसके आगे और बढ़ने की संभावना है. अगर विश्व के अन्य देशों में मौसम सुधरता है तो फिर कपास की खेती की पैदावार में इजाफा हो सकता है. हालांकि अभी एक्सपर्ट इस पर अंदेशा जता रहे हैं. कपास की कीमतों में यह 2011 के बाद सबसे ज्यादा बढ़ोतरी है. इसका असर आम जनता पर भी अत्याधिक पड़ने की संभावना है. 

यहां भी बारिश ने बिगाड़ा खेल

मौसम ने दुनिया के कपास खरीदारों के लिए दूसरा सिरदर्द बना दिया है. प्लेक्सस कॉटन लिमिटेड के निदेशक पीटर एग्ली ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान और यहां तक ​​कि ब्राजील सहित क्षेत्रों में बेमौसम बारिश ने भी स्टॉक की गुणवत्ता को कम कर दिया है.

ब्राजील के हाल सबसे बुरे

ब्राजील में उत्पादकों का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह अबरापा के अनुसार, सूखे ने पहले ही अनुमानित 200,000 मीट्रिक टन आपूर्ति को कम कर दिया है. देश की 2021-2022 की फसल पूरी होने के करीब, उत्पादन अब 2.6 मिलियन टन - या उससे कम देखा जा रहा है,

ब्राजील के सबसे बड़े कपास उत्पादकों में से एक, बोम फुतुरो समूह जो देश के रोपित क्षेत्र का लगभग 10 फीसदी हिस्सा रखते हैं, उन्होंने पिछले सीजन की तुलना में पैदावार में 27% की गिरावट देखी है. बाहिया राज्य के साओ डेसिडरियो में एक उत्पादक जूलियो सीजर बुसाटो को भी इसी तरह की गिरावट का सामना करना पड़ा है. उन्होंने कहा कि सूखा कपास के बालियों की संख्या को कम कर रहा है, जिससे वे देश के सभी प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में हल्की हो गईं हैं.

इस साल बढ़ा रहे हैं रकबा

ब्राजील के किसान 2022-2023 सीजन के लिए अपने कपास उगाने वाले क्षेत्रों को 100,000 हेक्टेयर से बढ़ाकर 1.7 मिलियन हेक्टेयर करने के लिए तैयार हैं. 

भारत के प्रमुख इलाकों में बारिश से फसल बर्बाद

भारत में कपास की मुख्य खेती मध्य प्रदेश में होती है. महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा जैसे प्रमुख कॉटन उत्पादक राज्यों में मॉनसून जैसे-जैसे आगे बढ़ा है, बुआई की गतिविधि पिछले साल की तुलना में बेहतर हुई है. 15 जुलाई तक देशभर में कपास की बुआई 102.8 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी. बारिश के चलते यहां फसल बर्बाद हो चुकी है. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार इस बार कपास का उत्पादन 35.24 मिलियन गांठ से घटकर 31.2 मिलियन गांठ (प्रत्येक 170 किलोग्राम) होने की उम्मीद है. मतलब किसानों पर बारिश की वजह से इस बार मार पड़ेगी और साथ ही लोगों को भी महंगा सामान मिलेगा. 

कपास के भाव में बढ़ोतरी शुरू

शॉर्ट टर्म में घरेलू हाजिर बाजार में कॉटन का भाव 45,455 रुपये से 47,500 रुपये प्रति के दायरे में कारोबार करेगा. हालांकि कटाई की शुरुआत के साथ ही भाव धीरे-धीरे कम होने लग जाएगा और एक बार फिर भाव 40,000 रुपये के नीचे लुढ़क सकता है. उसके नीचे जाने पर भाव 35,000 रुपये प्रति गांठ के आस-पास पहुंच सकता है. जानकारों का कहना है कि निचले स्तर तक जाने के लिए भाव को 45,455 रुपये के नीचे गिरना होगा.

अगस्त में 8 फीसदी बढ़ा कॉटन का भाव

ओरिगो ई मंडी के असिस्टेंट जनरल मैनेजर (कमोडिटी रिसर्च) तरुण तत्संगी के मुताबिक आईसीई कॉटन में आई मजबूती के साथ ही देश में कपास उत्पादक इलाकों में भारी बारिश और कीड़ों की वजह से फसल खराब होने की खबरों के चलते भारतीय हाजिर बाजार में कॉटन की कीमतों में 46,000 रुपये प्रति गांठ के ऊपर मजबूती देखने को मिली थी. उनका कहना है कि अगस्त में अभी तक कॉटन की कीमतों में करीब 8 फीसदी की तेजी आ चुकी है. तरुण तत्संगी का कहना है कि लगातार बारिश ने कपास की फसल पर नकारात्मक असर पड़ा है और ऐसा लग रहा है कि कॉटन की कीमतों ने इस साल देश में अनुमानित ज्यादा फसल के आंकड़े को नजरअंदाज कर दिया है.

21 फीसदी बढ़ा आईसीई कॉटन दिसंबर वायदा

पिछले एक पखवाड़े में आईसीई कॉटन दिसंबर वायदा का भाव 21 फीसदी बढ़ चुका है और भाव ने पिछले हफ्ते की साप्ताहिक बंदी 116.01 सेंट प्रति पाउंड से पहले 8 हफ्ते की ऊंचाई 119.59 सेंट प्रति पाउंड को छू लिया था. तरुण तत्संगी कहते है कि अमेरिका में कपास की फसल और एंडिंग स्टॉक में तेज गिरावट की आशंका के चलते कीमतों में मजबूती देखने को मिली है. उनका कहना है कि सामान्तया कच्चे तेल में गिरावट और अमेरिकी डॉलर में मजबूती की वजह से कॉटन की कीमतों में गिरावट देखने को मिलती है. हालांकि अभी कच्चा तेल और अमेरिकी डॉलर का कॉटन के साथ यह संबंध टूटा हुआ दिखाई पड़ रहा है. उनका कहना है कि अमेरिकी डॉलर में जहां पहले कमजोरी देखने को मिली थी, वहीं बाद में मंदी के भय के चलते मजबूती देखने को मिल रही है.  

कपास का रकबा बढ़ा

तरुण तत्संगी के मुताबिक अमेरिका में कपास की फसल कमजोर रहने के साथ ही भारतीय फसल के आंकड़ों के बारे में अनिश्चितता की वजह से शॉर्ट टर्म में कॉटन की कीमतों में भारी उठापटक का माहौल रहेगा. घरेलू बाजार में इस महीने के आखिर तक या अगले महीने की शुरुआती 15 दिन के भीतर बहुत कुछ स्पष्ट हो जाएगा लेकिन अमेरिका में कपास की फसल ऐतिहासिक स्तर पर कमजोर रहने से वैश्विक बाजार पर इसका निश्चित रूप से नकारात्मक असर पड़ेगा. ताजा आंकड़ों के मुताबिक पिछले हफ्ते तक देशभर में कपास की बुआई 123.10 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जो कि पिछले साल की समान अवधि की 116.2 लाख हेक्टेयर की तुलना में 6 फीसदी ज्यादा है.  
 

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