होम / एक्सप्लेनर / Demonetization: आतंकवाद और फेक करेंसी पर लगाम लगाने में कितनी सफल रही नोटबंदी?
Demonetization: आतंकवाद और फेक करेंसी पर लगाम लगाने में कितनी सफल रही नोटबंदी?
नोटबंदी के वक्त सरकार की तरफ से कहा गया था कि इस कदम से आतंकवाद और फेक करेंसी अपर लगाम लग जाएगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
'भाइयों बहनों, मैंने सिर्फ देश से 50 दिन मांगे हैं. 50 दिन. 30 दिसंबर तक मुझे मौका दीजिए मेरे भाइयों बहनों. अगर 30 दिसंबर के बाद कोई कमी रह जाए, कोई मेरी गलती निकल जाए, कोई मेरा गलत इरादा निकल जाए. आप जिस चौराहे पर मुझे खड़ा करेंगे, मैं खड़ा होकर..देश जो सजा देगा वो सजा भुगतने को तैयार हूं'. ये शब्द प्रधानमंत्री नरेंद मोदी के हैं, जो उन्होंने 8 नवंबर, 2016 को रात आठ बजे नोटबंदी की घोषणा के ठीक पांच दिन बाद कहे थे. नोटबंदी के तहत 500 और 1000 के नोटों को चलन से बाहर कर दिया गया था. उस समय सरकार की तरफ से दावा किया गया था कि नोटबंदी से फेक करेंसी, आतंकवाद और काले धन पर लगाम लगेगी.
2 हजार से ज्यादा घटनाएं
आतंकवाद की बात करें जम्मू-कश्मीर के आंकड़े ज्यादा उत्साहजनक नहीं हैं. कश्मीर घाटी शुरुआत से आतंक के साए में रही है. इसलिए जैसा सरकार दावा कर रही थी, नोटबंदी के बाद यहां आतंकी घटनाएं खत्म या निम्नस्तर पर पहुंच जानी चाहिए थी, लेकिन आंकड़े देखकर ऐसा नहीं लगता. 2014 से 2021 तक राज्य में दो हजार से ज्यादा आतंकी घटनाएं हो चुकी हैं और इस दौरान 501 जवान शहीद हुए हैं. इस दौरान घायल होने वाले जवानों का आंकड़ा 796 और मारे गए आम नागरिकों की संख्या 255 है.
ऐसा रहा J&K का हाल
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बीती दो फरवरी को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में बताया था कि 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से लेकर 26 जनवरी 2022 तक जम्मू कश्मीर में कुल 541 आतंकी घटनाएं हुईं. इन हमलों में 439 आतंकी भी मारे गए. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने यह भी बताया था कि इन घटनाओं के चलते कम से कम 5 करोड़ 30 लाख रुपए की निजी संपत्ति का नुकसान हुआ. इससे पहले, गृह मंत्रालय द्वारा 23 मार्च 2021 को लोकसभा में पेश किए गए एक लिखित जवाब के मुताबिक, जम्मू कश्मीर में साल 2014 में 222, 2015 में 208, 2016 (नोटबंदी वाले साल) में 322, 2017 में 342, 2018 में 614, 2019 में 594, 2020 में 244 और साल 2021 में 229 आतंकी घटनाएं हुई थीं.
कम हुईं, लेकिन फिर भी ज्यादा
हालांकि, 2019 की तुलना में 2020 और 2021 में आतंकी घटनाएं कम जरूर हुई, लेकिन फिर भी ये 2014 और 2015 से ज्यादा हैं. इस दौरान 2014 से लेकर 2021 तक आतंकी घटनाओं के चलते जम्मू-कश्मीर में 516 जवान शहीद हो गए. जबकि 2017 से 2021 के बीच सुरक्षाबलों के 796 जवान घायल हुए थे. इसमें कोई दोराय नहीं है कि देश के बाकी हिस्सों में कोई बड़ी आतंकी घटना सामने नहीं आई.
बढ़ रहे जाली नोट
अब जाली नोटों की बात करें, तो उस पर पूरी तरह रोक लगाने में सरकार नाकाम रही है. दूसरे शब्दों में कहें तो नोटबंदी इस मामले में पूरी तरह कारगर नहीं रही. आरबीआई (RBI) की सलाना रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 2021-22 में जाली नोटों की संख्या में बीते साल 2020-21 के मुकाबले 10.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इसमें सबसे ज्यादा जाली नोट 500 रुपए वाले मिल रहे हैं. 2021-22 में 500 रुपए के जाली नोट 2020-21 के मुकाबले 101.9 फीसदी ज्यादा पाए गए हैं. वहीं, 2021-22 में 2,000 के रुपए जाली नोटों की संख्या 2020-21 की तुलना में 54.16 फीसदी अधिक हो गई. 2020-21 में 2000 रुपए के 8,798 जाली नोट पकड़े गए थे. वित्त वर्ष 2021-22 में यह आंकड़ा बढ़कर 13,604 तक पहुंच गया.
टैग्स