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पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश में भी मची आर्थिक रार, श्रीलंका न बनने के लिए मांगा IMF से लोन
देश की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई है, जिससे वो भी कंगाली की हालत में पहुंच चुका है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः पाकिस्तान के 6 अरब डॉलर के कर्ज मांगने के बाद अब भारत के एक और पड़ोसी देश बांग्लादेश ने भी आईएमएफ से कर्ज मांगा है. देश की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई है, जिससे वो भी कंगाली की हालत में पहुंच चुका है. वहीं श्रीलंका की स्थिति को नजरअंदाज करते हुए आईएमएफ ने पाकिस्तान को 13वीं बार बेलआउट की भीख देना स्वीकार कर लिया है. इससे आईएमएफ सहित अन्य देशों का पक्षपाती रवैया सामने आता दिख रहा है.
इसलिए मांगा बांग्लादेश ने लोन
बांग्लादेश ने आईएमएफ के पास से 4.5 अरब डॉलर का लोन इसलिए मांगा है ताकि देश की आर्थिक स्थिति को संभाला जा सके और उसकी हालत भी श्रीलंका जैसी न हो जाए. इसके लिए बांग्लादेश ने के लोन के लिए आवेदन किया है. इस विषय पर बांग्लादेश के वित्त मंत्री एएचएम मुस्तफा कमाल ने आधिकारिक तौर पर पत्र लिखा है.
इनके लिए की है मांग
बांग्लादेश के प्रमुख अखबार डेली स्टार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश ने अपने भुगतान के संतुलन को बनाए रखने, बजट की जरूरतों को पूरा करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए लोन की मांग की है.बांग्लादेश बैंक के डेटा के मुताबिक, पिछले साल जुलाई से इस साल मई के बीच बांग्लादेश का आयात 81.5 अरब डॉलर रहा जो एक साल पहले की तुलना में 39 फीसदी अधिक है.
आयात पर लगाया बैन, गिरा फॉरेन करेंसी रिजर्व
देश के विदेशी मुद्रा भंडार में भी तेज गिरावट देखने को मिली है. 20 जुलाई तक बांग्लादेश का विदेशी मुद्रा भंडार गिरकर 39.67 बिलियन डॉलर हो गया. जून महीने की अगर बात की जाए तो देश की मंहगाई दर नौ महीने के उच्च स्तर पर रही. देश ने कई लक्जरी वस्तुओं, फलों और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों के आयात पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. वहीं सरकार ने डॉलर को संरक्षित करने के लिए कई कदम उठाने की घोषणा कर दी है.
पाकिस्तान की हालत भी नाजुक
पाकिस्तान की हालत भी नाजुक हो गई है. पाकिस्तान घोर आर्थिक संकट से घिरा हुआ है और उसकी हालत दिन ब दिन खराब होती जा रही है.पाकिस्तान में महंगाई दर ने एक दशक का उच्चतम स्तर छू लिया है और खाने-पीने की चीजें बहुत महंगी हो गई हैं. छह महीने पहले एक पाकिस्तानी रुपये की कीमत 176 रुपये थी, जो अब करीब 233 रुपये के करीब है. जुलाई की शुरुआत में ही पाकिस्तान में पेट्रोल, डीजल और कैरोसीन के दामों में भारी इजाफा किया गया था.पाकिस्तान सरकार बिजली की कीमतों में 7.90 रुपये प्रति यूनिट की भारी-भरकम बढ़ोतरी की है. इस वृद्धि के बाद पाकिस्तान में बिजली की कीमत प्रति यूनिट 24.8 रुपये हो जाएगी.
पेट्रोल मिल रहा है 248.74 रुपये प्रति लीटर
इस महीने की शुरुआत में ही पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम भी बढ़ा दिए थे. पाकिस्तान की सरकार ने पेट्रोल पर 10 रुपये प्रति लीटर और डीजल, कैरोसिन तेल पर 5 रुपये प्रति लीटर पेट्रोलियम लेवी लगाने का निर्णय लिया था. सरकार के इस फैसले के बाद पेट्रोल की कीमत में 14.85 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई और पेट्रोल के दाम 248.74 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गए. हाईस्पीड डीजल की कीमतों में 13.23 रुपये और मिट्टी के तेल में 18.83 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है. इसके बाद पाकिस्तान में हाईस्पीड डीजल 276.54 रुपये प्रति लीटर तो मिट्टी का तेल 230.26 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है.
श्रीलंका को भूल पाक को दिया बेलआउट पैकेज
यहां पर आईएमएफ का नजरिया देखने के लायक है. 13वीं बार पाकिस्तान को आईएमएफ से लोन की भीख मिलेगी. हालांकि यहां पर आईएमएफ ने बड़ा पक्षपात किया है. श्रीलंका के हालात से हर कोई वाकिफ है, लेकिन श्रीलंका को सिसकते छोड़ दिया गया है. भारत एक पड़ोसी और बड़े भाई के नाते श्रीलंका को हर संभव मदद कर रहा है. आश्चर्य इस बात की है कि श्रीलंका के लिए अभी तक किसी भी देश ने बेलऑउट पैकेज का ऐलान नहीं किया है.
श्रीलंका ने लगाई मदद की गुहार लेकिन नहीं मिली कामयाबी
श्रीलंका ने भी IMF से बेलआउट की उम्मीद लगाई थी. श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल सिंघे ने देश को दिवालिया घोषित करते हुए आर्थिक मदद के लिए IMF से बातचीत करने की कोशिश की थी, लेकिन, सफलता नहीं मिली. हकीकत है कि जो स्थिति फिलहाल श्रीलंका की है, वैसी स्थिति पाकिस्तान की सालों पहले हो जानी चाहिए थी. लेकिन बार-बार मिल रहे बेलआउट पैकेज से उसकी स्थिति ऐसी नहीं हुई है और पाकिस्तान इसी भीख के चलते बचा हुआ है.
भारत की क्या है वर्तमान में स्थिति
साल 1991 के आर्थिक संकट के बाद भारत ने भी आईएमएफ से बेलऑउट पैकेज लिया था, लेकिन उसके बाद से हमने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. भारत का रुपया लगातार संघर्ष करते हुए स्थिर है. ये अभी भी विश्व की कई अन्य करेंसियों की तुलना में काफी मजबूत स्थिति में है. डॉलर के मुकाबले रुपया फिलहाल 80 के स्तर पर संघर्ष कर रहा है. कोरोना काल के झटकों से उभरते हुए देश ने कई मोर्चों पर लक्ष्य को हासिल किया है. महंगाई थामने के लिए रिजर्व बैंक के कई सख्त कदम उठाए हैं. भारत की विकास दर भी सात फीसदी से ऊपर बनी हुई है.
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