होम / एक्सप्लेनर / क्या भारत का रुपया बन सकता है ग्लोबल और रिजर्व करेंसी? यहां है इस सवाल का जवाब

क्या भारत का रुपया बन सकता है ग्लोबल और रिजर्व करेंसी? यहां है इस सवाल का जवाब

लेकिन अगर हम प्रयास करें तो ऐसा होना संभव भी है. आरबीआई ने हाल ही में रुपये को वैश्विक पेमेंट के मोड तौर पर करने की सुविधा दे दी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्लीः (आर पी गुप्ता) क्या भारत का रुपया विश्व में पाउंड या डॉलर की तरह एक वैश्विक या फिर रिजर्व करेंसी बन सकता है? ये एक ऐसा सवाल है जिसका उत्तर भविष्य के गर्त में छुपा है. लेकिन अगर हम प्रयास करें तो ऐसा होना संभव भी है. आरबीआई ने हाल ही में रुपये को वैश्विक पेमेंट के मोड तौर पर करने की सुविधा दे दी है. ऐसे में अब भारत को किसी भी वस्तु का आयात या निर्यात करने पर रुपये में पेमेंट करने या फिर लेने की सुविधा मिल गई है. मतलब अब भारतीय डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करके रुपये में कारोबार कर सकेंगे. 

रुपये को करना होगा स्थिर

गिरते रुपया की पिछली विरासत अन्य देशों को रुपया भुगतान स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहित नहीं कर सकती है. रुपया पूरी तरह से परिवर्तनीय नहीं है. लेकिन रूस जैसे मित्र देशों के लिए, जो संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं, रुपये में द्विपक्षीय व्यापार एक अच्छा विकल्प है. इससे आज दोनों देशों में अमेरिकी डॉलर की मांग कुछ हद तक कम हो गई है.

हालांकि ग्लोबल और रिजर्व करेंसी की स्थिति प्राप्त करने के लिए भारत को कुछ फाइनेंशियल इनोवेशन के साथ एक अच्छी तरह से डिजाइन की गई रणनीति की आवश्यकता है, जैसा कि यूएसए द्वारा 1945 में किया गया था. भारत में ऐसी गुप्त क्षमता है जो इन सुधारों को कर सकती है. पर इससे पहले इसके लिए आइए हम ग्लोबल करेंसी के इतिहास में झांकें.

1945 में शुरू हुआ था डॉलर का प्रभुत्व

1930 के दशक में भारी मंदी के बाद, संयुक्त राज्य अमेरिका के केंद्रीय बैंक के पास सोने का सबसे बड़ा भंडार था, जबकि अन्य केंद्रीय बैंकों के पास सोने का स्टॉक समाप्त हो गया था; जिसने वैश्विक व्यापार में एक बड़ी बाधा उत्पन्न की.इसलिए 1944 में, पश्चिमी देशों के बीच एक समझौता किया गया, जिसे "ब्रेटन वुड समझौता" (Bretton Wood Agreement) के रूप में जाना जाता है. इसके द्वारा, यूएस डॉलर (यूएसडी) को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और अन्य लेनदेन के लिए ग्लोबल करेंसी के रूप में स्वीकार किया गया था. अमेरिकी डॉलर के बदले सोने की कीमत 35 डॉलर प्रति औंस तय की गई थी. इस प्रकार, USD का प्रभुत्व 1945 में शुरू हुआ. 

सोने की कीमत कम रखने के लिए बना था गोल्ड पूल

1961 में सोने की कीमत में किसी भी बड़े उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए लंदन में "गोल्ड पूल" का गठन किया गया था. हालांकि, मार्च 1968 में सोने के बाजार को एक मुक्त फ्लोटिंग मूल्य के साथ उदार बनाया गया था. सोने के साथ अमेरीकी डॉलर की विनिमय दर को रीसेट करने के बाद अमेरिकी बैंकों में सोने का भंडार घटने लगा. अंततः अगस्त 1971 में ब्रेटन वुड्स समझौता ध्वस्त हो गया. 

उस समय तक, संयुक्त राज्य अमेरिका ने पहले ही रक्षा, स्पेस और इनोवेशन जैसे आर्थिक और रणनीतिक मोर्चों पर अपना वर्चस्व हासिल कर लिया था. इसकी अर्थव्यवस्था का आकार भी सबसे बड़ा था. इसलिए,अमेरिकी डॉलर का प्रभुत्व प्रबल रहा. यह वास्तव में विश्व अर्थव्यवस्था में अपना प्रभुत्व स्थापित करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका की एक मास्टर रणनीति थी.

तेल की खरीद में होने लगा था डॉलर का प्रयोग

इसके बाद, संयुक्त राज्य अमेरिका ने प्रमुख तेल उत्पादक देशों को अमेरीकी डॉलर में तेल का व्यापार करने के लिए मजबूर किया. तेल, आधुनिक अर्थव्यवस्था का नया सोना होने के कारण, अमेरिकी डॉलर को भारी मजबूती प्रदान कर रहा है. यह संयुक्त राज्य अमेरिका की एक और मास्टर रणनीति थी जिसने अमेरिकी डॉलर को मजबूती प्रदान की.

इंटरनेशनल करेंसी में शुरू हुआ निपटान

हाल ही में यूरो, ब्रिटिश पाउंड, जापानी येन, जर्मनी मार्क, स्विस फ्रैंक, चीन आरएमबी आदि जैसी अन्य करेंसी में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निपटान शुरू हुआ. वर्तमान में, लगभग 80-90% व्यापार लेनदेन और लगभग 60-65% फॉरेक्स व्यापार अमेरीकी डॉलर में होता हैं. विदेशी मुद्रा भंडार विभिन्न राष्ट्रों द्वारा केवल यूएसडी में रखा जाता है. इस तरह की वित्तीय रणनीति ने निश्चित रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका को दीर्घकालिक लाभ दिया है.

वर्तमान में, संयुक्त राज्य अमेरिका में उच्च मुद्रास्फीति के बावजूद यूएसडी ताकत हासिल कर रहा है जो कि स्थापित मानदंडों के विपरीत है. 2007-08 में, वैश्विक मंदी की उत्पत्ति संयुक्त राज्य अमेरिका में हुई थी. तब पूरी दुनिया ने अमेरिकी डॉलर के मूल्य का बचाव किया, ताकि सभी देशों द्वारा अमेरिकी डॉलर में रखे गए फॉरेन करेंसी रिजर्व के मूल्य की रक्षा की जा सके. 

चीन व रूस ने किया था नई करेंसी लाने का प्रयास

2009 में चीन और रूस ने एक नई रिजर्व करेंसी विकसित करने का प्रयास किया. 2016 में, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की बढ़ी हुई मात्रा के साथ, चीनी आरएमबी दुनिया की आरक्षित मुद्राओं में से एक बन गया. IMF के अनुसार,दिसंबर 2019 में दुनिया के केंद्रीय बैंकों के पास 217 बिलियन डॉलर मूल्य का RMB था. यह अमेरिकी डॉलर में रखे गए 6.7 ट्रिलियन डॉलर के भंडार का एक अंश है. 

हालांकि, चीन तब से बहुत अच्छे तरीके से सफल नहीं हो सका है क्योंकि यह एक लोकतांत्रिक राष्ट्र नहीं है और आर्थिक आंकड़ों में गैर-पारदर्शिता और क्षेत्र के विस्तार के लिए इसकी नीति के कारण यह समान वैश्विक विश्वास का आनंद नहीं लेता है. हालांकि, अपनी आर्थिक शक्ति के आधार पर, आरएमबी भविष्य के वर्षों में अमेरीकी डॉलर के बाद हावी हो सकता है.

भारतीय रुपये की वैश्विक ट्रेडिंग करना ऐसे होगा आसान

भारत के पास एक लोकतांत्रिक राष्ट्र होने के नाते, वैश्विक विश्वास प्राप्त देश है और इसे संरक्षित किया जाना चाहिए. भारत के पास "निजी सोने" का सबसे बड़ा भंडार भी है जिसे लेखक ने अपनी पुस्तक टर्न अराउंड इंडिया -2020 में सुझाया है, जिसका एक अभिनव तरीके से लाभ उठाया जाना चाहिए.

भारत में एक छिपी और विशाल विकास क्षमता है जिसे अनलॉक किया जाना चाहिए. भारत में बेहतर डीएनए के साथ एक बड़ा कार्यबल है जिसे उत्पादक गतिविधियों में लाभकारी रूप से शामिल किया जाना चाहिए. भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सुधार करना चाहिए और स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स के माध्यम से मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखना चाहिए. भारत को ट्रेड सरप्लस और निवेश के लिए इंवेस्टमेंट फ्रेंडली  राष्ट्र के रूप में परिवर्तित किया जाना चाहिए जो सफलता की कुंजी है.

उपरोक्त उपलब्धियों के साथ, भारतीय रुपया निश्चित रूप से वैश्विक और आरक्षित मुद्रा के रूप में स्वीकार किया जा सकता है. भारत को अपनी मानसिकता बदलनी चाहिए जो निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कुछ हद तक कमजोर रुपये के पक्ष में झुकी हुई है. 

अस्वीकरण: उपरोक्त लेख में व्यक्त विचार लेखकों के हैं और यह आवश्यक रूप से इस प्रकाशन गृह के विचारों का प्रतिनिधित्व या प्रतिबिंबित नहीं करते हैं. जब तक अन्यथा उल्लेख नहीं किया जाता है, लेखक अपनी व्यक्तिगत क्षमता में लिख रहा है. 

VIDEO: फेस्टिव सीजन में और महंगा होगा आटा, गेहूं की कीमतों में हुई बढ़ोतरी

 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

क्या है 65 साल पुराना सिंधु जल समझौता, जिससे पाकिस्तान में मचेगा हाहाकार, कितना होगा असर?

भारत ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ 1960 से चले आ रहे जल समझौते का बोझ आगे नहीं ढोएगा, जब तक पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद को प्रभावी रूप से बंद नहीं कर देता है.

24-April-2025

अमेरिका के टैरिफ लगाने से भारत के किस सेक्टर्स पर क्या होगा असर? जानिए डिटेल्स

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया को बड़ा झटका दिया है. ट्रंप ने भारत समेत कई देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है. जिससे भारत के निर्यात पर गहरा असर देखने को मिल सकता है.

03-April-2025

भारत की तरक्की को कई गुना बढ़ा रही महिला एंटरप्रेन्योर, NeoGrowth की रिपोर्ट में आया सामने

3,000 से अधिक महिला उद्यमियों के सर्वेक्षण पर आधारित इस रिपोर्ट में महिलाओं की व्यापारिक सफलता और उनके सामने आने वाली चुनौतियों दोनों को दिखाया गया है.

06-March-2025

अडानी परिवार की शादी का उत्सव: परंपरा, आधुनिकता और समाज सेवा का संगम

यह शादी सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि अडानी परिवार की समाज सेवा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जिसमें हर पहलू में कला, परंपरा और सशक्तिकरण जुड़ा हुआ है.

24-February-2025

शानदार रणनीति से BJP को दिल्ली में मिली बंपर जीत, जानिए कैसे मिली इतनी बड़ी सफलता?

BJP ने दिल्ली में AAP के 10 साल के शासन को खत्म किया, मजबूत रणनीति और दिल्ली BJP नेताओं की मेहनत से 48 सीटें जीत कर सफलता हासिल की है.

18-February-2025


बड़ी खबरें

Paytm के शेयरों में 7% से ज्यादा उछाल, पहली बार पूरे साल मुनाफे में आई कंपनी

मार्च तिमाही में कंपनी की कुल आय सालाना आधार पर 18.4 प्रतिशत बढ़कर 2,264 करोड़ रुपये हो गई. वहीं EBITDA भी अब पॉजिटिव हो गया है.

10 hours ago

RBI का बड़ा फैसला: मनी चेंजर्स के नए लाइसेंस पर रोक, फॉरेक्स कारोबार के लिए सख्त नियम लागू

नए नियमों के अनुसार, विदेशी मुद्रा सेवाएं देने के लिए ‘प्रिंसिपल-एजेंट मॉडल’ का विस्तार किया जाएगा. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सेवाएं बेहतर निगरानी और उचित जांच-परख के साथ प्रदान की जाएं.

8 hours ago

दमदार नतीजों के बाद बजाज ऑटो का बड़ा फैसला, डिविडेंड के साथ बायबैक का ऐलान

बजाज ऑटो के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने FY26 के लिए 150 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड की सिफारिश की है. यह 10 रुपये फेस वैल्यू वाले शेयर पर 1500 प्रतिशत डिविडेंड के बराबर है.

9 hours ago

भारत का निर्यात बना नई ताकत, 863 अरब डॉलर के पार पहुंचा विदेशी व्यापार

निर्यात वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान सेवा क्षेत्र का रहा है. सेवा निर्यात 2024-25 में 387.55 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 421.32 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो 8.71 प्रतिशत की वृद्धि है.

11 hours ago

AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में बढ़ेगी कोटक महिंद्रा की हिस्सेदारी, RBI से निवेश की मंजूरी

RBI की मंजूरी के बाद कोटक महिंद्रा बैंक का AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में निवेश भारतीय बैंकिंग सेक्टर में एक अहम रणनीतिक कदम माना जा रहा है.

11 hours ago