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बाबा रामदेव ने गठित किया भारतीय शिक्षा बोर्ड, जानें क्या हैं इसके मायने

शिक्षा मंत्रालय ने इस बोर्ड के गठन की मंजूरी दे दी है और बाबा रामदेव का तर्क है कि इस बोर्ड के जरिए वो भारतीय चिंतन का समावेशन कर सकेंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

नई दिल्लीः योग गुरु और पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के अध्यक्ष स्वामी रामदेव ने एक नए भारतीय शिक्षा बोर्ड का गठन किया है. शिक्षा मंत्रालय ने इस बोर्ड के गठन की मंजूरी दे दी है और बाबा रामदेव का तर्क है कि इस बोर्ड के जरिए वो भारतीय चिंतन का समावेशन कर सकेंगे. हालांकि इस बोर्ड के गठन के बाद ही इसका विरोध भी शुरू हो गया है. विरोध क्यों हो रहा है और इसका क्या कारण है, इसके बारे में हम बाद में बात करेंगे. सबसे पहले जानते हैं इस बोर्ड के गठन के इतिहास के बारे में.

2016 में प्रस्ताव को किया गया था खारिज

2015 में पहली बार बाबा रामदेव ने नया स्कूल शिक्षा बोर्ड बनाने का प्रस्ताव रखा था, जिसमें भारतीय चिंतन और आध्यात्म का समावेशन किया जा सके. शिक्षा मंत्रालय ने उसके बाद 2016 में बाबा रामदेव के इस प्रस्ताव को यह कहकर खारिज कर दिया है, कि किसी निजी संस्था को बोर्ड बनाने  कि अगर उनको मंजूरी दी तो फिर आगे ऐसे अनुरोधों का अंबार लग जाएगा. हालांकि इस देश में पहले से ही निजी बोर्ड और मदरसा बोर्ड चल रहे हैं.

रामदेव ने हार न मानी

बाबा रामदेव ने प्रस्ताव खारिज होने के बाद भी हार न मानी और वो नया शिक्षा बोर्ड बनाने के बारे में तर्क देते रहे. इसके बाद मंत्रालय की एक स्वायत संस्था महर्षि सांदीपनी राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन द्वारा भारतीय शिक्षा बोर्ड का प्रायोजक निकाय बनने के लिए आवेदन पत्र (EOI) मांगे गए. पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट ने इस बारे में अपना आवेदन प्रस्तुत किया. औपचारिक कार्यवाही के बाद भारतीय शिक्षा बोर्ड के गठन की प्रक्रिया पूरी की गई.

बोर्ड में जुड़े हैं ये लोग

इस बोर्ड में  डॉ. नागेंद्र प्रसाद सिंह जैसे सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी, स्वामी अवधेशानंद जैसे अध्यात्मिक गुरु, रश्मि चारी जैसी शिक्षाविदों के साथ-साथ बोर्ड में सीबीएसई, एनसीईआरटी, एमएसआरवीवीपी और विभिन्न प्रसिद्ध संस्कृत विश्वविद्यालयों से जुड़े विशेषज्ञों की मौजूदगी इसका प्रमाण है कि बोर्ड अपनी मुहिम को आगे ले जाने के प्रति बेहद गंभीर है.

छात्रों को मिलेगा आधुनिक व परंपरागत शिक्षा का समावेश

इस बोर्ड से मान्यता प्राप्त किए हुए विद्यालयों में आधुनिक और परंपरागत शिक्षा का समावेश मिलेगा. बोर्ड का पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार होगा.  इन विद्यालयों में वो सब होगा जो कि आज के आधुनिक विद्यालयों में बच्चों की शिक्षा के लिए मौजूद रहता है. वेद, पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों की पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों को हिंदी, अंग्रेजी, गणित, साइंस और सोशल साइंस जैसे विषय भी पढ़ाएं जाएंगे.

इसलिए हो रहा है विरोध

रामदेव के इस शिक्षा बोर्ड का विरोध केवल काशी के संत और महामंडलेश्वर कर रहे हैं. उनका कहना है कि स्वामी रामदेव आर्य समाजी हैं और वो मूर्ति पूजा नहीं करते हैं. ऐसे में उनके द्वारा गठित बोर्ड में कैसे देवी देवताओं के बारे में बताया जाएगा इस पर उनको संश्य है. संतों का कहना है कि बोर्ड में बाबा रामदेव की जगह किसी अन्य संत या फिर महांडलेश्वर को इसका अध्यक्ष बनाया जाए ताकि वैदिक शिक्षा का प्रचार प्रसार और छात्रों को सही ढंग से शिक्षा दी जा सके.

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